ग्वालियर. इंटरनेट और डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. ग्वालियर में एक रिटायर्ड अकाउंटेंट के साथ हुई साइबर ठगी की घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. महज गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना एक बुजुर्ग व्यक्ति को इतना महंगा पड़ गया कि उनके बैंक खाते से करीब डेढ़ लाख रुपये निकाल लिए गए. हालांकि समय रहते बैंक को संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिल गई, जिससे आगे होने वाले नुकसान को रोका जा सका. फिलहाल पुलिस और साइबर सेल मामले की जांच में जुटी हुई है.
जानकारी के अनुसार सिरोल थाना क्षेत्र स्थित श्रीजी एन्क्लेव निवासी 63 वर्षीय विजय कुमार द्विवेदी शासकीय शिक्षा महाविद्यालय तानसेन रोड से सेवानिवृत्त अकाउंटेंट हैं. कुछ दिनों पहले उन्हें ऑनलाइन बाइक टैक्सी सेवा रैपिडो से जुड़ी एक शिकायत दर्ज करानी थी. इसके लिए उन्होंने इंटरनेट पर रैपिडो का कस्टमर केयर नंबर खोजा. गूगल पर मिले नंबर पर संपर्क करने के बाद उन्हें लगा कि वे कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि से बात कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में वे साइबर ठगों के जाल में फंस चुके थे.
पीड़ित के अनुसार शिकायत दर्ज कराने के कुछ समय बाद उनके पास एक कॉल आया. कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को रैपिडो सेवा से जुड़ा कर्मचारी बताया और शिकायत प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे पांच रुपये का भुगतान करने को कहा. मामूली रकम होने के कारण विजय कुमार को किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और उन्होंने बताए गए निर्देशों का पालन कर लिया. आशंका जताई जा रही है कि इसी दौरान उनके मोबाइल फोन में कोई संदिग्ध एप्लीकेशन या फाइल डाउनलोड करवा दी गई, जिसके जरिए साइबर अपराधियों ने उनके मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच हासिल कर ली.
घटना का खुलासा तब हुआ जब नौ जून की शाम विजय कुमार के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को भारतीय स्टेट बैंक का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके खाते से लगातार पैसे निकाले जा रहे हैं. जब विजय कुमार ने ऐसी किसी ट्रांजेक्शन से इनकार किया तो कॉलर ने उन्हें बताया कि उनका यूपीआई, एटीएम कार्ड और बैंक खाता सुरक्षा कारणों से ब्लॉक कर दिया गया है और उन्हें तत्काल बैंक शाखा में जाकर संपर्क करना चाहिए. इस कॉल के बाद उन्हें कुछ संदेह जरूर हुआ, लेकिन तब तक साइबर ठग अपना काम कर चुके थे.
अगले दिन विजय कुमार एसबीआई की सिटी सेंटर शाखा पहुंचे और अपनी पासबुक अपडेट कराई. पासबुक में दर्ज लेन-देन देखकर उनके होश उड़ गए. बैंक रिकॉर्ड में तीन अलग-अलग ट्रांजेक्शन के माध्यम से उनके खाते से बड़ी रकम निकाली जा चुकी थी. पहली ट्रांजेक्शन में 93 हजार रुपये, दूसरी में 11 हजार रुपये और तीसरी में 39 हजार 919 रुपये खाते से डेबिट किए गए थे. इस तरह कुल एक लाख 45 हजार 919 रुपये की साइबर ठगी सामने आई.
खाते से इतनी बड़ी रकम निकलने की जानकारी मिलते ही विजय कुमार ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई. साथ ही स्थानीय पुलिस को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई. शिकायत मिलने के बाद सिरोल थाना पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस की साइबर सेल भी मामले में सक्रिय हो गई है और उन बैंक खातों तथा मोबाइल नंबरों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनके माध्यम से ठगी की रकम ट्रांसफर की गई.
थाना प्रभारी गोविंद बंगोली ने बताया कि रिटायर्ड अकाउंटेंट के साथ साइबर ठगी की वारदात हुई है. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि शिकायतकर्ता ने इंटरनेट पर उपलब्ध कस्टमर केयर नंबर के माध्यम से संपर्क किया था. संभावना है कि इसी दौरान ठगों ने उन्हें अपने जाल में फंसाया और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाई. मामले में तकनीकी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आरोपियों तक पहुंचने के लिए साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है.
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में फर्जी कस्टमर केयर नंबर के जरिए ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. ठग विभिन्न कंपनियों, बैंक, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन सेवाओं के नाम पर नकली नंबर इंटरनेट पर अपलोड कर देते हैं. जब कोई व्यक्ति समस्या के समाधान के लिए इन नंबरों पर संपर्क करता है तो उसे तकनीकी सहायता या शिकायत निवारण के बहाने मोबाइल में रिमोट एक्सेस एप डाउनलोड करने, लिंक पर क्लिक करने या छोटी रकम का भुगतान करने के लिए कहा जाता है. इसके बाद ठग मोबाइल और बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाकर खाते से रकम निकाल लेते हैं.
विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी सेवा का कस्टमर केयर नंबर केवल कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत मोबाइल एप से ही प्राप्त करें. किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई एप डाउनलोड न करें और न ही स्क्रीन शेयरिंग या रिमोट एक्सेस की अनुमति दें. बैंक, यूपीआई या ओटीपी संबंधी जानकारी किसी के साथ साझा करने से भी बचना चाहिए.
ग्वालियर में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब केवल तकनीकी रूप से कमजोर लोगों को ही नहीं बल्कि शिक्षित और अनुभवी व्यक्तियों को भी अपना निशाना बना रहे हैं. विजय कुमार द्विवेदी जैसे सेवानिवृत्त अकाउंटेंट का साइबर ठगी का शिकार होना इस बात का संकेत है कि ऑनलाइन दुनिया में छोटी सी लापरवाही भी भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है.
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि साइबर ट्रेल के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई जा सकेगी. वहीं प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या ऑनलाइन प्रक्रिया से बचने की अपील की है, ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

