जबलपुर. जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर स्थित शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बड़ा निर्णय लिया है. फरवरी 2026 में पुल का एक हिस्सा धंसने के बाद अब केवल मरम्मत या सीमित सुधार की योजना को खारिज कर दिया गया है. इसके स्थान पर ओवरब्रिज को पूरी तरह नई डिजाइन के साथ दोबारा तैयार किया जाएगा. इस फैसले के बाद परियोजना की लागत और निर्माण अवधि दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होने जा रही है.
जानकारी के अनुसार पहले पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत कर उसे पुनः उपयोग में लाने पर विचार किया जा रहा था, लेकिन तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों की समीक्षा के बाद केंद्रीय मंत्रालय ने पुरानी डिजाइन में बदलाव का निर्णय लिया. अधिकारियों का मानना है कि बढ़ते यातायात दबाव और पुल के बार-बार क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं को देखते हुए दीर्घकालिक समाधान आवश्यक है. इसी कारण अब ओवरब्रिज को नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा.
नई डिजाइन के अनुसार निर्माण कार्य में 30 करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त लागत आने का अनुमान लगाया गया है. खास बात यह है कि इस अतिरिक्त वित्तीय भार को सड़क निर्माण कंपनी को ही वहन करना होगा. मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा और गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा तथा निर्माण कार्य को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाएगा.
अधिकारियों के मुताबिक नई डिजाइन को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है. निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे पूरा करने में करीब पांच से छह महीने का समय लग सकता है. हालांकि आगामी मानसून को देखते हुए निर्माण एजेंसियों के सामने समय पर काम पूरा करने की चुनौती भी रहेगी.
फरवरी 2026 में शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज का लगभग 200 मीटर हिस्सा धंस जाने के बाद जबलपुर-भोपाल हाईवे पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया था. इस घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पुल पर आवागमन बंद कर दिया था और वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से डायवर्ट किया गया था. घटना के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया था क्योंकि यह पुल महज तीन वर्ष पुराना बताया गया था और इसके निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत आई थी.
विशेषज्ञों के अनुसार यह दूसरा अवसर है जब यह ओवरब्रिज गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ है. लगातार सामने आ रही तकनीकी समस्याओं ने निर्माण गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर भी सवाल खड़े किए थे. इसी पृष्ठभूमि में मंत्रालय ने पुराने ढांचे को आंशिक रूप से सुधारने के बजाय व्यापक पुनर्निर्माण का विकल्प चुना है.
दूसरी ओर, पुल बंद रहने के कारण आसपास के वैकल्पिक मार्गों पर यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है. इसे देखते हुए मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) ने डायवर्सन मार्गों को स्थायी रूप से मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है. शहपुरा नगर के भीतर से गुजरने वाले डायवर्सन रोड और घंसौर रोड को अब पक्का और मजबूत बनाया जाएगा ताकि भारी वाहनों की आवाजाही सुचारु रूप से जारी रह सके.
वर्तमान में इन मार्गों पर अस्थायी व्यवस्था के तहत डीबीएम सड़क तैयार की गई थी, लेकिन लगातार भारी वाहनों के संचालन से सड़क तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगी है. विभाग को आशंका है कि बारिश शुरू होने के बाद इन सड़कों की स्थिति और खराब हो सकती है, जिससे आवागमन प्रभावित होगा. इसी कारण स्थायी समाधान के तौर पर सड़क सुदृढ़ीकरण का कार्य भी जल्द शुरू किया जाएगा.
स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने भी ओवरब्रिज के शीघ्र निर्माण की मांग की है. उनका कहना है कि पुल बंद होने से यात्रा का समय बढ़ गया है और परिवहन लागत पर भी असर पड़ रहा है. भारी वाहनों को लंबा चक्कर लगाकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और समय दोनों बढ़ रहे हैं.
प्रशासन का दावा है कि नई डिजाइन के साथ बनने वाला रेलवे ओवरब्रिज अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आधुनिक मानकों के अनुरूप होगा. निर्माण कार्य शुरू होने के बाद नियमित निगरानी की जाएगी ताकि भविष्य में किसी प्रकार की तकनीकी खामी सामने न आए. फिलहाल क्षेत्र के लोगों की नजरें इस महत्वपूर्ण परियोजना पर टिकी हुई हैं, क्योंकि जबलपुर-भोपाल हाईवे मध्य प्रदेश के प्रमुख यातायात मार्गों में से एक माना जाता है और इस पुल का पुनर्निर्माण हजारों यात्रियों तथा परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए राहत लेकर आएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

