जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट ने पॉक्सो मामले में अहम फैसला सुनाते हुए डिंडौरी के एक प्रकरण में आरोपी मुकेश पंद्रो की दोषसिद्धि और सजा को निरस्त कर उसे दोषमुक्त कर दिया. न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने कहा कि अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी.
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो), डिंडौरी ने आरोपी को आईपीसी की धाराओं 363, 366 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(एल)/6 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष सहित विभिन्न अवधियों की सजा सुनाई थी.
हाईकोर्ट में बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पीड़िता अपनी इच्छा से आरोपी के साथ गई थी और दोनों के बीच सहमति से संबंध थे. सुनवाई के दौरान जन्मतिथि से जुड़े दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आया.
कोर्ट ने पाया कि जन्म प्रमाण-पत्र घटना के करीब 11 वर्ष बाद बनाया गया था, जबकि पीड़िता की मां के बयान के आधार पर उसकी जन्मतिथि वर्ष 2005 मानी गई. इससे घटना के समय उसकी आयु 18 वर्ष से अधिक निकलती है.
इसी आधार पर हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन पीड़िता को घटना के समय नाबालिग साबित नहीं कर सका और आरोपी मुकेश पंद्रो की दोषसिद्धि व सजा निरस्त करते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

