ग्वालियर. मध्य प्रदेश पुलिस का एक आरक्षक अपने ही विभाग की कार्यप्रणाली को चुनौती देते हुए न्याय की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंच गया है. अंबाह थाने में पदस्थ आरक्षक राहुल अटरिया ने आरोप लगाया है कि जमानती अपराध होने के बावजूद उन्हें करीब 23 घंटे तक कैलारस थाने में बैठाकर रखा गया. उनका कहना है कि न तो उन्हें जमानत के अधिकार की जानकारी दी गई और न ही गिरफ्तारी के दौरान सुप्रीम कोर्ट की निर्धारित गाइडलाइन का पालन किया गया. मामले को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन बताते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में पांच लाख रुपये के मुआवजे और संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की मांग की है.
याचिका में आरक्षक राहुल अटरिया ने कहा है कि 12 फरवरी 2025 को 23 लाख रुपये की कथित उगाही से जुड़े एक मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया था. जांच के दौरान उन्हें सह-आरोपी बनाया गया था. उनका आरोप है कि जिस मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया, वह जमानती अपराध की श्रेणी में आता था, इसके बावजूद पुलिस ने उन्हें थाने से रिहा नहीं किया और करीब 23 घंटे तक थाने में ही बैठाए रखा. उनका कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान उनके संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी की गई.
आरक्षक ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रत्येक नागरिक को व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है. इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया. उनका दावा है कि यदि मामला जमानती था तो उन्हें थाने से ही जमानत का लाभ मिलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया. इसके चलते उन्हें अनावश्यक मानसिक और सामाजिक परेशानी का सामना करना पड़ा.
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि अगले दिन उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें जमानत दे दी. सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस बात पर सवाल उठाया कि जब मामला जमानती था तो गिरफ्तारी की आवश्यकता क्यों पड़ी. कोर्ट ने इस संबंध में कैलारस थाना प्रभारी से जवाब तलब किया है और गिरफ्तारी के औचित्य पर स्पष्टीकरण मांगा है.
आरक्षक ने हाईकोर्ट से मांग की है कि उनके मौलिक अधिकारों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए उन्हें पांच लाख रुपये का मुआवजा दिलाया जाए. साथ ही, गिरफ्तारी की प्रक्रिया में कथित लापरवाही और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले संबंधित थाना प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश भी दिए जाएं.
यह मामला अब केवल एक पुलिसकर्मी की शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया, जमानती अपराधों में पुलिस की भूमिका और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों के पालन जैसे महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं से भी जुड़ गया है. हाईकोर्ट में मामले की आगामी सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी के जवाब और अदालत की टिप्पणी पर सभी की नजर रहेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

