भोपाल/इंदौर. मध्यप्रदेश को विकास की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिली है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन सड़क परियोजना सहित हजारों करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया. लगभग 2935 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 48.10 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड सड़क परियोजना को प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा विकास कार्यों में शामिल माना जा रहा है. इस परियोजना के पूरा होने के बाद इंदौर और उज्जैन के बीच आवागमन तेज, सुगम और सुरक्षित होगा, जिससे व्यापार, उद्योग, पर्यटन और धार्मिक गतिविधियों को नया आयाम मिलेगा.
राज्य सरकार के अनुसार इस सड़क परियोजना का सीधा लाभ इंदौर जिले के लगभग 20 गांवों, उज्जैन जिले के 8 गांवों तथा आसपास के 40 से 50 गांवों को मिलेगा. वर्तमान में दोनों शहरों के बीच यात्रा में लगने वाला समय काफी अधिक हो जाता है, विशेषकर धार्मिक आयोजनों और त्योहारों के दौरान यातायात का दबाव बढ़ने पर स्थिति और जटिल हो जाती है. नई ग्रीनफील्ड सड़क बनने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आएगी और लोगों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी.
इसी अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 2548 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाले आवासीय परियोजनाओं का भूमि-पूजन भी किया. इन परियोजनाओं से 42 हजार से अधिक हितग्राहियों को लाभ मिलने की संभावना है. इसके अलावा 992 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित लगभग 38 हजार आवासों का गृह प्रवेश कार्यक्रम भी आयोजित किया गया. सरकार ने इसे प्रदेश के शहरी विकास और गरीब कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
कार्यक्रम के दौरान 446 करोड़ रुपये की लागत वाली 116 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण तथा 310.82 करोड़ रुपये की लागत की 37 नई परियोजनाओं का भूमि-पूजन भी किया गया. इस प्रकार इंदौर, उज्जैन और सांवेर क्षेत्र को कुल मिलाकर 5657 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिली. राज्य सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर और उज्जैन केवल दो शहर नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के महत्वपूर्ण केंद्र हैं. उन्होंने कहा कि नई ग्रीनफील्ड सड़क पितृश्वर महादेव से बाबा महाकाल तक बेहतर संपर्क का माध्यम बनेगी. साथ ही यह परियोजना पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को दिल्ली-मुंबई आर्थिक कॉरिडोर से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. इससे उद्योगों को परिवहन सुविधा मिलेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा.
मुख्यमंत्री ने बताया कि किसानों की मांग को ध्यान में रखते हुए सड़क परियोजना की डिजाइन में भी आवश्यक बदलाव किए गए हैं. सड़क की ऊंचाई कम रखने का निर्णय लिया गया है ताकि किसानों और ग्रामीणों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि विकास और जनहित के बीच संतुलन बनाना सरकार की प्राथमिकता है.
डॉ. यादव ने सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उज्जैन में आयोजित होने वाला सिंहस्थ महापर्व विश्व के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है. ऐसे में सड़क, परिवहन और अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास अत्यंत आवश्यक है. नई सड़क परियोजना सिंहस्थ के दौरान लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाएगी और यातायात दबाव को कम करने में सहायक होगी.
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर-उज्जैन मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र भविष्य में मध्यप्रदेश की विकास धुरी के रूप में उभरेगा. उन्होंने बताया कि लगभग 16 हजार वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में छह रेलवे जंक्शन, दो हवाई अड्डे, चार हवाई पट्टियां और दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग शामिल होंगे. सड़क संपर्क बेहतर होने से उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और सेवा क्षेत्र को व्यापक लाभ मिलेगा.
उन्होंने कहा कि फतेहाबाद और चंद्रावती जैसे क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से व्यापार और आवागमन के महत्वपूर्ण केंद्र रहे हैं. नई सड़क परियोजना इन क्षेत्रों को फिर से आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाने में सहायक होगी. साथ ही फतेहाबाद को रेलवे डबल ट्रैक जैसी सुविधाएं मिलने से क्षेत्रीय विकास को और मजबूती मिलेगी.
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने आधारभूत संरचना, आवास, परिवहन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. मध्यप्रदेश भी इस विकास यात्रा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और प्रदेश को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन सड़क केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय आर्थिक परिवर्तन का आधार बन सकती है. बेहतर सड़क संपर्क से माल परिवहन की लागत घटेगी, निवेश बढ़ेगा, पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और धार्मिक यात्राओं को भी नई सुविधा मिलेगी. आने वाले वर्षों में यह परियोजना मालवा क्षेत्र के विकास की नई पहचान बन सकती है.
सरकार को उम्मीद है कि परियोजना निर्धारित समयसीमा में पूरी होने के बाद इंदौर और उज्जैन के बीच संपर्क का नया अध्याय शुरू होगा, जिससे दोनों शहरों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को भी दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

