देश में मई में 9.68 फीसदी पहुंची महंगाई दर, अप्रैल के मुकाबले बढ़े खाने-पीने की चीजों के दाम

देश में मई में 9.68 फीसदी पहुंची महंगाई दर, अप्रैल के मुकाबले बढ़े खाने-पीने की चीजों के दाम

प्रेषित समय :14:32:28 PM / Mon, Jun 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश में महंगाई के मोर्चे पर आम लोगों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है. हाल ही में जारी आंकड़ों ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में रोजमर्रा की कई चीजें और महंगी हो सकती हैं. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (डबलूपीआई) आधारित महंगाई दर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसका असर जल्द ही खुदरा बाजारों में भी दिखाई दे सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं का बजट और प्रभावित होने की आशंका है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मई 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई. इससे पहले अप्रैल 2026 में यह दर 8.26 प्रतिशत दर्ज की गई थी. यानी केवल एक महीने के भीतर महंगाई में 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि थोक स्तर पर बढऩे वाली महंगाई का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिखाई देता है. ऐसे में आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को खाद्य पदार्थों, परिवहन और अन्य आवश्यक वस्तुओं के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है.

ईंधन और बिजली की कीमतों ने बढ़ाया दबाव

थोक महंगाई में सबसे बड़ा योगदान ईंधन और बिजली क्षेत्र का रहा है. मई महीने में इस श्रेणी की महंगाई दर 30.33 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी. विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा लागत बढऩे का असर लगभग हर क्षेत्र पर पड़ता है. जब बिजली, डीजल और पेट्रोल महंगे होते हैं तो उत्पादन, परिवहन और वितरण की लागत भी बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ता है.

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी

मई के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल देखने को मिला. आंकड़ों के अनुसार, कच्चे तेल से जुड़ी महंगाई दर बढ़कर 61.51 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 56.31 प्रतिशत थी. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ता है.

पश्चिम एशिया संकट बना बड़ी वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति संबंधी बाधाओं ने वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ाया है. इसी कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा. मई के दूसरे पखवाड़े में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी भी इसी वैश्विक दबाव का परिणाम मानी जा रही है.

खाद्य पदार्थ और उद्योग भी हुए प्रभावित

ईंधन की बढ़ती लागत का असर खाद्य वस्तुओं पर भी दिखाई दिया है. खाने-पीने की चीजों में थोक महंगाई दर अप्रैल के 2.43 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.60 प्रतिशत हो गई. वहीं मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई बढ़ी है. फैक्ट्रियों में बनने वाले उत्पादों की महंगाई दर अप्रैल के 6.68 प्रतिशत से बढ़कर मई में 7.48 प्रतिशत तक पहुंच गई. इससे उपभोक्ता वस्तुओं, घरेलू सामान और औद्योगिक उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-