नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईंधन बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) के लिए नई स्थिर मूल्य प्रणाली लागू कर दी है. नई व्यवस्था के तहत दिल्ली में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों के लिए एटीएफ का विक्रय मूल्य लगभग 115 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है. सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य एयरलाइंस को ईंधन की कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी से बचाना और विमानन क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना है.
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के निदेशक रोहित राज ने अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग के दौरान नई मूल्य निर्धारण प्रणाली की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने पहले लागू मूल्य सीमा (कैपिंग) व्यवस्था को समाप्त कर अब स्थायी मूल्य निर्धारण तंत्र लागू किया है. उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतों में अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जिसके कारण एयरलाइंस के परिचालन खर्च में भारी वृद्धि की आशंका पैदा हो गई थी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार मार्च 2026 में एटीएफ की आधार कीमत 60.50 रुपये प्रति लीटर थी. हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ीं और मई 2026 तक अंतरराष्ट्रीय समता मूल्य (आईपीपी) लगभग 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया. इससे भारतीय विमानन कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ने लगा था.
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पहले मार्च की आधार कीमत पर अधिकतम 25 प्रतिशत वृद्धि की सीमा तय की थी. इस व्यवस्था के तहत एटीएफ की कीमत लगभग 75.62 रुपये प्रति लीटर तक सीमित रखी गई थी. करों और अन्य शुल्कों को जोड़ने के बाद दिल्ली में इसका विक्रय मूल्य करीब 104 रुपये प्रति लीटर पड़ रहा था. लेकिन सरकार ने अब मूल्य सीमा प्रणाली को हटाकर स्थिर मूल्य तंत्र लागू करने का निर्णय लिया है.
नई व्यवस्था के तहत घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ का आधार मूल्य 86.32 रुपये प्रति लीटर और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 104.49 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है. इसके बाद हवाई अड्डा शुल्क और अन्य लागू शुल्क जोड़ने पर दिल्ली में अंतिम विक्रय मूल्य लगभग 115 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है. सरकार का दावा है कि इससे एयरलाइंस को ईंधन लागत का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी और किरायों में अनावश्यक उतार-चढ़ाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा.
इस फैसले से एक दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तेल विपणन कंपनियों को एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता उपलब्ध कराने के लिए अधिकतम 10 हजार करोड़ रुपये की एकमुश्त बजटीय सहायता को मंजूरी दी थी. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह सहायता घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों प्रकार की भारतीय विमानन कंपनियों को ईंधन मूल्य अस्थिरता से बचाने के लिए दी जा रही है.
विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन ईंधन एयरलाइंस की कुल परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा होता है. ईंधन कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता के दौरान यह हिस्सा 60 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. ऐसे में सरकार का यह कदम एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को स्थिर रखने और यात्रियों पर संभावित किराया वृद्धि का बोझ कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
नई मूल्य निर्धारण प्रणाली लागू होने के बाद अब विमानन उद्योग की नजर इस बात पर होगी कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में आगे क्या रुख रहता है और सरकार की यह स्थिरीकरण योजना कितनी प्रभावी साबित होती है. फिलहाल केंद्र सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था से एयरलाइंस को राहत मिलेगी और हवाई सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

