नई दिल्ली. भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस के एक महत्वपूर्ण भंडार की खोज ने देश के ऊर्जा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं. सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को अंडमान बेसिन में चल रहे अपने अन्वेषण अभियान के दौरान एक और बड़े गैस भंडार का पता चला है. केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस खोज की आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए इसे देश के ऊर्जा भविष्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है.
केंद्रीय मंत्री ने इस सफलता को अंडमान सागर में मौजूद ऊर्जा संभावनाओं का प्रमाण बताते हुए ऑयल इंडिया लिमिटेड की पूरी टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह खोज भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने और आयातित तेल एवं गैस पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.
जानकारी के अनुसार प्राकृतिक गैस की यह खोज ‘श्री विजयापुरम-3’ नामक खोजी कुएं में हुई है. यह कुआं अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर समुद्री क्षेत्र में स्थित है. ऑयल इंडिया लिमिटेड ने इस स्थान पर 355 मीटर गहरे समुद्री जल में ड्रिलिंग अभियान संचालित किया था. अन्वेषण के दौरान इओसीन फॉर्मेशन में 1900 मीटर से अधिक की गहराई पर परीक्षण किया गया, जहां लगातार फ्लेरिंग देखी गई. विशेषज्ञों के अनुसार यह प्राकृतिक गैस की मौजूदगी का मजबूत संकेत माना जाता है और इससे गैस भंडार मिलने की पुष्टि हुई है.
कंपनी अब इस गैस भंडार की गुणवत्ता और व्यावसायिक संभावनाओं का विस्तृत मूल्यांकन कर रही है. इसके लिए गैस के नमूने एकत्र किए जा रहे हैं, ताकि उसकी संरचना, ऊर्जा क्षमता और व्यावसायिक उपयोगिता का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा सके. साथ ही गैस की उत्पत्ति और उसके भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने के लिए आइसोटोप विश्लेषण भी किया जा रहा है.
विशेषज्ञों के अनुसार यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंडमान बेसिन में ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा खोदे गए मौजूदा तीन खोजी कुओं में से यह दूसरा कुआं है, जहां हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी दर्ज की गई है. लगातार दो सफल खोजों ने यह संकेत दिया है कि अंडमान क्षेत्र में तेल और गैस के बड़े भंडार मौजूद हो सकते हैं, जिनकी भविष्य में और खोज की जा सकती है.
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि आगे के परीक्षणों में इस गैस भंडार की व्यावसायिक उपयोगिता प्रमाणित हो जाती है तो यह भारत के लिए एक रणनीतिक उपलब्धि साबित होगी. वर्तमान में देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर प्राकृतिक गैस और हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगी.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस 2025 पर घोषित राष्ट्रीय डीप वॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन, जिसे ‘समुद्र मंथन मिशन’ नाम दिया गया है, के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी. इस मिशन के तहत देश के अपतटीय क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में तेल एवं गैस की खोज की जा रही है. सरकार का लक्ष्य ऐसे नए ऊर्जा स्रोतों की पहचान करना है, जो आने वाले वर्षों में देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकें.
अंडमान बेसिन में मिली लगातार सफलताओं ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों का ध्यान भी आकर्षित किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में भविष्य के अन्वेषण अभियानों में वैश्विक स्तर की कंपनियों की भागीदारी बढ़ सकती है. केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया है कि भविष्य में पेट्रोब्रास, टोटलएनर्जीज, बीपी, शेल और एक्सॉनमोबिल जैसी अग्रणी वैश्विक कंपनियों के अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ भी भारत को मिल सकता है.
अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस की यह नई खोज ऐसे समय में सामने आई है, जब भारत स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है. प्राकृतिक गैस को अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन माना जाता है और सरकार भी देश में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है. ऐसे में अंडमान क्षेत्र से मिली यह सफलता न केवल ऊर्जा क्षेत्र के लिए उत्साहजनक है, बल्कि भारत की दीर्घकालिक आर्थिक और रणनीतिक मजबूती के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
फिलहाल ऑयल इंडिया लिमिटेड द्वारा आगे के परीक्षण और मूल्यांकन का कार्य जारी है. विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि यह गैस भंडार कितना बड़ा है और भविष्य में देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में इसकी क्या भूमिका हो सकती है. यदि अनुमान सही साबित होते हैं तो अंडमान सागर भारत के लिए ऊर्जा के एक नए और महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

