चेन्नई. तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में रविवार को एक समुद्री खाद्य प्रसंस्करण इकाई में संदिग्ध अमोनिया गैस रिसाव की घटना ने बड़ा औद्योगिक हादसा खड़ा कर दिया. इस दर्दनाक घटना में अब तक सात महिलाओं की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य श्रमिकों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल सहित विभिन्न एजेंसियों को तत्काल सक्रिय किया गया.
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह घटना तिरुवल्लूर जिले के पेरियापालयम के निकट कन्निगापैर क्षेत्र स्थित एक समुद्री खाद्य निर्यात इकाई में हुई. दोपहर के समय अचानक अमोनिया गैस के रिसाव की सूचना सामने आई, जिसके बाद कारखाने में काम कर रहे श्रमिकों में भगदड़ मच गई. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गैस फैलते ही कई कर्मचारियों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, चक्कर और घबराहट जैसी समस्याएं होने लगीं. कुछ लोग मौके पर ही बेहोश होकर गिर पड़े.
घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ ही समय में बड़ी संख्या में कर्मचारियों को अस्पताल पहुंचाना पड़ा. अधिकारियों के अनुसार प्रभावित लोगों में अधिकांश महिलाएं थीं, जो कारखाने में नियमित रूप से कार्यरत थीं. अस्पताल पहुंचाए गए कई श्रमिकों की हालत गंभीर बताई गई, जबकि सात महिलाओं को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया.
जिला प्रशासन को घटना की सूचना मिलते ही आपातकालीन प्रबंधन तंत्र सक्रिय कर दिया गया. तिरुवल्लूर जिला कलेक्टर कार्यालय ने तत्काल राहत एजेंसियों को सतर्क किया और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की सहायता मांगी. इसके बाद अरक्कोनम स्थित चौथी बटालियन मुख्यालय से विशेष दल को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया.
राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की लगभग 30 सदस्यीय टीम विशेष सुरक्षा उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची. टीम के पास व्यक्तिगत सुरक्षा किट, गैस पहचान उपकरण तथा रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु आपदाओं से निपटने के लिए विशेष उपकरण उपलब्ध थे. विशेषज्ञ दल ने कारखाने के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण कर गैस के स्रोत का पता लगाने और रिसाव को नियंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की.
अधिकारियों का कहना है कि अमोनिया गैस का उपयोग समुद्री खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में शीतलन प्रणाली के लिए किया जाता है. यदि किसी तकनीकी खराबी या रखरखाव में कमी के कारण गैस का रिसाव हो जाए तो यह मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक साबित हो सकती है. अधिक मात्रा में संपर्क होने पर यह श्वसन तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है.
हादसे के बाद आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों में भी चिंता का माहौल देखा गया. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के इलाकों की निगरानी शुरू कर दी और लोगों से प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की अपील की. राहत दलों ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि गैस का प्रभाव कारखाने की सीमा से बाहर न फैले.
चिकित्सकों के अनुसार अमोनिया गैस के संपर्क में आने वाले लोगों को तत्काल ताजी हवा, चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक उपचार की जरूरत होती है. अस्पतालों में भर्ती श्रमिकों का लगातार स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है. कुछ मरीजों को सांस लेने में गंभीर परेशानी होने के कारण विशेष निगरानी में रखा गया है. स्वास्थ्य विभाग ने आसपास के अस्पतालों को भी सतर्क कर दिया है ताकि आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सके.
घटना के बाद श्रमिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने कारखाने की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि ऐसे उद्योगों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए, क्योंकि किसी भी प्रकार की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है. कई लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए.
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि रासायनिक पदार्थों का उपयोग करने वाली इकाइयों में नियमित निरीक्षण, गैस रिसाव अलार्म प्रणाली, आपातकालीन निकासी योजना और कर्मचारियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देना अनिवार्य होना चाहिए. ऐसे उपाय दुर्घटनाओं के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
राज्य सरकार ने घटना पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए अधिकारियों को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं. साथ ही मृतकों के स्वजन और घायलों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया है. प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं.
फिलहाल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, अग्निशमन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं. गैस रिसाव को पूरी तरह नियंत्रित करने और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित घोषित करने तक राहत अभियान जारी रहेगा. इस दुखद हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा मानकों और रासायनिक इकाइयों में सतर्कता की आवश्यकता को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है. सात महिलाओं की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है, जबकि प्रभावित परिवारों के लिए यह त्रासदी लंबे समय तक याद रहने वाली है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

