तेलंगाना पुलिस की इंदौर में बड़ी दबिश, साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी गिरफ्तार

तेलंगाना पुलिस की इंदौर में बड़ी दबिश, साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी गिरफ्तार

प्रेषित समय :16:10:51 PM / Sun, Jun 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. देशभर में तेजी से फैल रहे साइबर अपराधों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत तेलंगाना पुलिस ने मध्य प्रदेश के इंदौर में बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी से जुड़े एक गिरोह के तीन संदिग्ध सदस्यों को हिरासत में लिया है. हैदराबाद में दर्ज एक साइबर ठगी के मामले की जांच के सिलसिले में रविवार सुबह तेलंगाना पुलिस की विशेष टीम इंदौर पहुंची और स्थानीय पुलिस के सहयोग से खजराना तथा पलासिया क्षेत्र में एक के बाद एक दबिश देकर आरोपियों को पकड़ा. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित साइबर ठगों को बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम अपने खातों में प्राप्त करने जैसे काम में शामिल थे. पुलिस अब तीनों को ट्रांजिट रिमांड पर लेकर आगे की पूछताछ करेगी, ताकि पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके.

जानकारी के अनुसार तेलंगाना के हैदराबाद स्थित साइबर थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले की जांच के दौरान पुलिस को कुछ संदिग्ध मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के सुराग मिले थे. तकनीकी विश्लेषण और मोबाइल टॉवर लोकेशन के आधार पर जांच एजेंसियों ने आरोपितों की गतिविधियों का पता लगाया, जिसके बाद तेलंगाना पुलिस की टीम इंदौर पहुंची. निर्धारित प्रक्रिया के तहत टीम सबसे पहले पलासिया स्थित पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची, जहां आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं. इसके बाद स्थानीय पुलिस को साथ लेकर आरोपियों की तलाश शुरू की गई.

खजराना थाना प्रभारी मनोज सेंधव के अनुसार तेलंगाना पुलिस ने साइबर ठगी के मामले में संदिग्धों की जानकारी साझा की थी. स्थानीय स्तर पर उनके ठिकानों की पुष्टि करने के बाद संयुक्त कार्रवाई की गई. सबसे पहले पुलिस ने बुरहानपुर निवासी सुमित अहीर को भोपाल की गुलमोहर कॉलोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया. इसके बाद ओल्ड पलासिया क्षेत्र में दबिश देकर बुरहानपुर निवासी तिलक साहिवाल को हिरासत में लिया गया. तीसरी कार्रवाई खजराना थाना क्षेत्र में की गई, जहां से सिरपुर, खंडवा निवासी कपिल अहीर को पकड़ा गया. तीनों आरोपियों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए तेलंगाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया.

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को यह जानकारी मिली है कि आरोपित साइबर ठगी के मुख्य संचालक नहीं बल्कि उन्हें सहयोग देने वाले नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं. जांच एजेंसियों का मानना है कि इनके बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से अर्जित धनराशि को प्राप्त करने और आगे स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था. ऐसे मामलों में बैंक खाते उपलब्ध कराने वाले लोग भी कानून की नजर में अपराध में सहभागी माने जाते हैं. पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और संपर्कों की गहन जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि गिरोह ने अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया और कितनी राशि का लेनदेन किया गया.

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में संगठित साइबर गिरोह अलग-अलग राज्यों में फैले लोगों के बैंक खातों और मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर अपराध को अंजाम देते हैं. इससे जांच एजेंसियों को अलग-अलग राज्यों में समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करनी पड़ती है. तेलंगाना पुलिस और इंदौर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई इसी समन्वित अभियान का हिस्सा मानी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य राज्यों में भी इसी तरह की कार्रवाई की जा सकती है.

इधर इंदौर में ही एक अन्य आपराधिक मामले में संयोगितागंज पुलिस ने कार रेंटल कंपनी संचालक और उसके साथी के खिलाफ अपहरण, बंधक बनाकर मारपीट करने तथा रुपये वसूलने का मामला दर्ज किया है. पुलिस के अनुसार ललितपुर निवासी अंश सुड़ौले ने शिकायत दर्ज कराई कि वह 19 जून को अपने मित्र की शादी में शामिल होने इंदौर आया था. उसने निपानिया स्थित एक कार रेंटल कंपनी से प्रतिदिन दो हजार रुपये के किराये पर कार ली थी. इस दौरान वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटाया जा सका.

शिकायत के मुताबिक कार रेंटल कंपनी संचालक रोहित यदुवंशी ने अपने साथी कासिम के साथ मिलकर जीपीएस लोकेशन के आधार पर कार का पता लगाया और अंश को अपने कब्जे में ले लिया. आरोप है कि उसे तीन दिन तक बंधक बनाकर रखा गया, मारपीट की गई और वाहन के खर्च के नाम पर 95 हजार रुपये की मांग की गई. बाद में उसके पिता से 49 हजार रुपये वसूलने के बाद उसे छोड़ा गया. परिजनों द्वारा पुलिस को सूचना दिए जाने पर संयोगितागंज थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उन्हें हिरासत में ले लिया. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने इस तरह की वारदात पहले भी की है या नहीं.

लगातार सामने आ रहे साइबर अपराध और आर्थिक धोखाधड़ी के मामलों ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि अपराधी आधुनिक तकनीक और संगठित नेटवर्क का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, मोबाइल सिम या व्यक्तिगत दस्तावेज किसी को उपलब्ध न कराएं. यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि, वित्तीय लेनदेन या ठगी का प्रयास सामने आए तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन अथवा निकटतम पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं, ताकि समय रहते कार्रवाई कर अपराधियों तक पहुंचा जा सके.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-