एआईपीईएफ ने विद्युत संशोधन विधेयक, निजीकरण, कृषि डिस्कॉम के गठन के प्रयासों का विरोध, ओपीएस बहाली की मांग

एआईपीईएफ ने विद्युत संशोधन विधेयक, निजीकरण, कृषि डिस्कॉम के गठन के प्रयासों का विरोध, ओपीएस बहाली की मांग

प्रेषित समय :20:00:49 PM / Sat, Jun 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. अखिल भारतीय विद्युत अभियंता महासंघ (एआईपीईएफ) की फेडरल एग्जीक्यूटिव की बैठक 12 जून शुक्रवार को बेंगलुरु में सम्पन्न हुई. बैठक में देश के विद्युत क्षेत्र में चल रही निजीकरण एवं सार्वजनिक विद्युत उपक्रमों के विखंडन संबंधी नीतियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अनेक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए. महासंघ ने सार्वजनिक स्वामित्व, उपभोक्ता हितों तथा विद्युत कर्मचारियों एवं अभियंताओं के अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.

बैठक की अध्यक्षता एआईपीईएफ के चेयरमैन श्री शैलेन्द्र दुबे ने की. उद्घाटन सत्र को एआईपीईएफ के महासचिव श्री पी. रत्नाकर राव, केईबी इंजीनियर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष इं. बसवन्ना तथा महासचिव इं. चंद्रशेखर देसाई सहित एआईपीईएफ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संबोधित किया.

एआईपीईएफ ने प्रस्तावित विद्युत (संशोधन) विधेयक, 2025 का कड़ा विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की. महासंघ का मत है कि यह विधेयक एक ही क्षेत्र में अनेक वितरण लाइसेंसधारियों को अनुमति देकर विद्युत वितरण के निजीकरण का मार्ग प्रशस्त करता है. इससे लाभकारी उपभोक्ताओं की चुनिंदा आपूर्ति को बढ़ावा मिलेगा, सार्वजनिक डिस्कॉम कमजोर होंगे, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था समाप्त होगी तथा आम उपभोक्ताओं एवं किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि यह विधेयक संसद के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया गया तो देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन चलाया जाएगा.

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने कर्नाटक विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष टाटा पावर द्वारा राज्य के पांचों एस्कॉम क्षेत्रों में 19 जिलों हेतु दायर समानांतर वितरण लाइसेंस आवेदन का भी कड़ा विरोध किया. साथ ही हरियाणा के गुरुग्राम एवं नूंह क्षेत्रों में इलेवन पावर लिमिटेड जैसी निजी कंपनियों को वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रयासों का भी विरोध किया गया. एआईपीईएफ ने इसे निजीकरण का पिछला दरवाजा बताते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी और आम उपभोक्ताओं, किसानों एवं कमजोर वर्गों के लिए सस्ती बिजली उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा.

महासंघ ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, हरियाणा तथा अन्य राज्यों में अलग कृषि डिस्कॉम बनाने के प्रस्तावों का भी विरोध किया. एआईपीईएफ का मानना है कि यह व्यवस्था तकनीकी रूप से अनुचित, वित्तीय रूप से अस्थिर तथा एकीकृत सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए हानिकारक है. इससे क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था कमजोर होगी, सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता बढ़ेगी, लाभकारी औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को अलग करने का मार्ग प्रशस्त होगा तथा अंतत: वितरण क्षेत्र के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा. महासंघ ने राज्यों एवं केंद्र सरकार से सार्वजनिक डिस्कॉम को मजबूत करने की मांग की.

एआईपीईएफ ने आंध्र प्रदेश में गूगल एआई डाटा सेंटर को प्रस्तावित डीम्ड डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिए जाने का भी विरोध किया. महासंघ ने इसे भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे राज्य के डिस्कॉम की वित्तीय स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा तथा समान प्रतिस्पर्धा एवं सार्वजनिक हित के सिद्धांतों का उल्लंघन होगा.

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने लद्दाख पावर डेवलपमेंट डिपार्टमेंट (एलपीडीडी) के संयुक्त उद्यम एवं निगमकरण (कॉरपोरेटाइजेशन) के प्रस्ताव का भी कड़ा विरोध किया. महासंघ ने कहा कि सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों की विद्युत परिसंपत्तियां पूर्णत: सार्वजनिक स्वामित्व एवं नियंत्रण में रहनी चाहिए तथा सार्वजनिक धन से निर्मित परिसंपत्तियों को किसी निगमित इकाई को हस्तांतरित नहीं किया जाना चाहिए.

एआईपीईएफ ने उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरुद्ध चल रहे बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं के लोकतांत्रिक आंदोलन के प्रति पूर्ण एकजुटता व्यक्त की. महासंघ ने निजीकरण के निर्णय वापस लेने तथा आंदोलन के दौरान कर्मचारियों एवं अभियंताओं पर की गई सभी दमनात्मक एवं उत्पीडऩात्मक कार्यवाहियों को बिना शर्त समाप्त करने की मांग की. महासंघ ने चेतावनी दी कि यदि दमन बढ़ाया गया तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा.

फेडरल एग्जीक्यूटिव ने देशभर के विद्युत कर्मचारियों एवं अभियंताओं के लिए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) बहाल करने की भी सर्वसम्मति से मांग की. झारखंड एवं राजस्थान में हुए सकारात्मक निर्णयों का स्वागत करते हुए एआईपीईएफ ने कहा कि पेंशन कोई अनुग्रह नहीं बल्कि कर्मचारियों का सामाजिक सुरक्षा अधिकार है. जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में कार्य करने वाले विद्युत कर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन सुनिश्चित किया जाना चाहिए.

एआईपीईएफ ने पुन: स्पष्ट किया कि बिजली एक आवश्यक सार्वजनिक सेवा है, मात्र व्यावसायिक वस्तु नहीं. महासंघ ने सार्वजनिक स्वामित्व वाली उत्पादन, पारेषण एवं वितरण कंपनियों की रक्षा, उपभोक्ता हितों के संरक्षण, सभी वर्गों को सस्ती एवं विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने तथा विद्युत कर्मचारियों एवं अभियंताओं के अधिकारों एवं सामाजिक सुरक्षा की रक्षा हेतु राष्ट्रव्यापी संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया.

बैठक में कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, पुडुचेरी, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, दामोदर वैली कॉरपोरेशन, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश एवं दिल्ली सहित 21 राज्यों/संस्थानों के पदाधिकारियों ने भाग लिया. मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ के महासचिव विकास शुक्ला  और प्रचार सचिव नरेंद्र चंदेल बैठक में बैंगलोर पहुंचकर बैठक में शामिल हुए, बैठक में महासचिव विकास शुक्ला ने बैठक को संबोधित करते हुए निजीकरण के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष में सभी प्रदेश के साथ मिलकर निर्णयक लड़ाई लड़ी जाएगी, मध्य प्रदेश विद्युत मंडल अभियंता संघ निजीकरण के विरुद्ध निर्णायक संघर्ष के लिए प्रतिबद्ध है. 
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-