जबलपुर. कविता दक्षिणामूर्ति की रहस्यमय मौत का मामला एक बार फिर अदालत में गूंजा, जहां सुनवाई के दौरान कई ऐसे सवाल सामने आए जिन्होंने पूरे घटनाक्रम को लेकर संदेह और गहरा कर दिया है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि मिलिट्री अस्पताल घटनास्थल से महज पांच मिनट की दूरी पर था, तो बाथरूम में गिरने के बाद कविता को अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे 39 मिनट की देरी आखिर क्यों हुई. इसी मुद्दे को लेकर मृतका के परिजनों ने निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई है.
शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अवधेश श्रीवास्तव की अदालत में इस मामले से जुड़ी पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई हुई. मृतका के पिता चेन्नई निवासी पी. दक्षिणामूर्ति की ओर से अधिवक्ता मनीष वर्मा, विनोद सिसोदिया और निधि सोनकर ने पक्ष रखा. सुनवाई के दौरान उन्होंने मृतका के पति सेना के मेजर एम. नागार्जुन की ओर से दोबारा समय मांगे जाने का विरोध किया. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 25 जुलाई निर्धारित की है.
मामले में हाई कोर्ट में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग संबंधी याचिका भी विचाराधीन है. मृतका के पिता का कहना है कि इस मामले की जांच केवल सामान्य प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसकी निष्पक्ष और गहन जांच आवश्यक है. उन्होंने इस पूरे प्रकरण को भोपाल के चर्चित त्विषा शर्मा मामले से जोड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच की आवश्यकता पर भी जोर दिया है.
परिजनों का आरोप है कि कविता दक्षिणामूर्ति का विवाह 2 मार्च 2025 को सेना के मेजर एम. नागार्जुन से हुआ था, लेकिन विवाह के महज तीन महीने बाद 10 जून 2025 को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई. मृतका के पिता ने पति एम. नागार्जुन, ससुर ओम पी. गणपति और सास ओम प्रेमलता पर दहेज प्रताड़ना और हत्या के गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि विवाह के समय 100 तोला सोना, 20 लाख रुपये का हीरों का हार और अन्य महंगे उपहार दिए गए थे.
सुनवाई के दौरान सबसे अहम मुद्दा घटना के बाद चिकित्सा सहायता मिलने में हुई देरी को लेकर उठा. याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि यदि कविता बाथरूम में गिर गई थीं और उनकी स्थिति गंभीर थी, तो उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया जाना चाहिए था. जबकि रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें अस्पताल पहुंचाने में दो घंटे 39 मिनट का समय लगा, जबकि मिलिट्री अस्पताल गेस्ट हाउस से केवल पांच मिनट की दूरी पर स्थित था. परिजनों का कहना है कि यही देरी पूरे मामले को संदेहास्पद बनाती है और इसकी विस्तृत जांच जरूरी है.
मृतका के परिजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए हैं, जिसमें मृत्यु का कारण हार्ट अटैक बताया गया है. उनका कहना है कि घटनाक्रम, परिस्थितियां और समय-सीमा कई ऐसे प्रश्न खड़े करती हैं जिनका स्पष्ट उत्तर अभी तक सामने नहीं आया है. इसी आधार पर पुनरीक्षण याचिका में एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई है.
फिलहाल मामला न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों स्तरों पर विचाराधीन है. ऐसे में सभी की निगाहें आगामी सुनवाई और संभावित जांच पर टिकी हैं. अदालत के आगामी निर्देश और जांच एजेंसियों की कार्रवाई से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कविता दक्षिणामूर्ति की मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और मामले में आगे किस दिशा में कानूनी प्रक्रिया बढ़ेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

