एमपी के 1895 सरकारी स्कूलों में नहीं है एक भी टीचर, कैग की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका

एमपी के 1895 सरकारी स्कूलों में नहीं है एक भी टीचर, कैग की रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका

प्रेषित समय :14:40:26 PM / Wed, Jul 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट में सरकारी स्कूलों में टीचरोंं की कमी को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. इंदौर निवासी सौरभ त्रिपाठी ने 2025 की कैग (सीएजी) रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि प्रदेश के 1,895 शासकीय शालाओं में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, जिससे लाखों बच्चों का शिक्षा का मौलिक अधिकार प्रभावित हो रहा है. मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने मंगलवार को राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

याचिकाकर्ता सौरभ त्रिपाठी ने याचिका में कहा कि प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्थाओं से जूझ रही है. वर्ष 2025 की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार 7 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बजट होने के बावजूद हजारों स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. इससे बच्चों के शिक्षा के संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन हो रहा है. मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की. अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. सरकार से शिक्षक नियुक्ति, बजट के उपयोग और कैग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत जवाब मांगा गया है.

परीक्षा परिणामों पर भी पड़ा असर-

याचिका में कहा गया है कि शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का असर छात्रों के परीक्षा परिणामों पर भी साफ दिखाई देता है. सत्र 2018-19 में हाईस्कूल का पास प्रतिशत 67.74 प्रतिशत था, जो 2021-22 में घटकर 38.53प्रतिशत रह गया.

अब सरकार को देना होगा जवाब-

प्राथमिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. अब सरकार को अदालत के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि शिक्षक नियुक्तियों, बजट खर्च और सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-