रायपुर. देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिलाने की नीति के बीच एक बेहद चौंकाने वाला कानूनी फैसला सामने आया है. रायपुर के उपभोक्ता फोरम (Consumer Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को ग्राहक को नई कार देने या करीब 20.5 लाख रुपये की पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया है. ई-20 ईंधन के कारण इंजन खराब होने पर ग्राहक के पक्ष में फैसला आने का यह देश का पहला मामला है.
क्या है पूरा मामला?
रायपुर के डॉ. प्रेमराज ने एक मारुति कार खरीदी थी. कोर्ट की सुनवाई में यह बात सामने आई कि कार का इंजन E-20 फ्यूल के अनुकूल (compatible) नहीं था, इसके बावजूद डीलर द्वारा ग्राहक को यह गाड़ी बेच दी गई. कार में E20 पेट्रोल डालने के बाद फ्यूल टैंक, पाइपलाइन और फिल्टर में दही जैसी सफेद परत जमने लगी. इसके बाद डैशबोर्ड पर इंजन खराबी की चेतावनी आई, ईवी मोड ने काम करना बंद कर दिया और कार का इंजन पूरी तरह ठप हो गया.
कंपनी ने वारंटी देने से किया था इनकार:
जब पीड़ित ने गाड़ी सर्विस सेंटर भेजी, तो कंपनी ने ई-मेल के जरिए सूचित किया कि इंजन पूरी तरह से नष्ट हो चुका है. इसे बदलने में 5.30 लाख रुपये का खर्च आएगा, जिसे वारंटी के दायरे से बाहर बता दिया गया. कंपनी द्वारा गाड़ी दोबारा ठीक करके देने के बाद भी डीलरशिप से महज 10 किलोमीटर दूर जाकर कार फिर से बंद हो गई. कंपनी द्वारा रिप्लेसमेंट या रिफंड से मना करने के बाद डॉक्टर ने मार्च 2025 में उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया था.
कंज्यूमर कोर्ट का सख्त आदेश: उपभोक्ता अदालत ने माना कि यह सीधे तौर पर सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का मामला है. कोर्ट ने कंपनी को 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है कि वे ग्राहक को उसी मॉडल की नई कार सौंपे जो E-20 फ्यूल सपोर्ट करती हो. ऐसा न करने की स्थिति में कंपनी को वाहन की पूरी कीमत (20.5 लाख रुपये) ब्याज और अन्य अदालती खर्चों के साथ लौटानी होगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

