एमपी हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी की डिजिटल मूल्याकंन प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी माना

एमपी हाईकोर्ट ने मेडिकल यूनिवर्सिटी की डिजिटल मूल्याकंन प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी माना

प्रेषित समय :16:36:07 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाई कोर्ट ने मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी की कॉपियों को जांचने वाली डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सही माना है. अदालत ने दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग को लेकर कोर्ट पहुंचे दो छात्र-छात्राओं की याचिकाओं को खारिज कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने दोनों ही याचिकाकर्ताओं पर 5-5 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया है.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने अपने आदेश में साफ किया कि दोनों विद्यार्थियों की कॉपियों को बिल्कुल सही तरीके से जांचा गया था, इसलिए उनके नंबरों में बढ़ोतरी होने की कोई गुंजाइश नहीं है. हालांकि अदालत ने इस डिजिटल व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है. बेंच ने कहा है कि ऑनलाइन कॉपियां जांचते समय जांचकर्ताओं को टचस्क्रीन डिवाइस और डिजिटल पेन उपलब्ध कराए जाने चाहिए. इससे कॉपियां चेक करने वाले शिक्षक स्क्रीन पर स्पष्ट रूप से यह चिन्हित कर सकेंगे कि छात्र का कौन सा उत्तर सही है, कौन सा गलत है और किस सवाल पर कितने नंबर दिए गए हैं.यह मामला छिंदवाड़ा के छात्र अमरजीत भारद्वाज और जबलपुर की मेडिकल छात्रा प्रेमलता तिवारी की तरफ से दायर याचिका से जुड़ा था.

ये दोनों याचिकाकर्ता क्रमश: बीएचएमएस और एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थी हैं. इन छात्रों ने अदालत के सामने यह आरोप लगाया था कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में कुछ जवाबों के सामने सही का निशान तो लगाया गया था, लेकिन उसके बदले में कोई अंक नहीं दिए गए. मामले की पूरी सच्चाई और निष्पक्षता जानने के लिए हाई कोर्ट ने विवादित उत्तर पुस्तिकाओं की जांच स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक टीम से दोबारा करवाई. इस स्वतंत्र जांच के बाद डबल बेंच को पता चला कि एमएससी नर्सिंग की छात्रा को जो नंबर पहले मिले थे, उनमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. अदालत ने अपने फैसले में माना कि वर्तमान में डिजिटल फेयर इवैल्यूएशन सिस्टम के जरिए होने वाली जांच बिल्कुल सही है. फिर भी इस तकनीकी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से कोर्ट ने कुछ जरूरी सुझाव देते हुए दोनों याचिकाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-