भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों (मीसाबंदियों) के सम्मान और उनके योगदान को स्थायी पहचान देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित लोकतंत्र सेनानी प्रादेशिक सम्मेलन में घोषणा की कि अब प्रदेश के गांवों और कस्बों में दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के नाम पर पार्क, मार्ग और खेल मैदानों का नामकरण किया जाएगा. साथ ही लोकतंत्र सेनानी प्रदेश के सभी रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में दो दिन तक नि:शुल्क ठहर सकेंगे. मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए विशेष तीर्थयात्रा ट्रेन, नि:शुल्क उपचार और एयर एंबुलेंस जैसी सुविधाओं की भी घोषणा की.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया तथा लोकतंत्र सेनानियों पर पुष्पवर्षा कर उनका सम्मान किया. इस अवसर पर 96 वर्षीय लोकतंत्र सेनानी लक्ष्मी नारायण पाटीदार, 95 वर्षीय शांति लाल संघवी तथा पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का विशेष सम्मान किया गया. कार्यक्रम में आपातकाल की घटनाओं पर आधारित एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया.
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र सेनानियों का संघर्ष स्वतंत्रता आंदोलन से कम महत्वपूर्ण नहीं था. उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान देश में ऐसा वातावरण बना दिया गया था, जहां बिना किसी सुनवाई के लोगों को जेल भेज दिया जाता था. परिवारों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन लोकतंत्र सेनानियों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखा. उन्होंने कहा कि आज देश का लोकतंत्र उन्हीं लोगों के त्याग और बलिदान का परिणाम है.
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर संविधान के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा करने वालों का सम्मान करना सरकार का दायित्व है. उन्होंने कहा कि भारत आज विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राष्ट्र है और लोकतंत्र की यह विरासत लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष से मजबूत हुई है.
सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के लिए कई नई सुविधाओं की घोषणा की. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों के तीर्थाटन के लिए विशेष ट्रेन शुरू करेगी, ताकि वे देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों की यात्रा कर सकें. इसके अलावा प्रदेश के सभी रेस्ट हाउस और सर्किट हाउस में उन्हें दो दिन तक नि:शुल्क ठहरने की सुविधा दी जाएगी.
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि दिवंगत लोकतंत्र सेनानियों के गांवों और कस्बों में उनकी स्मृति में शिलालेख स्थापित किए जाएंगे. स्थानीय स्तर पर पार्क, सड़कें और खेल मैदान उनके नाम पर नामित किए जाएंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके योगदान को याद रख सकें.
सरकार ने लोकतंत्र सेनानियों के स्वास्थ्य को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था भी की जाएगी. जो लोकतंत्र सेनानी अब तक ताम्रपत्र प्राप्त नहीं कर सके हैं, उन्हें भी शीघ्र ताम्रपत्र प्रदान किए जाएंगे.
कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी संघ के प्रदेश अध्यक्ष तपन भौमिक ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक दशक से लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं ऐसे परिवार से आते हैं जिसने आपातकाल का संघर्ष देखा है, इसलिए लोकतंत्र सेनानियों की पीड़ा और सम्मान दोनों को वे निकट से समझते हैं.
लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद कैलाश सोनी ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का कठिन दौर था. उन्होंने मांग की कि देशभर के लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान दर्जा दिया जाए तथा उन्हें मिलने वाली 30 हजार रुपये की सम्मान राशि को आयकर से मुक्त किया जाए.
पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी ने भी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश सरकार लोकतंत्र सेनानियों को सम्मानजनक आर्थिक सहायता उपलब्ध करा रही है और उनके योगदान को समाज के सामने लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं.
मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के सुझावों को शासन की योजनाओं में भी महत्व दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले इन लोगों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है. सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि लोकतंत्र सेनानियों को हर स्तर पर सम्मान और आवश्यक सुविधाएं मिलती रहें.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

