राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, गणना कक्ष के कर्मचारी की बदली लाइफस्टाइल से गहराया शक

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में नया मोड़, गणना कक्ष के कर्मचारी की बदली लाइफस्टाइल से गहराया शक

प्रेषित समय :19:56:23 PM / Sun, Jun 14th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अयोध्या. देश के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में शामिल Ram Mandir में चढ़ावे की राशि को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है. करोड़ों रुपये के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बीच जांच एजेंसियों का फोकस अब मंदिर के गणना कक्ष में तैनात रहे एक कर्मचारी पर भी केंद्रित हो गया है. जांच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक गणना कक्ष में ड्यूटी मिलने के बाद कर्मचारी की जीवनशैली में अचानक आए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई है.

सूत्रों के अनुसार मिल्कीपुर क्षेत्र से जुड़े लवकुश मिश्रा का नाम जांच एजेंसियों की पड़ताल में सामने आया है. बताया जा रहा है कि करीब पांच महीने पहले उसकी ड्यूटी मंदिर के उस गणना कक्ष में लगाई गई थी, जहां श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे की गिनती की जाती है. जांच से जुड़े अधिकारियों को संदेह है कि इसी अवधि के दौरान उसकी आर्थिक स्थिति में असामान्य बदलाव देखने को मिला. गांव के लोगों का दावा है कि पहले सामान्य जीवन जीने वाला व्यक्ति अचानक खुलकर खर्च करने लगा था.

स्थानीय लोगों के अनुसार लवकुश जब भी गांव पहुंचता था तो उसके खर्च करने के तरीके को लेकर चर्चाएं शुरू हो जाती थीं. ग्रामीणों का कहना है कि एक अवसर पर उसने कथित तौर पर शराब के ठेके पर ही लगभग 50 हजार रुपये खर्च कर दिए थे. इसके अलावा उसकी जीवनशैली और खर्चों में आए बदलाव ने भी गांव वालों का ध्यान आकर्षित किया था. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसियां इन सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं.

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब कुछ दिन पहले विशेष जांच टीम, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों का दल गांव पहुंचा. बताया जा रहा है कि जांच टीम के साथ राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव भी मौजूद थे. अधिकारियों की इस अचानक मौजूदगी से पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और लोगों का ध्यान इस मामले की ओर गया.

दरअसल विवाद की शुरुआत 7 जून को हुई थी, जब समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये तक की कथित चोरी का आरोप लगाया था. आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मच गई. उसी दिन ट्रस्ट की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया गया और कहा गया कि मंदिर में नियमित रूप से ऑडिट कराया जाता है तथा किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी नहीं हुई है.

इसके बाद मामला लगातार चर्चा में बना रहा. 9 जून को भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस प्रकरण की जांच की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को पत्र भेजा. इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी मामले की जानकारी मांगे जाने की चर्चा सामने आई. 10 जून को ट्रस्ट से चढ़ावे और दान राशि के मिलान से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई.

विवाद को और हवा तब मिली जब 11 जून को मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का एक वीडियो सामने आया. वीडियो में उन्होंने दावा किया कि पूर्व में भी लाखों रुपये की कथित चोरी का मामला सामने आया था, जिसे दबा दिया गया. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.

बढ़ते विवाद और लगातार उठ रहे सवालों के बीच 13 जून को मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया. अब जांच एजेंसियां चढ़ावे की राशि, लेखा-जोखा, कर्मचारियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही हैं. दूसरी ओर मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Mishra ने अयोध्या दौरे के दौरान इस विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह निर्माण कार्यों की समीक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.

फिलहाल एसआईटी की जांच जारी है और सभी आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी. इस बीच देशभर की निगाहें इस मामले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह विवाद करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिर और उसके वित्तीय प्रबंधन से संबंधित है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-