जबलपुर. राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-30 पर जबलपुर और कटनी को जोड़ने वाला हिरन नदी का नया पुल इन दिनों गंभीर खतरे की जद में है. घाट सिमरिया के पास स्थित इस महत्वपूर्ण पुल की सड़क कई स्थानों पर धंस गई है और उसमें गहरी दरारें उभर आई हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि यदि समय रहते आवश्यक मरम्मत और सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो यहां किसी भी समय बड़ा सड़क हादसा हो सकता है. स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों ने पुल की स्थिति को लेकर चिंता जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
जानकारी के अनुसार पुल के एप्रोच मार्ग और मुख्य सड़क पर तीन से चार स्थानों पर गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं. कई जगह सड़क करीब तीन से चार इंच तक नीचे धंस चुकी है. लगातार भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह स्थिति और अधिक गंभीर होती जा रही है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सड़क का धंसाव इसी तरह बढ़ता रहा तो किसी भी समय कोई भारी वाहन संतुलन खोकर गहरे खड्ड में गिर सकता है, जिससे बड़ी जनहानि होने की आशंका है.
क्षेत्रीय लोगों के अनुसार सड़क में आई दरारों को पहले भी छिपाने का प्रयास किया गया था. बताया जा रहा है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा दरारों पर डामर की मोटी परत बिछाकर अस्थायी मरम्मत की गई थी, लेकिन भीषण गर्मी और लगातार यातायात के दबाव के कारण वह परत टिक नहीं सकी. डामर पिघलने और उखड़ने के बाद सड़क की वास्तविक स्थिति फिर सामने आ गई है. अब दरारें पहले की तुलना में और अधिक स्पष्ट दिखाई दे रही हैं, जिससे वाहन चालकों में भय का माहौल है.
स्थिति केवल मुख्य पुल तक सीमित नहीं है. हिरन नदी पुल से पहले घाट सिमरिया क्षेत्र में एक छोटे नाले पर बनी सीमेंट-कंक्रीट सड़क भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है. यहां सड़क के दो हिस्सों के बीच लगभग पांच से छह इंच का बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है. यह गैप लगातार बढ़ रहा है और आने-जाने वाले वाहनों के लिए गंभीर खतरा बन गया है. मुख्य पुल और संपर्क मार्ग दोनों की खराब स्थिति ने यात्रियों की परेशानी और जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है.
जबलपुर से सिहोरा के बीच का यह फोरलेन मार्ग लंबे समय से विभिन्न तकनीकी खामियों और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में रहा है. सड़क पर कई स्थानों पर गहरे गड्ढे, दरारें, किनारों पर गैप और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था का अभाव देखने को मिलता है. रात के समय यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है. स्ट्रीट लाइट की कमी के कारण वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग पाता, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मार्ग पर आए दिन छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, लेकिन संबंधित विभाग स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है.
इस बीच हिरन नदी पुल के आसपास पर्यावरण से जुड़ा एक और गंभीर मामला सामने आया है. नदी किनारे मौजूद बांस के बड़े झुरमुटों में अज्ञात लोगों द्वारा बार-बार आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं. इन आगजनी की घटनाओं के कारण हरे-भरे बांस के वृक्ष नष्ट होने की कगार पर पहुंच गए हैं. पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारों को मजबूती प्रदान करने में बांस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. यदि ये वृक्ष नष्ट हो गए तो वर्षा ऋतु में मिट्टी का कटाव तेजी से बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर पुल के एप्रोच मार्ग और आसपास की संरचनाओं पर पड़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि नदी किनारों का कटाव बढ़ने पर पुल की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है. ऐसे में केवल सड़क की मरम्मत ही नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है. स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, वन विभाग और प्रशासन इस गंभीर स्थिति के बावजूद अपेक्षित सक्रियता नहीं दिखा रहे हैं. यही कारण है कि लोगों में नाराजगी और आक्रोश बढ़ता जा रहा है.
क्षेत्रवासियों और नियमित रूप से इस मार्ग का उपयोग करने वाले वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि पुल और संपर्क मार्ग की तकनीकी जांच कराकर तत्काल मरम्मत कराई जाए. साथ ही सड़क सुरक्षा के लिए चेतावनी संकेतक, बैरिकेडिंग और पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसी बड़े हादसे को टाला जा सके. लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह लापरवाही भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है.
फिलहाल हिरन नदी पुल और उसके आसपास की स्थिति को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है. लगातार बढ़ती दरारें, धंसती सड़क और पर्यावरणीय नुकसान के संकेत यह स्पष्ट कर रहे हैं कि मामले को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है. अब सबकी निगाहें प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

