नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम डीबी पाटिल के नाम पर रखने की मांग तेज, 15 हजार लोग आज विधान भवन तक करेंगे मार्च

नवी मुंबई एयरपोर्ट का नाम डीबी पाटिल के नाम पर रखने की मांग तेज, 15 हजार लोग आज विधान भवन तक करेंगे मार्च

प्रेषित समय :19:44:50 PM / Tue, Jul 7th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नवी मुंबई. नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (एनएमआईए) का नाम दिवंगत किसान नेता लोकनेते दिनकर बालू (डीबी) पाटिल के नाम पर रखने की लंबे समय से चली आ रही मांग एक बार फिर तेज हो गई है. इस मांग को लेकर बुधवार को करीब 15 हजार लोगों के पनवेल से मुंबई स्थित विधान भवन तक विशाल मार्च निकालने की घोषणा की गई है. आयोजकों के अनुसार इस मार्च में परियोजना प्रभावित परिवारों, किसानों, आगरी-कोली समुदाय के लोगों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.

यह आंदोलन युवा सामाजिक कार्यकर्ता रश्मिता पोपेटा के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने के बाद फिर से चर्चा में आया है. अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 15 जुलाई से नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के संचालन की तैयारी के बीच नामकरण का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक विषय बन गया है.

लोकनेते दिबा प्रेमी नामकरण समिति के बैनर तले आयोजित यह मार्च बुधवार सुबह 10 बजे पनवेल के छत्रपति शिवाजी महाराज चौक से शुरू होगा. प्रदर्शनकारी पहले छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद जुलूस एसटी स्टैंड, कलंबोली, सानपाड़ा, चेंबूर और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे होते हुए विधान भवन पहुंचेगा.

सामाजिक कार्यकर्ता कांतिलाल कडू ने बताया कि मार्च की तैयारी के लिए पनवेल, उरण, पेन, रोहा, अलीबाग, खालापुर, कर्जत, ठाणे, कल्याण, भिवंडी, वसई, विरार और पालघर सहित कई क्षेत्रों में गांव-गांव बैठकें आयोजित की गईं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के संगठन, कलाकार समूह, बैलगाड़ी संगठन, ग्राम समितियां, आगरी समाज और अनेक सामाजिक संस्थाओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है.

कांतिलाल कडू के अनुसार यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि परियोजना प्रभावित परिवारों के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा जन आंदोलन बन चुका है. उन्होंने कहा कि विभिन्न समुदायों और सामाजिक संगठनों की बड़ी भागीदारी इस बात का संकेत है कि लोगों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक समर्थन और भावनात्मक जुड़ाव है.

मार्च निकालने का निर्णय जसई में आयोजित एक आपात बैठक में लिया गया था. बैठक में भिवंडी के सांसद सुरेश उर्फ बल्या मामा म्हात्रे, पूर्व विधान परिषद सदस्य बालाराम पाटिल, कांतिलाल कडू तथा विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चलने के दौरान आंदोलनकारियों का प्रतिनिधिमंडल अपनी मांग सरकार के सामने रखेगा.

भूख हड़ताल पर बैठीं रश्मिता पोपेटा ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की लड़ाई नहीं बल्कि परियोजना प्रभावित परिवारों के स्वाभिमान का प्रश्न है. उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

सांसद सुरेश उर्फ बल्या मामा म्हात्रे ने कहा कि हवाई अड्डे का संचालन शुरू होने के बावजूद अब तक नामकरण का मुद्दा लंबित रहने से प्रभावित परिवारों की भावनाएं आहत हुई हैं. उनके अनुसार हजारों किसानों और जमीन देने वाले परिवारों के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.

पूर्व एमएलसी बालाराम पाटिल ने कहा कि आंदोलन में लोगों की बढ़ती भागीदारी सरकार के प्रति जनता की नाराजगी को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि डीबी पाटिल के नाम पर हवाई अड्डे का आधिकारिक नामकरण होने तक आंदोलन जारी रहेगा.

आंदोलनकारियों ने बताया कि प्रस्तावित मार्च की लिखित सूचना मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पहले ही दे दी गई है. उनका कहना है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा.

नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम लोकनेते डीबी पाटिल के नाम पर रखने की मांग पिछले एक दशक से अधिक समय से क्षेत्र का प्रमुख राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनी हुई है. वर्ष 2021 में महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी, लेकिन अंतिम स्वीकृति अब भी केंद्र सरकार से मिलना बाकी है.

इसी वर्ष मई में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में केंद्र सरकार को निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश देने से इनकार करते हुए कहा था कि सार्वजनिक अवसंरचना का नामकरण कार्यपालिका के नीतिगत अधिकार क्षेत्र का विषय है. वहीं पिछले महीने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि राज्य सरकार सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कर चुकी है और प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार के साथ लगातार संपर्क में है. आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि केंद्र सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-