सरकारी फ्लैट का झांसा देकर 11 लाख की ठगी, कोर्ट के आदेश पर तीन आरोपियों पर एफआईआर

सरकारी फ्लैट का झांसा देकर 11 लाख की ठगी, कोर्ट के आदेश पर तीन आरोपियों पर एफआईआर

प्रेषित समय :15:03:57 PM / Fri, Jun 19th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकारी मल्टी में फ्लैट दिलाने का सपना दिखाकर 11 लाख रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। लंबे समय तक पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर पीड़ित को अदालत की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बहोड़ापुर थाना पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मामला बहोड़ापुर क्षेत्र के सागरताल रोड स्थित सरकारी मल्टी में फ्लैट दिलाने के नाम पर हुई कथित ठगी से जुड़ा है। आरोप है कि आरोपियों ने प्रशासन में मजबूत पकड़ और पटवारी से संबंध होने का दावा कर पीड़ित का विश्वास जीता और उससे लाखों रुपये ऐंठ लिए। न तो फ्लैट मिला और न ही रकम वापस की गई।

जानकारी के अनुसार उपनगर ग्वालियर स्थित बाबा कपूर दरगाह के पास रहने वाले मनोज पुत्र छोटेलाल मंगल के संपर्क में घासमंडी निवासी अजय श्रीवास्तव आया था। अजय ने मनोज को भरोसा दिलाया कि उसका भाई आनंद उर्फ अन्नी श्रीवास्तव पटवारी है और प्रशासनिक अधिकारियों में उसकी अच्छी पहचान है। इसी प्रभाव का इस्तेमाल कर वह प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सरकारी मल्टी में फ्लैट आवंटित करवा सकता है।

आरोपियों ने मनोज को दो फ्लैट दिलाने का प्रस्ताव दिया। एक फ्लैट की कीमत 5 लाख 50 हजार रुपये बताई गई। इस तरह दो फ्लैटों के नाम पर कुल 11 लाख रुपये लिए गए। पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए आरोपियों ने 25-25 हजार रुपये की दो रसीदें भी दीं, जिन्हें बाद में फर्जी बताया गया।

पीड़ित के अनुसार रकम देने के बाद वह लंबे समय तक फ्लैट मिलने का इंतजार करता रहा, लेकिन हर बार आरोपी एक-दो महीने का समय मांगकर टालते रहे। जब भी फ्लैट के संबंध में पूछताछ की जाती, आरोपी आश्वासन देते कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही आवंटन हो जाएगा। इस दौरान कई बार आरोपी ने कथित रूप से आनंद श्रीवास्तव से फोन पर बात भी कराई और उसे पटवारी बताते हुए भरोसा दिलाया कि काम जल्द पूरा हो जाएगा।

काफी समय बीत जाने के बाद भी जब फ्लैट नहीं मिला तो मनोज ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू कर दी। आरोप है कि इसके बाद भी न तो पैसे लौटाए गए और न ही फ्लैट उपलब्ध कराया गया। खुद को ठगा महसूस करने पर पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की, लेकिन मामला दर्ज नहीं किया गया।

पीड़ित का आरोप है कि थाने के चक्कर लगाने के बावजूद पुलिस लगातार कार्रवाई को टालती रही। इसके बाद उसने न्यायालय में परिवाद दायर किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया।

कोर्ट के आदेश के बाद बहोड़ापुर थाना पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों की भूमिका, पैसों के लेन-देन और कथित फर्जी दस्तावेजों की जांच कर रही है।

प्राथमिक जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या आरोपियों ने इसी तरह अन्य लोगों को भी सरकारी योजनाओं और फ्लैट आवंटन का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों को उजागर किया है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी योजना या आवास आवंटन से संबंधित प्रक्रिया में केवल अधिकृत माध्यमों पर ही भरोसा करें और किसी व्यक्ति के प्रभाव या संपर्क के दावों के आधार पर धनराशि का भुगतान करने से बचें।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-