बरगी क्रूज हादसे की जांच में उठा ब्लैक बॉक्स जैसा बड़ा सवाल, आयोग के सामने तकनीकी जांच की मांग

बरगी क्रूज हादसे की जांच में उठा ब्लैक बॉक्स जैसा बड़ा सवाल, आयोग के सामने तकनीकी जांच की मांग

प्रेषित समय :15:13:08 PM / Tue, Jun 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. नर्मदा नदी पर स्थित बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे की जांच अब एक महत्वपूर्ण और नए मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है. 14 लोगों की जान लेने वाले इस दर्दनाक हादसे के कारणों की पड़ताल कर रहे उच्च न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अब दुर्घटना की तकनीकी जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग के समक्ष जबलपुर के सामाजिक कार्यकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने अपने अधिवक्ता पंकज दुबे के माध्यम से विस्तृत आवेदन और बयान प्रस्तुत कर हादसे की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है.

आयोग के समक्ष प्रस्तुत आवेदन में सबसे अहम सवाल यह उठाया गया है कि जिस क्रूज हादसे में 14 लोगों की जान चली गई, उसकी वास्तविक तकनीकी स्थिति की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच अब तक क्यों नहीं कराई गई. आवेदन में कहा गया है कि किसी भी बड़े हादसे के बाद केवल प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकालना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि दुर्घटना में शामिल वाहन या यान की तकनीकी स्थिति की गहन जांच भी उतनी ही आवश्यक होती है. याचिकाकर्ता का कहना है कि बरगी क्रूज हादसे में यह पहलू अब तक जांच के केंद्र में दिखाई नहीं देता.

आवेदन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जाने वाली जांच प्रक्रियाओं का भी उल्लेख किया गया है. इसमें कहा गया है कि विमान दुर्घटनाओं, रेल हादसों और समुद्री दुर्घटनाओं के बाद संबंधित यान या वाहन की विस्तृत तकनीकी जांच कराई जाती है. दुर्घटना के समय मशीनरी की स्थिति, यांत्रिक खामियां, सुरक्षा उपकरणों की कार्यक्षमता और संचालन से जुड़ी परिस्थितियों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाता है. इसी प्रक्रिया के आधार पर दुर्घटनाओं के वास्तविक कारण सामने आते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक सुधार किए जाते हैं. लेकिन बरगी क्रूज हादसे के मामले में अब तक ऐसी कोई स्वतंत्र तकनीकी रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, जिससे हादसे के वास्तविक कारणों को समझा जा सके.

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि हादसे के बाद संबंधित क्रूज को खोल दिया गया और उसका इंजन भी अलग कर दिया गया. ऐसे में दुर्घटना से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की गई है. आवेदन में कहा गया है कि यदि हादसे के वास्तविक कारणों और संभावित जिम्मेदारियों का निर्धारण करना है तो क्रूज के शेष बचे हिस्सों, इंजन, सुरक्षा उपकरणों और घटनास्थल का विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण कराया जाना चाहिए. इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसा किसी यांत्रिक खराबी, संचालन संबंधी त्रुटि, रखरखाव में लापरवाही या अन्य किसी कारण से हुआ था.

आयोग के समक्ष यह भी तर्क रखा गया कि हादसे को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से भिन्न-भिन्न दावे किए जा रहे हैं. कुछ लोग इसे तकनीकी खराबी का परिणाम बता रहे हैं तो कुछ संचालन संबंधी लापरवाही की ओर इशारा कर रहे हैं. वहीं कुछ अन्य कारणों की भी चर्चा हो रही है. ऐसी स्थिति में केवल मौखिक बयानों के आधार पर निष्कर्ष निकालना कठिन हो सकता है. इसलिए वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों को जांच का आधार बनाया जाना चाहिए ताकि तथ्यों पर आधारित निष्पक्ष निष्कर्ष सामने आ सके.

याचिकाकर्ता की ओर से आयोग को सुझाव दिया गया है कि वह किसी स्वतंत्र और विशेषज्ञ एजेंसी की सहायता ले. आवेदन में समुद्री और जलयान तकनीक से जुड़ी विशेषज्ञ संस्थाओं का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि आयोग अपने विवेक से किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय तकनीकी संस्था से जांच रिपोर्ट प्राप्त कर सकता है. इससे दुर्घटना के कारणों का अधिक सटीक और वैज्ञानिक विश्लेषण संभव होगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि जांच किसी पूर्वाग्रह या अनुमान के बजाय प्रमाणों पर आधारित हो.

मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता पंकज दुबे ने आयोग के समक्ष कहा कि भले ही क्रूज में विमानों की तरह कोई ब्लैक बॉक्स मौजूद नहीं होता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि दुर्घटना की तकनीकी पड़ताल संभव नहीं है. उनका कहना है कि विशेषज्ञों की मदद से इंजन, यांत्रिक संरचना, सुरक्षा उपकरणों, नियंत्रण प्रणाली और संचालन तंत्र की जांच कर दुर्घटना के पीछे छिपे वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी विश्लेषण कई ऐसे तथ्य सामने ला सकता है जो सामान्य जांच में दिखाई नहीं देते.

उधर, न्यायिक जांच आयोग भी हादसे के प्रत्येक पहलू की गंभीरता से पड़ताल कर रहा है. आयोग अब तक कई अधिकारियों, प्रत्यक्षदर्शियों और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर चुका है. हालांकि तकनीकी जांच की मांग सामने आने के बाद यह संभावना भी बढ़ गई है कि आयोग दुर्घटना के वैज्ञानिक पहलुओं की पड़ताल के लिए विशेषज्ञों की राय लेने पर विचार कर सकता है. इससे जांच का दायरा और व्यापक हो सकता है.

बरगी बांध क्रूज हादसा प्रदेश के सबसे दर्दनाक जल दुर्घटना मामलों में शामिल है. हादसे में 14 लोगों की मौत के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं. ऐसे में तकनीकी जांच की मांग ने मामले को नया आयाम दे दिया है. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि न्यायिक जांच आयोग इस सुझाव पर क्या रुख अपनाता है और क्या दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए किसी विशेषज्ञ एजेंसी की मदद ली जाती है. फिलहाल आयोग के समक्ष उठे इस ‘ब्लैक बॉक्स’ जैसे सवाल ने पूरे मामले को एक नई दिशा दे दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि वैज्ञानिक जांच के जरिए हादसे के वास्तविक कारणों तक पहुंचने में मदद मिलेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-