ग्वालियर. शहर में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है. वार्ड क्रमांक-26 के सिंहपुर रोड पर लगभग 1.74 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क की गुणवत्ता को लेकर शुक्रवार शाम स्थानीय लोगों, जनप्रतिनिधियों और ठेकेदार के कर्मचारियों के बीच जमकर विवाद हो गया. क्षेत्रवासियों ने सड़क पर बिछाई जा रही डामर की परत निर्धारित मानकों से कम होने का आरोप लगाते हुए निर्माण कार्य का विरोध किया. मामला इतना बढ़ गया कि ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों के साथ मारपीट की नौबत आ गई. घटना की जानकारी मिलते ही नगर निगम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य का निरीक्षण किया. निगमायुक्त ने पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
जानकारी के अनुसार शुक्रवार शाम करीब साढ़े छह बजे नगर निगम की ठेकेदार फर्म मैसर्स एचएनएस, जिसके संचालक हाकिम शर्मा बताए गए हैं, सिंहपुर रोड पर लगभग एक किलोमीटर लंबे मार्ग का डामरीकरण करा रही थी. इसी दौरान स्थानीय पार्षद ममता अरविंद शर्मा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों के साथ मौके पर पहुंचीं और निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई. स्थानीय लोगों का आरोप था कि सड़क पर बिछाई जा रही डामर की परत निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है और निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है.
विरोध बढ़ने पर नगर निगम के सहायक यंत्री अमित गुप्ता भी मौके पर पहुंचे. उन्होंने ठेकेदार फर्म की ओर से कार्य की निगरानी कर रहे संदीप शर्मा के साथ सड़क का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान सड़क की डामर परत की मोटाई को लेकर की गई शिकायत प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होने की बात सामने आई. इसके बाद अधिकारियों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी.
निरीक्षण के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और ठेकेदार पक्ष के बीच चर्चा चल रही थी, तभी माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया. बहस बढ़ने के बाद कुछ लोगों ने ठेकेदार फर्म के कर्मचारियों के साथ मारपीट कर दी. स्थिति बिगड़ते देख कर्मचारी मौके से भाग निकले, जबकि आक्रोशित लोगों ने कुछ दूरी तक उनका पीछा भी किया. घटना के कारण कुछ समय के लिए क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
विवाद के बाद देर रात तक सड़क पर अतिरिक्त डामर की परत बिछाने का कार्य कराया गया. इससे यह सवाल भी उठने लगे कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप था, तो बाद में अतिरिक्त डामर बिछाने की आवश्यकता क्यों पड़ी. स्थानीय लोगों ने पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
मामले की जानकारी मिलने पर नगर निगम आयुक्त ने अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की तकनीकी जांच कराई जाए और यदि निर्धारित मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए.
यह मामला एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर रहा है. अब सभी की निगाहें नगर निगम की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क निर्माण में वास्तव में गुणवत्ता से समझौता हुआ या नहीं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

