रायपुर. महादेव ऑनलाइन बुक बेटिंग ऐप से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए रायपुर स्थित धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की विशेष अदालत ने ईबिक्स (EBIX) के चेयरमैन विकास गर्ग को 24 जुलाई तक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में भेज दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की प्रभावी जांच, कथित अपराध से अर्जित धन का पता लगाने, पूरे षड्यंत्र की परतें खोलने तथा अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच के लिए विकास गर्ग से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। अदालत ने माना कि ईडी ने प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री प्रस्तुत की है, जिससे गिरफ्तारी और रिमांड को उचित ठहराया जा सकता है।
ईडी ने विशेष अदालत के समक्ष दलील दी कि विकास गर्ग की कथित भूमिका केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि वह पूरे आर्थिक अपराध की कड़ियों को जोड़ने में महत्वपूर्ण हो सकती है। एजेंसी के अनुसार, पूछताछ के दौरान उन्हें पहले से एकत्र किए गए साक्ष्यों, बैंकिंग लेन-देन, वित्तीय दस्तावेजों तथा पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज विभिन्न व्यक्तियों के बयानों से आमने-सामने कराया जाना आवश्यक है। ईडी का कहना है कि जांच अभी प्रारंभिक नहीं बल्कि महत्वपूर्ण चरण में है और कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनकी पुष्टि हिरासत में पूछताछ के बिना संभव नहीं है।
विशेष अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि विकास गर्ग की गिरफ्तारी और उन्हें अदालत के समक्ष पेश किए जाने की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप अपनाई गई है। अदालत ने बचाव पक्ष की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि गिरफ्तारी अवैध थी तथा आरोपी को निर्धारित 24 घंटे की अवधि के भीतर सक्षम न्यायालय में पेश नहीं किया गया। अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों और घटनाक्रम का परीक्षण करने के बाद कहा कि विकास गर्ग को नई दिल्ली से गिरफ्तार किए जाने के बाद पहले ट्रांजिट रिमांड के लिए सक्षम अदालत में प्रस्तुत किया गया और उसके बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। इसलिए गिरफ्तारी या न्यायिक प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई।
सुनवाई के दौरान विकास गर्ग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधव खुराना और अधिवक्ता मकबूल फ्राज ने ईडी की रिमांड याचिका का विरोध किया। बचाव पक्ष का कहना था कि उनके मुवक्किल के विरुद्ध कोई ऐसा प्रत्यक्ष या ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता सिद्ध होती हो। उन्होंने अदालत को बताया कि विकास गर्ग पहले भी जांच में तीन बार शामिल हो चुके हैं और ईडी द्वारा मांगे गए सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा चुके हैं। उनका तर्क था कि जब आरोपी जांच में सहयोग कर रहा है, तब हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके अतिरिक्त उन्होंने गिरफ्तारी की वैधता पर भी सवाल उठाए और दावा किया कि कानूनी प्रक्रिया का पूर्ण पालन नहीं किया गया। हालांकि, अदालत ने इन सभी दलीलों को रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर अस्वीकार कर दिया।
अदालत ने विकास गर्ग को 24 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेजते हुए एजेंसी को यह भी निर्देश दिया कि हिरासत के दौरान आरोपी के सभी संवैधानिक और मानवाधिकारों का पूर्ण सम्मान किया जाए। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि पूछताछ के दौरान किसी प्रकार का शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। यदि आरोपी को किसी प्रकार के चिकित्सकीय उपचार या नियमित दवाओं की आवश्यकता हो तो वह समय पर उपलब्ध कराई जाएं तथा चिकित्सकों की सलाह के अनुसार भोजन और अन्य सुविधाएं भी सुनिश्चित की जाएं।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने विकास गर्ग को 14 जुलाई को नई दिल्ली स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसी दिन उन्हें दिल्ली की तीस हजारी अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय शंकर के समक्ष पेश किया गया। ईडी ने अदालत से 48 घंटे के ट्रांजिट रिमांड की मांग की थी ताकि आरोपी को रायपुर लाकर विशेष पीएमएलए अदालत में प्रस्तुत किया जा सके। हालांकि, अदालत ने 48 घंटे के बजाय 24 घंटे का ट्रांजिट रिमांड मंजूर किया, जिसके बाद ईडी विकास गर्ग को रायपुर लेकर पहुंची और विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया।
दिल्ली की अदालत में सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक साइमन बेंजामिन ने कहा कि विकास गर्ग कथित महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जांच के दायरे में हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले की जांच के दौरान एकत्र किए गए वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर विकास गर्ग से हिरासत में पूछताछ आवश्यक हो गई है। ईडी ने अदालत को यह भी बताया कि विकास गर्ग से कथित रूप से जुड़ी लगभग 940 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां पहले ही अस्थायी रूप से कुर्क की जा चुकी हैं। इसके अलावा, इस बहुचर्चित मामले में रायपुर की विशेष अदालत के समक्ष अभियोजन शिकायतें दाखिल की जा चुकी हैं, जिनमें कुल 74 आरोपियों का उल्लेख है।
ईडी ने यह भी दावा किया कि विकास गर्ग को पहले कई बार समन जारी किए गए थे, लेकिन वह एजेंसी के समक्ष उपस्थित नहीं हुए, जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी आवश्यक हो गई। हालांकि एजेंसी ने यह स्वीकार किया कि विकास गर्ग का नाम मूल प्राथमिकी (एफआईआर) अथवा प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) में प्रारंभिक रूप से शामिल नहीं था, लेकिन जांच के दौरान सामने आए नए तथ्यों और वित्तीय दस्तावेजों के आधार पर उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई और इसी कारण उनसे हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता महसूस हुई।
दूसरी ओर, बचाव पक्ष ने दिल्ली की अदालत में यह भी तर्क दिया कि ईसीआईआर वर्ष 2022 में दर्ज हुई थी और उसके बाद विकास गर्ग कई बार जांच में शामिल हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि एजेंसी को कोई अतिरिक्त जानकारी चाहिए थी तो समन के माध्यम से भी पूछताछ की जा सकती थी और हिरासत में लेने की आवश्यकता नहीं थी। बचाव पक्ष ने अदालत से अनुरोध किया था कि ट्रांजिट रिमांड देने के बजाय विकास गर्ग को एक दिन की अंतरिम जमानत दी जाए और उनसे अगले दिन ईडी कार्यालय में उपस्थित होने का लिखित आश्वासन लिया जाए। लेकिन अदालत ने ईडी की दलीलों को अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर दिया।
महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप से जुड़ा मामला देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में कथित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क, उससे जुड़े वित्तीय लेन-देन, हवाला चैनलों, शेल कंपनियों और कथित अपराध से अर्जित धन के प्रवाह की जांच कर रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। फिलहाल विकास गर्ग 24 जुलाई तक ईडी की हिरासत में रहेंगे, जहां उनसे मामले के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। मामले की आगामी सुनवाई और जांच की प्रगति पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

