ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह में देरी या बार-बार रिश्ते टूटने के पीछे केवल एक कारण जिम्मेदार नहीं होता. किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संपूर्ण जन्म कुंडली, ग्रहों की स्थिति, दशा, गोचर और योगों का विस्तृत अध्ययन आवश्यक माना जाता है. आइए जानते हैं वे प्रमुख ज्योतिषीय कारण, जिनके चलते विवाह में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं.
1. सप्तम भाव का पीड़ित होना
सप्तम भाव को विवाह और जीवनसाथी का भाव माना जाता है. यदि इस भाव पर शनि, राहु, केतु या मंगल जैसे पाप ग्रहों का अशुभ प्रभाव हो या सप्तम भाव का स्वामी (सप्तमेश) कमजोर अथवा पीड़ित हो, तो विवाह में देरी, बार-बार रुकावट या रिश्तों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है.
2. कमजोर या पीड़ित शुक्र
शुक्र विवाह, प्रेम, आकर्षण और दांपत्य सुख का प्रमुख कारक ग्रह माना जाता है. यदि शुक्र नीच राशि में हो, पाप ग्रहों से प्रभावित हो या कमजोर स्थिति में हो, तो अच्छे रिश्ते बनने के बावजूद विवाह की बात अंतिम चरण तक नहीं पहुंच पाती या बार-बार बाधाएं आती हैं.
3. मंगल दोष
यदि जन्म कुंडली में मंगल लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो, तो कुछ परिस्थितियों में इसे मंगल दोष माना जाता है. यह विवाह में विलंब या वैवाहिक जीवन में चुनौतियों का कारण बन सकता है. हालांकि केवल मंगल की स्थिति देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है. इसका सही आकलन पूरी कुंडली के विश्लेषण के बाद ही किया जाना चाहिए.
4. राहु-केतु का प्रभाव
राहु और केतु यदि सप्तम भाव या सप्तमेश को प्रभावित करते हैं, तो भ्रम, गलतफहमियां, अचानक रिश्ता टूटना, अप्रत्याशित बाधाएं या वैवाहिक निर्णयों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है.
5. अशुभ दशा और गोचर
कई बार जन्म कुंडली में विवाह के मजबूत योग मौजूद होते हैं, लेकिन यदि उस समय ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या गोचर अनुकूल नहीं हो, तो विवाह में देरी हो सकती है. जैसे ही अनुकूल ग्रह दशा आती है, विवाह के योग स्वतः मजबूत होकर सफल होने लगते हैं.
क्या करें?
विवाह से पहले किसी अनुभवी और योग्य ज्योतिषी से संपूर्ण जन्म कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कराएं.
केवल मंगल दोष के आधार पर निर्णय न लें, बल्कि सभी ग्रहों, भावों, दशाओं और योगों का समग्र अध्ययन आवश्यक है.
योग्य मार्गदर्शन में मंत्र-जप, पूजा, दान, ग्रह शांति या अन्य पारंपरिक उपाय करें.
धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें. ज्योतिष के अनुसार अनुकूल ग्रह दशा आने पर विवाह के योग स्वतः प्रबल हो जाते हैं.
महत्वपूर्ण सूचना:
ज्योतिष एक पारंपरिक आस्था और विश्वास पर आधारित विद्या है. इसके निष्कर्षों के वैज्ञानिक प्रमाण सर्वसम्मत नहीं हैं. इसलिए इसे मार्गदर्शन के रूप में देखें और जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर तथा आवश्यकतानुसार विशेषज्ञ सलाह के साथ लें.
-पंडित चंद्रशेखर नेमा 'हिमांशु'
माँ कामाख्या साधक | जन्म कुंडली विशेषज्ञ | वास्तु शास्त्री
मो.: 9893280184

