एचओडी बनकर छात्रा को लगाया चूना, स्कॉलरशिप और डिग्री के नाम पर 90 हजार ठगे, अधिकारी के खाते से भी उड़ाए 2.44 लाख

एचओडी बनकर छात्रा को लगाया चूना, स्कॉलरशिप और डिग्री के नाम पर 90 हजार ठगे, अधिकारी के खाते से भी उड़ाए 2.44 लाख

प्रेषित समय :19:51:56 PM / Fri, Jun 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

भोपाल. राजधानी में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामलों ने एक बार फिर ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है. एक ओर साइबर ठगों ने कॉलेज के विभागाध्यक्ष (एचओडी) बनकर एक छात्रा को स्कॉलरशिप और डिग्री दिलाने का झांसा दिया और उसके पिता के बैंक खाते से 90 हजार रुपये निकाल लिए, वहीं दूसरी ओर एक फार्मा कंपनी के अधिकारी के खाते से मोबाइल अपडेट करने के बाद करीब 2.44 लाख रुपये की रकम पार कर दी गई. दोनों मामलों में कजलीखेड़ा थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

पुलिस के अनुसार पहला मामला ग्राम इमलिया निवासी करीना यादव से जुड़ा है. करीना हाल ही में अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी कर चुकी है. कुछ दिन पहले उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को उसके कॉलेज का विभागाध्यक्ष बताया. बातचीत के दौरान आरोपी ने छात्रा को विश्वास में लेते हुए कहा कि उसकी स्कॉलरशिप और डिग्री से संबंधित प्रक्रिया पूरी की जानी है और इसके लिए कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.

ठग ने छात्रा को सबसे पहले अपना मोबाइल नंबर जियो कंपनी में पोर्ट कराने की सलाह दी. छात्रा ने सामने वाले व्यक्ति को कॉलेज का अधिकारी समझकर उसकी बातों पर भरोसा कर लिया और बताए अनुसार सिम पोर्ट करा ली. इसके बाद आरोपी ने उससे पूछा कि वह किस मोबाइल नंबर के माध्यम से यूपीआई सेवा का उपयोग करती है. जानकारी मिलने पर उसने छात्रा के मोबाइल पर एक लिंक भेजी और कहा कि स्कॉलरशिप एवं डिग्री संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के लिए उस लिंक पर क्लिक कर आवेदन करना आवश्यक है.

छात्रा ने बिना किसी संदेह के लिंक पर क्लिक कर निर्देशों का पालन किया. इसी दौरान साइबर ठगों ने उसके बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच बना ली. कुछ ही देर में उसके पिता के बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 90 हजार रुपये निकाल लिए गए. जब मोबाइल पर खाते से रकम कटने के संदेश आने लगे तब परिवार को ठगी का एहसास हुआ. इसके बाद पीड़िता ने कजलीखेड़ा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई.

पुलिस ने बताया कि साइबर ठगों ने सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल कर छात्रा का विश्वास जीता और उसे तकनीकी प्रक्रिया के नाम पर धोखे में रखकर बैंक खाते की जानकारी और एक्सेस हासिल कर लिया. मामले में तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं तथा मोबाइल नंबर, लिंक और बैंक खातों की जांच की जा रही है.

इसी थाना क्षेत्र में साइबर ठगी का दूसरा मामला लक्ष्मी परिसर निवासी अंकित शिवहरे के साथ सामने आया है. अंकित एक फार्मा कंपनी में कार्यरत हैं. उन्होंने पुलिस को बताया कि 25 मई को उन्होंने अपने मोबाइल फोन का सॉफ्टवेयर अपडेट किया था. इसके कुछ समय बाद उनके मोबाइल पर बैंक खाते से राशि कटने संबंधी लगातार नोटिफिकेशन आने लगे.

शुरुआत में उन्हें तकनीकी गड़बड़ी का संदेह हुआ, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की विस्तृत जानकारी जांची तो पता चला कि अलग-अलग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 2 लाख 44 हजार रुपये निकाले जा चुके हैं. खाते से बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल बैंक अधिकारियों से संपर्क किया और खाते को सुरक्षित कराने की प्रक्रिया शुरू कराई.

बाद में अंकित शिवहरे ने कजलीखेड़ा थाने पहुंचकर पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल डाटा, डिजिटल लॉग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठग लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं. कभी बैंक अधिकारी, कभी सरकारी कर्मचारी, तो कभी शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि बनकर लोगों को झांसे में लिया जा रहा है. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें.

दोनों मामलों की जांच जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि डिजिटल ट्रेल और बैंकिंग रिकॉर्ड के आधार पर जल्द ही आरोपियों तक पहुंचा जा सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-