एक युद्ध थमा नहीं था कि मॉस्को में गूंजे धमाके यूक्रेन ने तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना

एक युद्ध थमा नहीं था कि मॉस्को में गूंजे धमाके यूक्रेन ने तेल रिफाइनरी को बनाया निशाना

प्रेषित समय :19:55:47 PM / Thu, Jun 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. दुनिया अभी पश्चिम एशिया में भड़के संघर्ष और युद्ध की आशंकाओं से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने एक बार फिर खतरनाक मोड़ ले लिया है. गुरुवार को यूक्रेन ने रूस की राजधानी मॉस्को के भीतर स्थित एक प्रमुख तेल रिफाइनरी पर बड़ा ड्रोन हमला कर दिया. हमले के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. विशाल तेल टैंकों से उठती आग की लपटें और आसमान में फैलता काला धुआं कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया. इसे यूक्रेन की ओर से रूस के भीतर किया गया हाल के वर्षों का सबसे बड़ा और साहसिक हमला माना जा रहा है.

मॉस्को स्थित इस रणनीतिक तेल रिफाइनरी पर हमला ऐसे समय हुआ है जब रूस लगातार यूक्रेन के शहरों पर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे पूरी तरह न्यायसंगत बताया. उन्होंने कहा कि रूस की युद्ध मशीन को ईंधन और संसाधन उपलब्ध कराने वाले ठिकानों को निशाना बनाना यूक्रेन का अधिकार है. जेलेंस्की के अनुसार यह कार्रवाई हाल ही में कीव और अन्य शहरों पर हुए रूसी हमलों का जवाब है.

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेल भंडारण टैंकों में जोरदार विस्फोट दिखाई दिए. एक वीडियो में विस्फोट की ताकत से टैंक का ऊपरी हिस्सा हवा में उड़ता नजर आया, जबकि दूसरे वीडियो में पूरी रिफाइनरी परिसर को आग की लपटों में घिरा देखा गया. कई स्थानों पर दमकल की टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं.

रूसी अधिकारियों के अनुसार यूक्रेन ने एक ही रात में सैकड़ों ड्रोन रूस की ओर भेजे. रूसी रक्षा मंत्रालय का दावा है कि 555 से अधिक ड्रोन मार गिराए गए, जिनमें करीब 200 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे. इसके बावजूद कुछ ड्रोन सुरक्षा घेरा तोड़कर अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रहे और तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाया.

हमले के बाद मॉस्को में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह हाई अलर्ट पर पहुंच गई. राजधानी के चारों प्रमुख हवाई अड्डों—शेरमेत्येवो, डोमोदेदोवो, व्नुकोवो और झूकोवस्की—पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया. कई विमानों को वैकल्पिक हवाई अड्डों की ओर मोड़ा गया. सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे शहर में अतिरिक्त बल तैनात कर दिया.

यूक्रेन का यह हमला रूस के लिए इसलिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय हुआ जब राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कजान में आसियान देशों के नेताओं की मेजबानी करने की तैयारी में थे. अंतरराष्ट्रीय मंच पर रूस अपनी कूटनीतिक सक्रियता दिखाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन राजधानी के निकट हुए इस हमले ने उसकी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

यूक्रेन का कहना है कि यह जवाबी कार्रवाई उस रूसी हमले के बाद की गई जिसमें कीव सहित कई शहरों को निशाना बनाया गया था. उन हमलों में कई लोगों की मौत हुई थी और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल ऐतिहासिक धार्मिक परिसर को भी नुकसान पहुंचा था. यूक्रेनी अधिकारियों ने इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर हमला बताया था.

दूसरी ओर रूस ने यूक्रेन पर ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. रूसी अधिकारियों का कहना है कि ऐसे हमले आम नागरिकों और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं. रूस ने संकेत दिए हैं कि इस हमले का जवाब और अधिक कड़े सैन्य कदमों से दिया जा सकता है.

युद्ध विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन अब इस संघर्ष का सबसे प्रभावी हथियार बन चुके हैं. दोनों देश हजारों किलोमीटर दूर स्थित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हो गए हैं. तेल रिफाइनरियां, ऊर्जा केंद्र, हवाई अड्डे और सैन्य अड्डे अब युद्ध के प्रमुख लक्ष्य बन चुके हैं.

इस बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भीषण हमले के बावजूद जेलेंस्की ने एक बार फिर बातचीत और कूटनीति की अपील की है. उन्होंने कहा कि युद्ध को समाप्त करने का समय आ गया है और रूस को शांति प्रक्रिया की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए. हालांकि जमीनी हालात फिलहाल इसके उलट दिखाई दे रहे हैं. मॉस्को की तेल रिफाइनरी पर हुआ ताजा हमला साफ संकेत देता है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष अब और अधिक व्यापक तथा विनाशकारी चरण में प्रवेश कर चुका है. दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस हमले के बाद रूस की अगली प्रतिक्रिया क्या होगी और क्या यह टकराव एक नए बड़े सैन्य अभियान का रूप लेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-