यूरोप में टूटा भीषण गर्मी का रिकॉर्ड, जलवायु परिवर्तन ने जून की हीटवेव को बनाया और खतरनाक

यूरोप में टूटा भीषण गर्मी का रिकॉर्ड, जलवायु परिवर्तन ने जून की हीटवेव को बनाया और खतरनाक

प्रेषित समय :17:56:55 PM / Sun, Jul 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

यूरोप, जिसे लंबे समय तक अपेक्षाकृत ठंडे मौसम वाले महाद्वीप के रूप में जाना जाता रहा है, अब जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों का तेजी से सामना कर रहा है. जून 2026 के अंतिम दिनों में पश्चिमी यूरोप के कई देशों में रिकॉर्डतोड़ गर्मी दर्ज की गई, जिसने वैज्ञानिकों को भी चिंतित कर दिया है. नई वैज्ञानिक रिपोर्ट के अनुसार यह हीटवेव केवल एक सामान्य मौसमी घटना नहीं थी, बल्कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने इसे पहले की तुलना में कहीं अधिक तीव्र, लंबा और खतरनाक बना दिया. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक तापमान बढ़ने की यही रफ्तार जारी रही तो भविष्य में यूरोप में भी भारत जैसी भीषण और लगातार पड़ने वाली हीटवेव सामान्य स्थिति बन सकती है.

ClimaMeter के अध्ययन के मुताबिक जून 2026 की इस हीटवेव के दौरान बने मौसमीय हालात लगभग 30 वर्ष पहले की तुलना में करीब 2.5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म थे. यदि इसकी तुलना लगभग 50 वर्ष पहले के मौसम से की जाए तो तापमान में यह अंतर करीब 3.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह अंतर केवल प्राकृतिक मौसम चक्र का परिणाम नहीं है, बल्कि पृथ्वी के बढ़ते औसत तापमान का सीधा प्रभाव है, जिसने हर गर्मी की लहर को पहले से अधिक खतरनाक बना दिया है.

रिपोर्ट के अनुसार इस हीटवेव का प्रभाव केवल तापमान तक सीमित नहीं रहा. इसके कारण लगभग 32.7 करोड़ लोग प्रभावित हुए, जबकि करीब 15.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक गतिविधियां इसकी चपेट में आईं. इनमें से 26.4 करोड़ लोग और लगभग 13.4 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक गतिविधियां सबसे गंभीर श्रेणी की गर्मी से प्रभावित क्षेत्रों में दर्ज की गईं. विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक गर्मी का असर स्वास्थ्य सेवाओं, बिजली व्यवस्था, परिवहन, कृषि, उद्योग और श्रम उत्पादकता पर भी व्यापक रूप से दिखाई दिया.

वैज्ञानिकों ने इस भीषण गर्मी के पीछे "हीट डोम" नामक मौसमीय स्थिति को भी जिम्मेदार बताया है. हीट डोम ऐसी स्थिति होती है जिसमें उच्च वायुदाब का क्षेत्र लंबे समय तक एक ही स्थान पर बना रहता है. इससे गर्म हवा बाहर नहीं निकल पाती और लगातार तापमान बढ़ता रहता है. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि हीट डोम कोई नई घटना नहीं है. फ्रांस के CNRS-IPSL से जुड़े वैज्ञानिक मार्को ज़ांची के अनुसार पहले भी ऐसी परिस्थितियां बनती थीं, लेकिन उस समय पृथ्वी का औसत तापमान कम होने के कारण इनके प्रभाव इतने विनाशकारी नहीं होते थे. अब पहले से गर्म हो चुके वातावरण में यही मौसमीय स्थिति रिकॉर्ड तोड़ तापमान पैदा कर रही है.

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप अब दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है. 1990 के दशक के बाद यहां हीटवेव की आवृत्ति और तीव्रता दोनों लगातार बढ़ी हैं. इटली के INGV से जुड़े वैज्ञानिक टोमासो अल्बर्टी का कहना है कि जून 2026 की हीटवेव कोई असाधारण मौसमीय घटना नहीं थी, बल्कि असाधारण यह था कि पहले से गर्म हो चुकी जमीन और समुद्र ने इसके प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया. इसके कारण हीट स्ट्रेस बढ़ा, अस्पतालों पर दबाव बढ़ा, बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई, कई क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और गर्मी से होने वाली मौतों में भी वृद्धि दर्ज की गई.

रिपोर्ट भारत के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देती है. भारत पिछले कई वर्षों से लगातार भीषण गर्मी और लंबी हीटवेव का सामना कर रहा है. अब यूरोप में भी उसी तरह की परिस्थितियां बनने लगी हैं. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक नेवेन एस. फुचकर का कहना है कि प्राकृतिक मौसमीय परिस्थितियों को मानवजनित जलवायु परिवर्तन लगातार अधिक खतरनाक बना रहा है. वहीं यूनिवर्सिटी ऑफ शेफील्ड के वैज्ञानिक हाओसू तांग के अनुसार अब चुनौती केवल मौसम का पूर्वानुमान लगाने की नहीं, बल्कि समाज, शहरों और स्वास्थ्य व्यवस्था को समय रहते तैयार करने की है.

विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी तक सीमित नहीं रह सकता. शहरों को अधिक हरित और गर्मी के अनुकूल बनाना होगा, अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ानी होगी, बिजली ढांचे को मजबूत करना होगा तथा नवीकरणीय ऊर्जा आधारित ऊर्जा परिवर्तन को तेज करना होगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि अब हीटवेव किसी एक देश या महाद्वीप की समस्या नहीं रह गई है. जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के मौसम को बदल रहा है और जिन क्षेत्रों को कभी भीषण गर्मी से सुरक्षित माना जाता था, वहां भी अब रिकॉर्ड टूट रहे हैं. यही इस अध्ययन का सबसे बड़ा संदेश है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी चरम मौसमीय घटनाएं और अधिक सामान्य होती जाएंगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-