राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी की बड़ी रिपोर्ट, ट्रस्ट पुनर्गठन और जवाबदेही तय करने की सिफारिश

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में एसआईटी की बड़ी रिपोर्ट, ट्रस्ट पुनर्गठन और जवाबदेही तय करने की सिफारिश

प्रेषित समय :14:59:32 PM / Mon, Jun 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अयोध्या. राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद अयोध्या से लेकर लखनऊ तक हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित 14 लोगों की भूमिका और प्रशासनिक जिम्मेदारियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. एसआईटी ने जांच के दौरान सामने आई खामियों के आधार पर ट्रस्ट के पुनर्गठन, पेशेवर प्रबंधन व्यवस्था लागू करने तथा मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति जैसी महत्वपूर्ण सिफारिशें की हैं.

जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने पिछले सप्ताह जांच शुरू की थी और छह दिनों तक मंदिर की दान व्यवस्था, नकदी गणना प्रणाली, प्रशासनिक प्रक्रियाओं तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की. जांच के दौरान ट्रस्ट पदाधिकारियों, कर्मचारियों, बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े लोगों और सेवादारों सहित लगभग 150 लोगों के बयान दर्ज किए गए. इसके अलावा 14 प्रमुख व्यक्तियों के लिखित बयान भी लिए गए, जिनका विश्लेषण रिपोर्ट का महत्वपूर्ण आधार बना है.

सूत्रों के मुताबिक, जांच में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से विस्तार से पूछताछ की गई. रिपोर्ट में यह संकेत दिया गया है कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और दान प्रबंधन प्रणाली में कई स्तरों पर प्रशासनिक कमियां मौजूद थीं. एसआईटी ने इन्हें केवल व्यक्तिगत त्रुटि न मानते हुए संस्थागत सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.

जांच के दौरान ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बयानों का मिलान किया गया. सूत्रों का दावा है कि दोनों के कथनों में कुछ महत्वपूर्ण विसंगतियां सामने आईं, जिसके बाद लगातार कई दिनों तक गहन पूछताछ की गई. अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी और सुभाष श्रीवास्तव सहित विभिन्न लोगों के बयान भी दर्ज किए गए हैं.

एसआईटी की जांच में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि मंदिर के दानपात्रों की चाबियां एक ही व्यक्ति के पास थीं. जांच दल ने इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का केंद्रीकरण सुरक्षा और पारदर्शिता दोनों दृष्टियों से उचित नहीं माना जा सकता. जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि कुछ लोगों को कथित अनियमितताओं की जानकारी पहले से थी, लेकिन समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए. इन्हीं तथ्यों को रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में दर्ज किया गया है.

प्रारंभिक रिपोर्ट में वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं. इनमें सबसे प्रमुख श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की सिफारिश है. एसआईटी का मानना है कि ट्रस्ट के प्रत्येक सदस्य और पदाधिकारी की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके. इसके साथ ही काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है.

रिपोर्ट में दानराशि की गणना और रिकॉर्ड व्यवस्था को और मजबूत बनाने की बात कही गई है. एसआईटी ने साप्ताहिक ऑडिट की व्यवस्था लागू करने, प्रतिदिन प्राप्त होने वाली नकदी का व्यवस्थित अभिलेख रखने तथा वित्तीय निगरानी तंत्र को अधिक प्रभावी बनाने की सिफारिश की है. इसके अलावा मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग अवधि को 45 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद या जांच के दौरान पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध रह सकें.

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने यह भी सुझाव दिया है कि जांच पूरी होने तक मामले से जुड़े प्रमुख पदाधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न दी जाए. हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए एसआईटी को अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए, क्योंकि कई पहलुओं की अभी और गहराई से जांच की जानी बाकी है.

शनिवार को प्रारंभिक जांच पूरी करने के बाद एसआईटी के सदस्य लखनऊ लौट गए थे. अब टीम अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी और आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश प्राप्त करेगी. माना जा रहा है कि रिपोर्ट के अध्ययन के बाद राज्य सरकार मामले में अगला कदम तय करेगी. मुख्यमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा.

रिपोर्ट सामने आने के बाद राम मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट से जुड़े हलकों में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं. सूत्रों का कहना है कि कुछ सेवादारों की जिम्मेदारियों की समीक्षा की जा रही है और जांच पूरी होने तक कई स्तरों पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है और एसआईटी की यह केवल प्रारंभिक रिपोर्ट है. अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच, दस्तावेजों के परीक्षण और आगे की पूछताछ के बाद ही सामने आएंगे.

फिलहाल पूरे मामले पर प्रदेश सरकार, मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं की निगाहें टिकी हुई हैं. देश की आस्था के सबसे बड़े केंद्रों में शामिल राम मंदिर में चढ़ावे की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर उठे इस विवाद ने व्यापक चर्चा छेड़ दी है. अब सबकी नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली सरकारी कार्रवाई पर है, जो आने वाले दिनों में इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-