एमपी हाईकोर्ट ने 3 राज्यों के डीजीपी को किया तलब, साइबर ठगी मामले में कहा, पुलिस अगर तेज नहीं चलेगी तो हर बार बच निकलेंगे अपराधी

एमपी हाईकोर्ट ने 3 राज्यों के डीजीपी को किया तलब, साइबर ठगी मामले में कहा, पुलिस अगर तेज नहीं चलेगी तो हर बार बच निकलेंगे अपराधी

प्रेषित समय :14:36:08 PM / Wed, Jul 15th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. देश में बढ़ते साइबर ठगी के मामलों और जांच में हो रही देरी पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. जबलपुर की एक बुजुर्ग महिला से 6.24 लाख रुपए की साइबर ठगी के मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) को 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं.

कोर्ट ने गृह मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और दूरसंचार विभाग को भी पक्षकार बनाने का आदेश दिया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध की जांच में हर सेकेंड महत्वपूर्ण होता है और रियल टाइम समन्वय के बिना अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है. जबलपुर के गोरा बाजार निवासी और बैंक से सेवानिवृत्त चैताली मित्रा ने याचिका दायर कर बताया कि क्रेडिट कार्ड अपडेट कराने के नाम पर उनसे 6.24 लाख रुपए की साइबर ठगी हुई. उन्होंने स्थानीय थाना और एसपी स्तर तक शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण ली.

कोर्ट की टिप्पणी- हर सेकेंड अहम, नहीं तो आरोपी बच निकलेंगे-

जस्टिस हिमांशु जोशी की कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराध की जांच में समय सबसे बड़ा कारक है. यदि पुलिस तेजी से कार्रवाई नहीं करेगी तो अपराधी हर बार बच निकलेंगे. कोर्ट ने राज्यों और संबंधित विभागों के बीच रियल टाइम जांच तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई.

एसपी ने बताई जांच में आने वाली दिक्कतें-

29 जून 2026 के आदेश के पालन में जबलपुर एसपी संपत उपाध्याय, साइबर थाना प्रभारी भूपेंद्र अरमो और गोरा बाजार थाना प्रभारी संजीव कुमार त्रिपाठी कोर्ट में पेश हुए. एसपी ने बताया कि शिकायत मिलते ही मामला साइबर सेल को भेज दिया गया था, लेकिन अलग-अलग बैंकों की नोडल एजेंसियों से जानकारी जुटाने में तीन से पांच दिन लग जाते हैं. कई मामलों में दूसरे राज्यों की पुलिस से भी सहयोग लेना पड़ता है, जिससे जांच और धीमी हो जाती है.

टेलीग्राम और फर्जी खातों का इस्तेमाल कर रहे अपराधी-

कोर्ट को बताया गया कि साइबर अपराधी अब मासूम लोगों के नाम पर खोले गए बैंक खातों का उपयोग कर रहे हैं और आपसी संपर्क के लिए टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. आरोपियों तक पहुंचने के लिए आईपी लॉग, सब्सक्राइबर डिटेल और अन्य तकनीकी जानकारी विभिन्न एजेंसियों से लेनी पड़ती है. इस प्रक्रिया में देरी होने तक आरोपी स्थान बदल लेते हैं, रकम निकाल लेते हैं और इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी मिटा देते हैं.

मुख्य संदिग्ध असम में, डीजीपी को बनाया पक्षकार

जबलपुर पुलिस ने कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान मुख्य संदिग्ध की लोकेशन असम में मिली है. इस पर याचिकाकर्ता के वकील ने असम के डीजीपी को भी प्रतिवादी बनाने का अनुरोध किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. हाईकोर्ट ने भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले स्टैंडिंग काउंसिल और क्रक्चढ्ढ के अधिवक्ता को आदेश की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि वे आवश्यक निर्देश लेकर अगली सुनवाई में कोर्ट की सहायता कर सकें. कोर्ट ने गृह मंत्रालय, और दूरसंचार विभाग को भी मामले में पक्षकार बनाया है.

21 जुलाई को पेश होंगे तीन राज्यों के डीजीपी-

हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल, झारखंड और असम के डीजीपी को 21 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जांच की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई इसी दिन होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-