भारतीय रसोई में जब भी हल्के, पौष्टिक और सुकून देने वाले भोजन की बात होती है तो खिचड़ी का नाम सबसे पहले लिया जाता है. यदि इस पारंपरिक व्यंजन में लौकी और हरी मूंग दाल का मेल हो जाए, तो इसका स्वाद और पोषण दोनों कई गुना बढ़ जाते हैं. लौकी-मूंग दाल खिचड़ी एक ऐसा व्यंजन है जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पाचन के लिए भी बेहद लाभकारी माना जाता है. व्यस्त दिन के बाद केवल कुछ मिनटों की तैयारी में बनने वाली यह खिचड़ी बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए उपयुक्त है.
लौकी में भरपूर मात्रा में पानी, रेशा, विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर को हाइड्रेट रखने, पाचन तंत्र को बेहतर बनाने, वजन नियंत्रित करने और रक्तचाप को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है. वहीं हरी मूंग दाल प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है. इसका सेवन लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करता है और यह आसानी से पच भी जाती है. यही कारण है कि लौकी और मूंग दाल का यह संयोजन स्वाद और स्वास्थ्य दोनों के लिहाज से आदर्श माना जाता है.
आवश्यक सामग्री
1 कप चावल (धोकर भिगोए हुए)
½ कप साबुत हरी मूंग दाल
1 कप लौकी (छोटे टुकड़ों में कटी हुई)
1 टमाटर (बारीक कटा हुआ)
1 प्याज (बारीक कटा हुआ)
1 इंच अदरक (कद्दूकस किया हुआ)
2 से 3 साबुत काली मिर्च
2 से 3 लौंग
1 चम्मच हल्दी पाउडर
1 से 2 हरी मिर्च (बारीक कटी हुई)
1 चम्मच धनिया पाउडर
½ चम्मच लाल मिर्च पाउडर
स्वादानुसार नमक
1 बड़ा चम्मच तेल
2 कप पानी
½ चम्मच जीरा
बनाने की विधि
पहला चरण
सबसे पहले चावल और हरी मूंग दाल को अच्छी तरह धो लें. जब तक पानी साफ दिखाई न दे, तब तक धोते रहें. इसके बाद चावल को 10 मिनट के लिए भिगोकर रख दें.
दूसरा चरण
लौकी को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. प्याज, टमाटर और हरी मिर्च को भी बारीक काट लें तथा अदरक को कद्दूकस कर लें.
तीसरा चरण
एक प्रेशर कुकर में तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर उसमें जीरा, काली मिर्च और लौंग डालें. कुछ सेकंड तक भूनें ताकि मसालों की सुगंध निकल आए.
चौथा चरण
अब इसमें कटी हुई हरी मिर्च और प्याज डालकर मध्यम आंच पर भूनें. प्याज हल्का पारदर्शी होने लगे तो इसमें टमाटर और कद्दूकस किया हुआ अदरक डाल दें.
पांचवां चरण
अब नमक, हल्दी, धनिया पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालकर अच्छी तरह मिलाएं. टमाटर के नरम होने तक मसाले को पकाएं.
छठा चरण
मसाला तैयार होने पर इसमें साबुत हरी मूंग दाल, लौकी के टुकड़े और भीगे हुए चावल डाल दें. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाएं.
सातवां चरण
अब कुकर में 2 कप पानी डालें और एक बार फिर मिश्रण को चलाएं ताकि सभी सामग्री समान रूप से मिल जाए.
आठवां चरण
कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 2 से 3 सीटी आने तक पकाएं.
नौवां चरण
गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर स्वाभाविक रूप से निकलने दें. इसके बाद ढक्कन खोलें.
दसवां चरण
खिचड़ी को हल्के हाथ से चलाएं. यदि आपको अधिक नरम और पतली खिचड़ी पसंद है तो थोड़ा गर्म पानी मिलाकर दो मिनट तक और पकाया जा सकता है.
ग्यारहवां चरण
ताजी हरी धनिया से सजाकर गर्मागर्म परोसें. दही, पापड़, अचार या सलाद के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
पौष्टिक बनाने के पांच आसान उपाय
तेल की मात्रा कम रखें और केवल 1 से 2 चम्मच तेल का उपयोग करें.
गाजर, मटर, पालक या बीन्स जैसी अतिरिक्त सब्जियां मिलाएं.
साबुत हरी मूंग दाल का उपयोग करें, इससे फाइबर की मात्रा बढ़ती है.
नमक सीमित रखें और स्वाद बढ़ाने के लिए अदरक तथा जीरे का उपयोग करें.
खिचड़ी को ताजे दही के साथ परोसें, इससे प्रोटीन और कैल्शियम की मात्रा बढ़ती है.
परोसने का सुझाव
लौकी-मूंग दाल खिचड़ी दोपहर के भोजन, हल्के रात्रिभोज, रोगियों के आहार या पाचन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है. इसकी सादगी, पौष्टिकता और स्वाद इसे भारतीय रसोई के सबसे लोकप्रिय आरामदायक भोजन में शामिल करते हैं.




