नई दिल्ली. कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते प्रभाव और लगातार सामने आ रही छंटनी की खबरों के बीच कॉर्पोरेट जगत में एक नया ट्रेंड तेजी से उभर रहा है. इसे ‘डूमजॉबिंग’ कहा जा रहा है. यह ऐसा व्यवहार है जिसमें पेशेवर कर्मचारी वास्तव में नौकरी बदलने की योजना न होने के बावजूद लगातार नौकरी पोर्टलों पर सक्रिय रहते हैं और बड़ी संख्या में विभिन्न पदों के लिए आवेदन करते रहते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति महत्वाकांक्षा से अधिक असुरक्षा और भविष्य को लेकर बढ़ती चिंता का परिणाम है.
वर्तमान समय में सोशल मीडिया और पेशेवर नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर हर दिन नई नियुक्तियों, प्रमोशन, छंटनी और एआई के कारण नौकरियों पर पड़ने वाले प्रभाव से जुड़ी खबरें सामने आती रहती हैं. ऐसे माहौल में कई कर्मचारी लगातार यह परखने की कोशिश करते रहते हैं कि नौकरी बाजार में उनकी स्थिति कितनी मजबूत है. यही चिंता उन्हें बार-बार नौकरी पोर्टलों पर ले जाती है, जहां वे बिना स्पष्ट रणनीति के अनेक पदों पर आवेदन करने लगते हैं.
कैरियर विशेषज्ञों के अनुसार डूमजॉबिंग को करियर जगत का ‘डूमस्क्रॉलिंग’ भी कहा जा सकता है. जिस प्रकार लोग सोशल मीडिया पर लगातार नकारात्मक खबरें देखते रहते हैं, उसी प्रकार कई पेशेवर कर्मचारी नौकरी पोर्टलों पर घंटों बिताकर अवसरों की तलाश करते रहते हैं. हालांकि इनमें से अधिकांश आवेदन किसी ठोस करियर योजना के तहत नहीं किए जाते.
विशेषज्ञों का कहना है कि कई कर्मचारी यह महसूस करते हैं कि यदि वे लगातार नए अवसरों की तलाश नहीं करेंगे तो कहीं पीछे न रह जाएं. एआई तकनीक के तेजी से विस्तार, बदलते उद्योगों और समय-समय पर होने वाली छंटनियों ने इस मानसिकता को और मजबूत किया है. यही कारण है कि अब केवल नए नौकरी तलाशने वाले ही नहीं, बल्कि चार-पांच वर्ष या उससे अधिक अनुभव रखने वाले पेशेवर भी लगातार नए अवसरों की निगरानी करते दिखाई दे रहे हैं.
मानव संसाधन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश मामलों में यह व्यवहार वास्तविक नौकरी परिवर्तन की इच्छा से अधिक आत्मविश्वास प्राप्त करने का प्रयास होता है. कई कर्मचारी यह जानना चाहते हैं कि उनकी योग्यता और अनुभव की बाजार में कितनी मांग है. वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यदि भविष्य में कोई चुनौती आती है तो उनके पास विकल्प मौजूद रहेंगे.
हालांकि भर्ती विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रवृत्ति का एक नकारात्मक पक्ष भी है. बड़ी संख्या में ऐसे आवेदन प्राप्त हो रहे हैं जो पद की आवश्यकताओं से मेल नहीं खाते. कई उम्मीदवार बिना नौकरी विवरण को ठीक से समझे आवेदन कर देते हैं. इससे न केवल भर्ती प्रक्रिया प्रभावित होती है, बल्कि उम्मीदवारों की पेशेवर छवि पर भी असर पड़ सकता है.
भर्ती विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में दस सोच-समझकर किए गए आवेदन सौ सामान्य और बिना तैयारी वाले आवेदनों से अधिक प्रभावी साबित हो सकते हैं. कंपनियां केवल अनुभव नहीं, बल्कि उस पद के लिए उपयुक्तता भी देखती हैं. ऐसे में हर पद के लिए एक ही बायोडाटा भेजना अक्सर अपेक्षित परिणाम नहीं देता.
एआई के दौर में यह चुनौती और बढ़ गई है. अब तकनीक की मदद से कुछ ही मिनटों में दर्जनों बायोडाटा और आवेदन पत्र तैयार किए जा सकते हैं. ऐसे में भर्तीकर्ता आसानी से पहचान लेते हैं कि कौन-सा आवेदन गंभीरता से तैयार किया गया है और कौन-सा केवल औपचारिकता के तौर पर भेजा गया है. इसलिए व्यक्तिगत रूप से तैयार किए गए और पद के अनुरूप संशोधित आवेदन अधिक प्रभावशाली माने जाते हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई को खतरे के रूप में देखने के बजाय कर्मचारियों को अपनी क्षमताओं के विकास पर ध्यान देना चाहिए. तकनीकी साक्षरता, नई डिजिटल क्षमताएं, उद्योग विशेष का ज्ञान और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण होगी. कंपनियां ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दे रही हैं जो तकनीक के साथ काम करना जानते हैं और लगातार सीखने के लिए तैयार रहते हैं.
हालिया रोजगार सर्वेक्षणों में भी यह संकेत मिला है कि भारत में नियुक्तियों की संभावनाएं मजबूत बनी हुई हैं. अनेक क्षेत्रों में नई भर्तियों की योजना बनाई जा रही है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों को घबराहट में आवेदन करने के बजाय अपने कौशल विकास, पेशेवर नेटवर्क और दीर्घकालिक करियर योजना पर अधिक ध्यान देना चाहिए.
कैरियर सलाहकारों का कहना है कि वास्तविक प्रगति केवल व्यस्त दिखने से नहीं होती. लगातार आवेदन करना उत्पादक गतिविधि जैसा महसूस हो सकता है, लेकिन इससे हमेशा बेहतर अवसर नहीं मिलते. इसके बजाय नई तकनीकों को सीखना, पेशेवर पहचान मजबूत करना, उद्योग की मांग के अनुरूप कौशल विकसित करना और अनुभव को समृद्ध बनाना अधिक लाभदायक साबित होता है.
विशेषज्ञों का निष्कर्ष है कि नौकरी बाजार में सफलता का आधार केवल अवसर तलाशना नहीं, बल्कि स्वयं को अवसरों के योग्य बनाए रखना है. एआई और बदलती कार्य संस्कृति के इस दौर में वही पेशेवर सबसे अधिक सुरक्षित और सफल होंगे जो लगातार सीखने, स्वयं को विकसित करने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता रखते हैं, न कि वे जो केवल भय के कारण हर उपलब्ध नौकरी के लिए आवेदन करते रहते हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

