नई दिल्ली। देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में इस वर्ष पहली बार रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया। आयोग ने देशभर के सभी परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की पहचान सत्यापित करने के लिए इस तकनीक को लागू किया, जिससे फर्जी अभ्यर्थियों और प्रतिरूपण की संभावनाओं पर प्रभावी रोक लगाने का दावा किया गया है।
केंद्र सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार 24 मई को आयोजित सिविल सेवा एवं भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा के दौरान देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर यह व्यवस्था लागू की गई। इस तकनीक के तहत आवेदन के समय उम्मीदवार द्वारा अपलोड की गई फोटो का मिलान परीक्षा केंद्र पर उपस्थित व्यक्ति के चेहरे से किया गया। सत्यापन पूरा होने के बाद ही अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष में प्रवेश की अनुमति दी गई।
यूपीएससी ने इस प्रक्रिया के लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन विकसित की थी, जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एनईजीडी) के तकनीकी सहयोग से तैयार किया गया। इस एप्लीकेशन का उपयोग परीक्षा केंद्रों पर तैनात निरीक्षकों ने किया। खास बात यह रही कि इसके लिए किसी विशेष मशीन या महंगे उपकरण की जरूरत नहीं पड़ी। निरीक्षकों ने अपने एंड्रॉयड स्मार्टफोन के माध्यम से ही उम्मीदवारों का सत्यापन किया।
आयोग के अनुसार फेस ऑथेंटिकेशन की पूरी प्रक्रिया औसतन छह से आठ सेकंड में पूरी हो रही थी। इससे परीक्षा केंद्रों पर भीड़ या लंबी कतारें नहीं लगीं और अभ्यर्थियों का प्रवेश सुचारु रूप से होता रहा। परीक्षा के दौरान एक समय में सात हजार से अधिक निरीक्षकों ने इस एप्लीकेशन का उपयोग किया। पीक आवर्स में प्रति मिनट लगभग 12 हजार फेस ऑथेंटिकेशन किए गए, जो इस प्रणाली की क्षमता को दर्शाता है।
यूपीएससी ने इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले राज्यों, जिलों और परीक्षा केंद्रों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी तैयार की थी। इसके साथ ही निरीक्षकों को कई चरणों में प्रशिक्षण दिया गया ताकि तकनीक का उपयोग बिना किसी बाधा के किया जा सके। आयोग का कहना है कि इस तैयारी की वजह से परीक्षा के दिन किसी बड़ी तकनीकी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।
यूपीएससी अध्यक्ष Ajay Kumar ने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रतिरूपण मुक्त परीक्षा प्रणाली सुनिश्चित करना है। उनके अनुसार तकनीक को विकसित करने के साथ-साथ देशभर में बड़े पैमाने पर लागू करना और हजारों निरीक्षकों को प्रशिक्षित करना भी एक बड़ी चुनौती थी, जिसे सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
गौरतलब है कि सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। पिछले वर्ष इस परीक्षा के लिए 9.37 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जिनमें से करीब 5.76 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। अंतिम चयन केवल 958 उम्मीदवारों का हुआ था।
विशेषज्ञों का मानना है कि फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के उपयोग से परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता में वृद्धि होगी। साथ ही फर्जी उम्मीदवारों और पहचान संबंधी धोखाधड़ी के मामलों पर अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी। यूपीएससी की इस पहल को भविष्य में अन्य बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

