जबलपुर. एमपी जून का महीना बीतने को है लेकिन अभी तक मानसून पूरी तरह से सक्रिय न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. बीच-बीच में हल्की बूंदाबांदी जरूर हो रही है, लेकिन यह किसानों के लिए पर्याप्त नहीं है. खेतों में धान और अन्य खरीफ फसलों की बुआई हो चुकी है. ऐसे में यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
मौसम विशेषज्ञों की माने तो 26 जून के आसपास मानसून मध्यप्रदेश में गति पकड़ सकता है. हालांकि तब तक किसानों की चिंता बनी हुई है. मुंबई की ओर से मानसूनी गतिविधियां सक्रिय होते ही मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में मानसून की एंट्री होने की संभावना जताई जा रही है. जबलपुर के किसानों का कहना हैं कि हर साल मौसम को देखते हुए जून में ही खेतों में बुआई कर दी जाती है. इस बार भी उन्होंने धान की सूखी बोनी कर दी है, लेकिन बारिश नहीं होने से बीज मिट्टी में ही पड़े हैं. उन्होंने बताया कि यदि कुछ दिनों में बारिश हो जाती है तो बीज अंकुरित हो जाएंगे, लेकिन बारिश नहीं हुई तो पूरी फसल खराब हो सकती है. सामान्य स्थिति में रोपा पद्धति से प्रति एकड़ लगभग 30 क्विंटल उत्पादन मिलता है, जबकि सूखी बोनी में उत्पादन आधे से भी कम रह जाता है.
नहर में भी नहीं है पानी-
किसानों का यह भी कहना है कि ट्रैक्टर और सीड ड्रिल मशीन से खेतों में बीज डाल रहे हैं. उनका कहना है कि खेत के पास से नहर गुजरती है, लेकिन उसमें भी पानी नहीं है. इस बार मानसून करीब 15 दिन देरी से चल रहा है. पिछले साल समय से बारिश होने के कारण किसानों ने अच्छी बुआई कर ली थी, लेकिन इस बार हालात अलग हैं. खेतों में बीज डाल दिए गए हैं, लेकिन अच्छी फसल की उम्मीद कम होती जा रही है.
26 जून के आसपास सक्रिय हो सकता है मानसून-
मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन से चार दिनों में मध्यप्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज हो सकती हैं. जबलपुर सहित पूर्वी मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में 26 जून के आसपास अच्छी बारिश होने की संभावना है. आज सोमवार सुबह जिले के कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई. इस दौरान अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस रहा. बारिश की कमी के बावजूद वातावरण में नमी बढऩे से उमस बनी हुई है.
35 से ज्यादा जिले बारिश में पीछे-
जबलपुर सहित प्रदेश के 35 से अधिक जिले सामान्य वर्षा से पीछे चल रहे हैं. मानसून में देरी और प्री-मानसून गतिविधियों के कमजोर रहने के कारण खरीफ फसलों की बुआई भी प्रभावित हुई है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि कम से कम चार इंच बारिश होने के बाद ही मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है. पर्याप्त नमी के बिना बुआई करने पर बीज खराब होने और दोबारा बुआई की नौबत आने का खतरा रहता है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

