जबलपुर. एमपी के कटनी में करीब 2000 करोड़ रुपए की लागत से बन रही बरगी डायवर्जन प्रोजेक्ट की स्लीमनाबाद टनल को लेकर एक और खुलासा हुआ है. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आपत्तियों के बाद अब आरोप लगे हैं कि टर्न-की अनुबंध होने के बावजूद नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने परियोजना में दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को तकनीकी सलाहकार के रूप में जोड़कर 59 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया.
आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा ने आरोप लगाया है कि यह भुगतान अनुबंध की मूल शर्तों के खिलाफ किया गया. मामले की शिकायत लोकायुक्त, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक पहुंच चुकी है. बरगी डायवर्जन परियोजना की शुरुआत साल 2008 में करीब 800 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से हुई थी. निर्माण के दौरान तकनीकी समस्याओं, देरी और अतिरिक्त काम के चलते परियोजना की लागत बढ़ते-बढ़ते अब करीब 2000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है.
इसी परियोजना में पटेल-एसईडब्ल्यू जेवी कंपनी के साथ टर्न-की अनुबंध किया गया था. ऐसे अनुबंध में परियोजना से जुड़े अधिकांश तकनीकी और वित्तीय जोखिम ठेकेदार की जिम्मेदारी होते हैं. आरटीआई एक्टिविस्ट नीरज मिश्रा का आरोप है कि टर्न-की अनुबंध होने के बावजूद साल 2021 में ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के साथ एमओयू कर उसे टेक्निकल कंसलटेंट बना लिया. शिकायत के अनुसार, तकनीकी अनुशंसाओं के आधार पर ठेकेदार को डिवाटरिंग (पानी निकासी), केमिकल ग्राउटिंग और टनल बोरिंग मशीन की मरम्मत जैसे कामों के लिए करोड़ों रुपए का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जबकि अनुबंध के अनुसार इनका खर्च ठेकेदार को ही वहन करना था.
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