जबलपुर. प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ताओं में स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार के प्रति बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है. समय पर वेतन न मिलने, बीमा राशि का भुगतान नहीं होने, वेतन पर्ची उपलब्ध नहीं कराए जाने, मामूली शिकायतों पर सेवा से हटाए जाने और कार्य परिस्थितियों को लेकर नाराज आशा कार्यकर्ताओं ने बुधवार को जबलपुर के घंटाघर क्षेत्र में जोरदार प्रदर्शन किया. बड़ी संख्या में एकत्रित हुई आशा कार्यकर्ताओं ने शासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की.
प्रदर्शन के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा बहनों के साथ लगातार उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया जा रहा है. उनका कहना है कि गांवों और शहरों में स्वास्थ्य योजनाओं को घर-घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, लेकिन बदले में उन्हें न तो समय पर वेतन मिलता है और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.
आशा कार्यकर्ताओं के प्रदेश संगठन की महासचिव पूजा कनौजिया ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से कार्य तो समय पर चाहता है, लेकिन वेतन देने के मामले में गंभीरता नहीं दिखाता. उन्होंने आरोप लगाया कि आशा कार्यकर्ताओं को कई-कई महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता है. कभी भी ऐसा नहीं होता कि वेतन हर महीने निर्धारित समय पर मिल जाए. वर्तमान में भी दो माह का भुगतान लंबित है, जबकि कई बार चार-चार महीने तक वेतन नहीं दिया जाता. उनका कहना है कि जब आशा कार्यकर्ता अपनी जिम्मेदारियां समय पर पूरी करती हैं तो विभाग को भी उनके मेहनताने का भुगतान समय पर करना चाहिए.
प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें वेतन तो बैंक खाते में भेज दिया जाता है, लेकिन कभी वेतन पर्ची नहीं दी जाती. इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि किस मद में कितना भुगतान हुआ है और कौन-कौन सी कटौतियां की गई हैं. संगठन ने इसे पारदर्शिता की कमी बताते हुए नियमित वेतन पर्ची जारी करने की मांग की है.
आशा कार्यकर्ताओं ने सरकार पर कार्य का अतिरिक्त बोझ डालने का भी आरोप लगाया. उनका कहना है कि भीषण गर्मी के बीच उन्हें घर-घर जाकर हेड अकाउंट सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं और पांच जून तक सर्वे पूरा कर जमा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एक ओर उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा, दूसरी ओर कठिन परिस्थितियों में लगातार अतिरिक्त कार्य करवाया जा रहा है. इससे आशा कार्यकर्ताओं को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
पूजा कनौजिया ने कहा कि प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं में मिलने वाले पुरस्कारों और उपलब्धियों के पीछे आशा कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, लेकिन इन उपलब्धियों का श्रेय अधिकारी ले जाते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाली आशा कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता. उन्होंने बताया कि संगठन ने राज्य सरकार से एक हजार रुपये और केंद्र सरकार से डेढ़ हजार रुपये की वेतन वृद्धि की मांग भी की है.
प्रदर्शन के दौरान सेवा सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया. आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि छोटी-छोटी शिकायतों के आधार पर उन्हें नौकरी से हटा दिया जाता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जबलपुर के पनागर क्षेत्र में एक पार्षद की शिकायत के बाद दो आशा कार्यकर्ताओं को सेवा से हटा दिया गया, जबकि उनसे कोई स्पष्टीकरण तक नहीं मांगा गया. संगठन का कहना है कि बिना जांच और बिना पक्ष सुने किसी भी कर्मचारी को हटाना अन्यायपूर्ण है.
बीमा और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर भी आशा कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए. उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में छह आशा कार्यकर्ताओं की मृत्यु हो चुकी है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार मृत्यु की स्थिति में दो लाख रुपये की बीमा सहायता राशि दी जानी चाहिए, लेकिन किसी भी परिवार को यह राशि प्राप्त नहीं हुई. इसी प्रकार सेवानिवृत्ति पर मिलने वाली एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता राशि भी कई पात्र आशा कार्यकर्ताओं को नहीं मिली है.
प्रदर्शन के दौरान एचबीएनसी किट की गुणवत्ता का मुद्दा भी उठाया गया. संगठन की महासचिव ने आरोप लगाया कि बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए उपलब्ध कराई जा रही किट निम्न गुणवत्ता की है. उन्होंने कहा कि जिन उपकरणों से नवजात और छोटे बच्चों का वजन तथा स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना है, वे मानकों के अनुरूप नहीं हैं. उनका दावा था कि तीन किलो वजन वाले बच्चे को जिस थैले में रखकर तौलने की व्यवस्था की गई है, उसमें एक किलो का बच्चा भी ठीक से नहीं रखा जा सकता. ऐसे में स्वास्थ्य परीक्षण की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं.
आशा कार्यकर्ताओं ने मांग की कि समय पर वेतन भुगतान, नियमित वेतन पर्ची, सेवा सुरक्षा, बीमा राशि का भुगतान, सेवानिवृत्ति लाभ और कार्य परिस्थितियों में सुधार के लिए सरकार तत्काल ठोस कदम उठाए. उनका कहना है कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.
प्रदर्शन के दौरान मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने आशा कार्यकर्ताओं का ज्ञापन प्राप्त किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और शिकायतों को शासन स्तर तक पहुंचाया जाएगा. हालांकि आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन नहीं बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कार्रवाई चाहिए. फिलहाल प्रदेशभर की आशा कार्यकर्ताओं की नजर अब सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

