जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का 36वां दीक्षांत समारोह रविवार को उस समय ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण क्षण में बदल गया, जब देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विश्वविद्यालय पहुंचकर मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कीं. विश्वविद्यालय परिसर में सुबह से ही उत्साह, उल्लास और गरिमा का वातावरण दिखाई दिया. राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा के कड़े और अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे. सर्किट हाउस से विश्वविद्यालय परिसर तक पूरे मार्ग पर पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती रही. समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित अनेक जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद्, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे.
राष्ट्रपति के विश्वविद्यालय पहुंचते ही पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा. विद्यार्थियों और शिक्षकों में अपने बीच देश की प्रथम नागरिक की उपस्थिति को लेकर विशेष उत्साह दिखाई दिया. पारंपरिक शोभायात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ, जिसमें मंचासीन अतिथि शामिल हुए. इसके बाद राष्ट्रपति ने दीप प्रज्वलित कर 36वें दीक्षांत समारोह का विधिवत उद्घाटन किया. कुलगान और अन्य औपचारिक कार्यक्रमों के बीच समारोह गरिमामय वातावरण में आगे बढ़ता रहा.
दीक्षांत समारोह के दौरान कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध और प्रशासनिक उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया. अपने संबोधन की शुरुआत उन्होंने वीरांगना रानी दुर्गावती को नमन करते हुए की और कहा कि विश्वविद्यालय उनके साहस, त्याग और राष्ट्रनिष्ठा के आदर्शों को आत्मसात करते हुए शिक्षा और शोध के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने स्मरण कराया कि आगामी 24 जून को रानी दुर्गावती का 462वां बलिदान दिवस है, जो पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा का स्रोत है.
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय ने बीते वर्षों में गुणवत्ता सुधार और शैक्षणिक उत्कृष्टता की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं. उन्होंने कहा कि 23 जुलाई 2024 को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा विश्वविद्यालय को ‘ए’ ग्रेड प्रदान किया गया था. यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के लिए मील का पत्थर साबित हुई. उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय मात्र 0.04 अंक से ‘ए प्लस प्लस’ ग्रेड प्राप्त करने से चूक गया, फिर भी यह उपलब्धि संस्थान की उच्च गुणवत्ता और बेहतर शैक्षणिक वातावरण को प्रमाणित करती है.
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने समय की मांग के अनुरूप रोजगारोन्मुखी और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दी है. विद्यार्थियों को केवल डिग्री तक सीमित न रखकर उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए कई नवाचार किए गए हैं. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग से प्राप्त 10 करोड़ रुपये के अनुदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे शोध और नवाचार को नई गति मिली है. विश्वविद्यालय में आधुनिक प्रयोगशालाओं, अनुसंधान सुविधाओं और तकनीकी संसाधनों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
कुलगुरु ने परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में किए गए सुधारों की जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 घंटे में 28 परीक्षा परिणाम घोषित कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. यह कार्य प्रशासनिक दक्षता और तकनीकी क्षमता का उदाहरण है. उन्होंने कहा कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को पूरी तरह लागू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, जिससे परिणामों में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके.
समारोह के दौरान कुलगुरु ने विश्वविद्यालय की एक विशेष पहल का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय ने अपने सभी आधिकारिक दस्तावेजों और अभिलेखों में ‘इंडिया’ के स्थान पर ‘भारत’ शब्द का उपयोग प्रारंभ कर दिया है. उनके अनुसार यह केवल भाषाई परिवर्तन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कदम है. इस पहल को उपस्थित जनसमूह ने सराहना के साथ सुना.
दीक्षांत समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों के लिए सबसे यादगार क्षण वह रहा, जब राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विभिन्न संकायों के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और उपाधियां प्रदान कीं. राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरों पर गर्व और प्रसन्नता स्पष्ट दिखाई दे रही थी. कई विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए यह जीवन का अविस्मरणीय क्षण बन गया. जैसे ही किसी विद्यार्थी का नाम पुकारा जाता, पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठता.
राष्ट्रपति की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को कई गुना बढ़ा दिया. उनके आगमन ने विद्यार्थियों को न केवल सम्मानित होने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और अधिक गंभीरता से समझने की प्रेरणा भी प्रदान की. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की थीं, जिनकी झलक पूरे आयोजन में दिखाई दी.
रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय का यह 36वां दीक्षांत समारोह केवल उपाधियां और पदक वितरित करने का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह शिक्षा, शोध, नवाचार, राष्ट्रीय चेतना और युवा प्रतिभाओं के सम्मान का एक भव्य उत्सव बन गया. राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होकर निकले विद्यार्थियों के लिए यह उपलब्धि भविष्य की नई उड़ान का आधार बनी, वहीं विश्वविद्यालय के लिए यह दिन उसकी गौरवशाली यात्रा के स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया. पूरे समारोह के दौरान उपलब्धियों की चमक, विद्यार्थियों का उत्साह और राष्ट्रगौरव की भावना परिसर में स्पष्ट रूप से महसूस की जाती रही.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

