ग्वालियर. यूरोप यात्रा का सपना टूटने के बाद अपनी जमा राशि वापस पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे ग्वालियर के एक उपभोक्ता को आखिरकार राहत मिल गई है. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने ऑनलाइन ट्रैवल कंपनी मेक माय ट्रिप को उपभोक्ता को छह लाख रुपये वापस करने, 20 हजार रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में भुगतान नहीं करने पर कंपनी को छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.
मामला ग्वालियर निवासी विकास शर्मा द्वारा दायर परिवाद से जुड़ा है. जानकारी के अनुसार विकास शर्मा ने जनवरी 2025 में यूरोप यात्रा के लिए मेक माय ट्रिप के माध्यम से लगभग 10.27 लाख रुपये का टूर पैकेज बुक कराया था. बुकिंग के बाद कंपनी ने यात्रा कार्यक्रम में बदलाव की जानकारी देते हुए वैकल्पिक तिथियां प्रस्तावित की थीं. इसके बाद यात्रा निर्धारित योजना के अनुसार पूरी नहीं हो सकी और अंततः टूर रद्द हो गया.
परिवादी का आरोप था कि यात्रा निरस्त होने के बाद उन्होंने कंपनी से जमा राशि वापस करने की मांग की, लेकिन कंपनी ने पूरी रकम लौटाने के बजाय केवल 3.57 लाख रुपये का गिफ्ट वाउचर देने का प्रस्ताव रखा. विकास शर्मा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और राशि की वापसी की मांग पर अड़े रहे. उनका कहना था कि यात्रा न होने की स्थिति में उन्हें उनकी जमा राशि वापस मिलनी चाहिए.
वहीं कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि यात्रा की तैयारियों के लिए एयर टिकट, होटल बुकिंग और अन्य व्यवस्थाओं पर पहले ही खर्च किया जा चुका था. कंपनी ने यह भी कहा कि वीजा स्वीकृत नहीं होने के कारण यात्रा पूरी नहीं हो सकी, इसलिए पूरी राशि लौटाना संभव नहीं है. कंपनी ने अपने बचाव में दावा किया कि यात्रा से संबंधित विभिन्न सेवाओं पर व्यय हो चुका था.
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा तथा सदस्य रेवती रमण मिश्रा की पीठ ने की. सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी यह स्पष्ट करने में असफल रही कि उपभोक्ता द्वारा जमा की गई कुल राशि में से कितनी रकम वास्तव में किन मदों में खर्च की गई. आयोग ने माना कि उपभोक्ता को नकद राशि लौटाने के बजाय गिफ्ट वाउचर देने की पेशकश करना और भुगतान का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत न कर पाना सेवा में कमी की श्रेणी में आता है.
हालांकि आयोग ने यह भी माना कि विदेश यात्रा की प्रक्रिया में कुछ प्रारंभिक खर्च किए गए होंगे और वीजा स्वीकृत नहीं होने के कारण परिस्थितियां पूरी तरह कंपनी के नियंत्रण में नहीं थीं. इसी आधार पर आयोग ने पूरे 10.27 लाख रुपये लौटाने का आदेश देने के बजाय परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया और छह लाख रुपये की वापसी का आदेश पारित किया.
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उपभोक्ता के साथ हुई असुविधा और मानसिक परेशानी को देखते हुए उसे 20 हजार रुपये क्षतिपूर्ति तथा दो हजार रुपये वाद व्यय भी दिया जाए. उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि सेवा प्रदाता कंपनियों को उपभोक्ताओं के धन के उपयोग और वापसी के संबंध में पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है. निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं होने की स्थिति में कंपनी को अतिरिक्त ब्याज का भी भुगतान करना होगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

