अहमदाबाद. शेयर बाजार और आईपीओ में मोटे मुनाफे का सपना दिखाकर साइबर ठगों ने अहमदाबाद के एक 71 वर्षीय सेवानिवृत्त फार्मास्युटिकल सलाहकार से 1.21 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. ठगों ने खुद को एक प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनी का प्रतिनिधि बताकर पहले बुजुर्ग का भरोसा जीता, फिर उन्हें एक फर्जी निवेश ऐप डाउनलोड करवाया और करीब तीन महीने तक निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये ऐंठते रहे. जब पीड़ित ने अपनी रकम और मुनाफा निकालने की कोशिश की तो पूरे खेल का पर्दाफाश हुआ.
साइबर अपराध का यह मामला अहमदाबाद के वासना क्षेत्र का है, जहां रहने वाले रिटायर्ड फार्मा सलाहकार को 19 मार्च को एक व्हाट्सएप संदेश मिला. संदेश भेजने वाली महिला ने खुद को एक नामी वित्तीय सेवा कंपनी की प्रतिनिधि बताया और शेयर बाजार में निवेश के जरिए आकर्षक मुनाफा कमाने का प्रस्ताव दिया. शुरुआती बातचीत के बाद पीड़ित को एक विशेष स्टॉक मार्केट सलाहकार समूह में जोड़ दिया गया.
इस समूह में रोजाना ऐसे संदेश और स्क्रीनशॉट साझा किए जाते थे, जिनमें निवेशकों को शेयर ट्रेडिंग और आईपीओ से भारी मुनाफा कमाते हुए दिखाया जाता था. जांच एजेंसियों का मानना है कि ये सभी स्क्रीनशॉट और लाभ संबंधी दावे फर्जी थे, जिनका उद्देश्य केवल लोगों का भरोसा जीतना और उन्हें निवेश के लिए प्रेरित करना था.
कुछ दिनों तक समूह की गतिविधियां देखने के बाद बुजुर्ग निवेशक को भी विश्वास हो गया कि यह एक वैध निवेश मंच है. इसके बाद ठगों ने उन्हें एक निवेश एप्लिकेशन डाउनलोड करने के लिए कहा. ऐप में निवेश की राशि, लाभ और बढ़ते हुए पोर्टफोलियो का आकर्षक प्रदर्शन किया जाता था, जिससे पीड़ित को लगातार यह विश्वास दिलाया जाता रहा कि उनका पैसा सुरक्षित है और तेजी से बढ़ रहा है.
ठगों के झांसे में आकर सेवानिवृत्त सलाहकार ने विभिन्न आईपीओ और शेयर बाजार योजनाओं में निवेश के नाम पर कई किश्तों में धनराशि भेजनी शुरू कर दी. करीब तीन महीने के दौरान उन्होंने कुल 1.21 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए. उन्हें भरोसा था कि यह राशि वैध वित्तीय उत्पादों में निवेश की जा रही है और जल्द ही उन्हें भारी मुनाफा मिलेगा.
मामले का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित ने अपने निवेश और कथित लाभ को निकालने की कोशिश की. शुरुआत में उन्हें विभिन्न तकनीकी कारण बताकर टाल दिया गया. बाद में उनकी रकम वापस नहीं की गई और निवेश संचालित करने वाले लोगों से संपर्क करना भी मुश्किल होता गया. धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि वे एक सुनियोजित साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं.
इसके बाद उन्होंने साइबर अपराध प्रकोष्ठ से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. जांच एजेंसियां अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जानकारी जुटा रही हैं जिनके माध्यम से यह पूरा नेटवर्क संचालित किया गया. साथ ही धनराशि के प्रवाह और लाभार्थियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में फर्जी निवेश समूहों, नकली ट्रेडिंग ऐप और झूठे लाभ के स्क्रीनशॉट के जरिए ठगी के मामलों में तेजी आई है. साइबर अपराधी लोगों को कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर अपने जाल में फंसाते हैं. कई मामलों में वे प्रतिष्ठित वित्तीय संस्थानों के नाम और लोगो का भी दुरुपयोग करते हैं ताकि निवेशकों को शक न हो.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी अनजान व्हाट्सएप ग्रुप, टेलीग्राम चैनल या निवेश ऐप पर भरोसा करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें. किसी भी निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट, नियामक मंजूरी और पंजीकरण की पुष्टि करना बेहद जरूरी है. यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि ऊंचे मुनाफे का लालच किस तरह लोगों की जीवनभर की जमा-पूंजी को खतरे में डाल सकता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-



