अजमेर. राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (स्नातक) की पुनर्परीक्षा के दौरान राजस्थान के अजमेर में एक परीक्षा केंद्र पर उस समय विवाद की स्थिति बन गई, जब एक छात्रा ने आरोप लगाया कि बुर्का पहनकर पहुंचने के कारण उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं दिया गया. छात्रा और उसके परिवार ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए आपत्ति जताई, जबकि बाद में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी और प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रा को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी गई थी.
रविवार को देशभर में 22 लाख से अधिक अभ्यर्थी नीट-यूजी पुनर्परीक्षा में शामिल हुए. इसी दौरान अजमेर के एक परीक्षा केंद्र पर एक छात्रा और केंद्र प्रशासन के बीच बुर्का पहनने को लेकर विवाद सामने आया. छात्रा का कहना था कि उसने पहली बार आयोजित परीक्षा में भी इसी परिधान में भाग लिया था और तब उसे किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा था. लेकिन पुनर्परीक्षा के दौरान प्रवेश के समय उससे बुर्का और दुपट्टा हटाने के लिए कहा गया, जिस पर विवाद शुरू हो गया.
छात्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि वह पहले की तरह ही बुर्का और दुपट्टा पहनकर परीक्षा देने पहुंची थी. उसके अनुसार शुरुआत में उससे केवल दुपट्टा हटाने को कहा गया, लेकिन बाद में बुर्का उतारने की भी बात कही गई. छात्रा का कहना था कि यदि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के नियमों में धार्मिक परिधान की अनुमति दी गई है, तो परीक्षा केंद्र पर उसे रोका नहीं जाना चाहिए. उसने कहा कि यदि इसी परिधान में परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलती, तो वह परीक्षा में शामिल नहीं होगी.
छात्रा के पिता ने भी केंद्र प्रशासन पर नियमों की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने तीन मई को आयोजित परीक्षा भी बुर्का पहनकर दी थी और उस समय कोई समस्या नहीं हुई थी. उन्होंने दावा किया कि नियमों के अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े परिधान पहनने की अनुमति है. परिवार की ओर से यह सुझाव भी दिया गया कि यदि सुरक्षा जांच आवश्यक है तो किसी महिला कर्मचारी द्वारा पर्दे के पीछे निजी तौर पर जांच की जा सकती है. उनका आरोप था कि प्रारंभिक स्तर पर इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया गया.
घटना की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मामले में हस्तक्षेप किया. परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने नियमों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया. इसके बाद स्थिति सामान्य हुई और छात्रा को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई.
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने बाद में स्पष्ट किया कि छात्रा को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया था और वह पुनर्परीक्षा में शामिल हुई. एजेंसी का कहना है कि सुरक्षा जांच की प्रक्रिया सभी अभ्यर्थियों के लिए अनिवार्य है और धार्मिक परिधान पहनने वाले उम्मीदवारों के लिए भी निर्धारित प्रावधान मौजूद हैं. नियमों के अनुसार धार्मिक आस्था से जुड़े विशेष परिधान पहनने वाले अभ्यर्थियों को समय से पहले केंद्र पर पहुंचना होता है ताकि आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके.
अजमेर के उत्तरी क्षेत्र के पुलिस अधिकारी शिवम जोशी ने बताया कि यह विवाद कुछ नियमों को लेकर स्पष्टता के अभाव के कारण उत्पन्न हुआ था. वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन मिलने के बाद स्थिति स्पष्ट हो गई और मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया गया. उन्होंने कहा कि इसके अलावा परीक्षा केंद्र पर किसी प्रकार की अन्य समस्या सामने नहीं आई और सभी अभ्यर्थियों को शांतिपूर्ण वातावरण में प्रवेश दिया गया.
नीट-यूजी पुनर्परीक्षा इस वर्ष विशेष परिस्थितियों में आयोजित की जा रही है. प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद पहले आयोजित परीक्षा को रद्द कर दिया गया था, जिसके चलते लाखों विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है. इस बार राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी ने सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत बनाया है. देशभर के परीक्षा केंद्रों पर धातु खोजी यंत्र, निगरानी कैमरे, बायोमेट्रिक सत्यापन और अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है.
परीक्षा अधिकारियों के अनुसार सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी अभ्यर्थियों की विस्तृत जांच की जा रही है. इसी प्रक्रिया के दौरान कई बार विशेष परिधान पहनकर आने वाले अभ्यर्थियों के मामलों में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और परीक्षा सुरक्षा दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश पहले से मौजूद हैं.
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही अभ्यर्थियों की धार्मिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलताओं का सम्मान भी आवश्यक है. उनका कहना है कि परीक्षा केंद्रों पर कार्यरत कर्मचारियों को ऐसे मामलों से संबंधित नियमों की पूरी जानकारी दी जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद उत्पन्न न हो.
इस घटना ने एक बार फिर परीक्षा केंद्रों पर नियमों के एकरूप पालन और बेहतर संवाद की आवश्यकता को सामने लाया है. हालांकि प्रशासन और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी के हस्तक्षेप के बाद मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया और छात्रा परीक्षा में शामिल हो सकी, लेकिन इस घटनाक्रम ने परीक्षा दिवस पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति जरूर पैदा कर दी.
फिलहाल देशभर में नीट-यूजी पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया जारी है और लाखों अभ्यर्थी अपने परिणामों की प्रतीक्षा कर रहे हैं. वहीं अजमेर की यह घटना परीक्षा प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक परिधान से जुड़े नियमों को लेकर चर्चा का विषय बन गई है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

