मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कचरे के ढेर में मिला मंडला के दंपती का मृत नवजात शिशु

मेडिकल कॉलेज अस्पताल के कचरे के ढेर में मिला मंडला के दंपती का मृत नवजात शिशु

प्रेषित समय :17:08:10 PM / Sun, Jul 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. सबसे बड़े और प्रतिष्ठित नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल से एक बेहद ही हृदयविदारक और चिकित्सा व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरी स्वास्थ्य प्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां मंडला जिले से आए एक गरीब और लाचार दंपती के नवजात शिशु का शव शनिवार को गायनिक वार्ड के बाहर रखे एक डस्टबिन में कचरे के ढेर के बीच पड़ा हुआ मिला. इस दर्दनाक घटना की खबर फैलते ही पूरे अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा. घटना से आक्रोशित पीड़ित परिवार और उनके शुभचिंतकों ने वार्ड के बाहर करीब छह घंटे तक जमकर हंगामा किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की. हैरानी की बात यह है कि इस गंभीर लापरवाही के बाद भी मेडिकल कॉलेज के शीर्ष अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए और जवाब देने से बचते नजर आए.

इस पूरे मामले में पीड़ित परिजनों ने बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं. मंडला जिले के मकरी गांव के रहने वाले इस पीड़ित परिवार की बहू को प्रसव पीड़ा होने के बाद रविवार को जबलपुर लाया गया था. सोमवार को उसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल के गायनिक (महिला एवं प्रसव) वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उसने एक नवजात को जन्म दिया. परिजनों का आरोप है कि सोमवार को बच्चे के जन्म के बाद से लेकर शनिवार दोपहर तक वे लगातार डॉक्टरों और ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ से यह पूछते रहे कि लड़का हुआ है या लड़की और बच्चे की स्थिति कैसी है. लेकिन संवेदनहीनता की हद पार करते हुए किसी भी चिकित्सक या स्वास्थ्य कर्मी ने उन्हें कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी और लगातार बात को टालते रहे. परिजनों को पांच दिनों तक अंधेरे में रखा गया और आखिरकार शनिवार दोपहर को उन्हें अपने जिगर के टुकड़े का मृत शरीर वार्ड के ठीक बाहर लगे डस्टबिन के भीतर कचरे के डिब्बे में लावारिस हालत में पड़ा मिला.

दूसरी तरफ, इस भीषण हंगामे और आरोपों के बीच जब अस्पताल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से इस विषय में बात की गई, तो उन्होंने अपनी सफाई में एक अलग पक्ष रखा. चिकित्सा प्रशासन का कहना है कि महिला की स्थिति काफी गंभीर थी और उसके पेट में अत्यधिक पानी भर रहा था, जिसके कारण उसकी जान को खतरा बना हुआ था. इस चिकित्सकीय आपातकाल की वजह से डॉक्टरों को समय से पूर्व यानी करीब साढ़े छह महीने में ही सिजेरियन डिलीवरी करनी पड़ी. डॉक्टरों के मुताबिक, समय से बहुत पहले पैदा होने के कारण नवजात पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाया था और वह एक भ्रूण की अवस्था में ही था. अस्पताल स्टाफ का दावा है कि डिलीवरी के समय ही नवजात मृत पैदा हुआ था.

हालांकि, अस्पताल प्रशासन इस बात का कोई तार्किक जवाब नहीं दे सका कि अगर नवजात मृत पैदा हुआ था, तो उसे ससम्मान परिजनों को सौंपने या उचित चिकित्सीय प्रक्रिया का पालन करने के बजाय डस्टबिन के कचरे में क्यों फेंक दिया गया और पांच दिनों तक परिजनों को सच्चाई से दूर क्यों रखा गया. इस सनसनीखेज मामले के बाद पुलिस को सूचना दी गई है और नवजात के शव को कब्जे में लेकर सुरक्षित रखवाया गया है, जिसका पोस्टमार्टम रविवार को किया जाएगा. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. अब स्थानीय प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद ही इस घोर लापरवाही की असली सच्चाई और इसके पीछे जिम्मेदार चेहरों का खुलासा हो सकेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-