नासिक टीसीएस मामले में गर्भवती नीदा खान को जमानत, अदालत ने कहा जेल में प्रसव का आघात असहनीय

नासिक टीसीएस मामले में गर्भवती नीदा खान को जमानत, अदालत ने कहा जेल में प्रसव का आघात असहनीय

प्रेषित समय :20:01:51 PM / Thu, Jul 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नासिक। महाराष्ट्र के नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) कार्यालय से जुड़े यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार गर्भवती आरोपी नीदा खान को स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी महिला के लिए जेल में बच्चे को जन्म देने का मानसिक और सामाजिक आघात असहनीय होता है। हालांकि अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर पीड़िता के वैचारिक और धार्मिक विचारों को प्रभावित करने का प्रयास किया था। इसके बावजूद अदालत ने माना कि जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, इसलिए आगे हिरासत में रखना आवश्यक नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के.जी. जोशी ने 6 जुलाई को जमानत मंजूर की थी, जबकि विस्तृत आदेश गुरुवार को उपलब्ध कराया गया। न्यायालय ने कहा कि प्राथमिकी में नीदा खान की कथित भूमिका का स्पष्ट उल्लेख है और जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार पीड़िता को धार्मिक रूप से प्रभावित करने तथा उसके विचार बदलने का प्रयास किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन के अनुसार पीड़िता को यह समझाने की कोशिश की गई कि हिंदू धर्म में आपत्तिजनक कथाएं हैं।

बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि नीदा खान पांच माह की गर्भवती हैं और इस स्थिति में उन्हें जेल में रखना उचित नहीं होगा। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि जेल में प्रसव की पीड़ा और उससे जुड़ा सामाजिक कलंक किसी भी महिला के लिए बेहद कष्टदायक होता है। न्यायालय ने कहा कि नवजात शिशु के समुचित स्वागत और उसके समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए न्यायिक विवेक का प्रयोग करते हुए आरोपी को जमानत देना उचित है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है। ऐसे में आरोपी को आगे न्यायिक हिरासत में रखने से जांच के उद्देश्य की पूर्ति नहीं होगी। इसी आधार पर अदालत ने 75 हजार रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर नीदा खान को जमानत देने का आदेश दिया।

बचाव पक्ष के अधिवक्ता राहुल कसलीवाल ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल निर्दोष हैं और उन्हें झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि नीदा खान उच्च शिक्षित हैं और अप्रैल 2026 तक टीसीएस में एसोसिएट के पद पर कार्यरत थीं, जिसके बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।

वहीं अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में यौन उत्पीड़न और कथित धार्मिक दबाव से जुड़े पर्याप्त साक्ष्य सामने आए हैं। सरकारी वकील विजय गायकवाड़ तथा पीड़िता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि सह-आरोपी दानिश शेख ने पीड़िता को इस्लामी धार्मिक पुस्तक और बुर्का दिया था तथा धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से उस पर प्रभाव डालने की कोशिश की गई। अभियोजन के अनुसार यह पूरा घटनाक्रम सुनियोजित तरीके से यौन शोषण और कथित धार्मिक परिवर्तन के प्रयास से जुड़ा था।

नासिक पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुल नौ मामलों की जांच कर रही है। इन मामलों में महिला कर्मचारियों के कथित शोषण, जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास, धार्मिक भावनाएं आहत करने, छेड़छाड़ और मानसिक उत्पीड़न जैसे आरोप शामिल हैं। संबंधित मामला देवळाली कैंप पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। चूंकि पीड़िता अनुसूचित जाति से संबंधित है, इसलिए आरोपियों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार नीदा खान पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता को बुर्का और धार्मिक साहित्य उपलब्ध कराया, उसके मोबाइल फोन में इस्लाम से संबंधित एप्लीकेशन इंस्टॉल कराए, उसके घर जाकर नमाज पढ़ने का तरीका सिखाया और हिजाब पहनने के लिए प्रेरित किया। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

मामला सामने आने के बाद टीसीएस ने स्पष्ट किया था कि कंपनी कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के उत्पीड़न या दबाव के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। कंपनी ने यह भी बताया कि नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े कर्मचारियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि मामले की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-