ई20 ईंधन विवाद में मारुति सुजुकी को बड़ा झटका, रायपुर उपभोक्ता आयोग के आदेश को हाईकोर्ट में देगी चुनौती

ई20 ईंधन विवाद में मारुति सुजुकी को बड़ा झटका, रायपुर उपभोक्ता आयोग के आदेश को हाईकोर्ट में देगी चुनौती

प्रेषित समय :21:48:20 PM / Thu, Jul 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. देश की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के उस आदेश को चुनौती देने का फैसला किया है, जिसमें कंपनी को एक ग्राहक की कार बदलकर नई ई20 ईंधन अनुकूल (E20 Compatible) कार देने का निर्देश दिया गया है. कंपनी का कहना है कि विवादित वाहन पहले से ही ई20 ईंधन के उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त था और आयोग के आदेश में कई महत्वपूर्ण तथ्यों पर पर्याप्त विचार नहीं किया गया. कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह कानून के तहत उचित उच्च न्यायिक मंच पर इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करेगी.

मारुति सुजुकी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि संबंधित वाहन ई20 पेट्रोल के अनुरूप तैयार किया गया था और इसकी जानकारी वाहन के मालिक को दिए गए यूजर मैनुअल में भी स्पष्ट रूप से दर्ज थी. कंपनी के अनुसार वाहन के इंजन में आई समस्या का कारण ई20 ईंधन नहीं बल्कि ईंधन में मौजूद संदूषण (कंटैमिनेशन) हो सकता है. कंपनी ने दावा किया कि जांच के दौरान वाहन से लिए गए ईंधन के नमूने में अशुद्धियां मिलने के प्रमाण मौजूद हैं, लेकिन आयोग के आदेश में इन तथ्यों का समुचित उल्लेख नहीं किया गया.

कंपनी ने कहा कि वह उत्पाद की गुणवत्ता, सुरक्षा और ग्राहकों की संतुष्टि के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. मारुति सुजुकी के अनुसार उसके सभी वाहन मजबूत इंजीनियरिंग मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण और आधुनिक तकनीकी प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार किए जाते हैं. इसी विश्वास के साथ कंपनी इस मामले में अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करेगी.

इससे पहले रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा था कि संबंधित वाहन का इंजन ई20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं था, जिसके कारण इंजन को गंभीर नुकसान पहुंचा. आयोग ने वाहन निर्माता कंपनी और डीलर दोनों को सेवा में कमी का दोषी माना और आदेश दिया कि ग्राहक को नई ई20 अनुकूल कार उपलब्ध कराई जाए. यदि कंपनी नई कार उपलब्ध नहीं कराती है तो उसे वाहन की पूरी खरीद कीमत 20.50 लाख रुपये वापस करनी होगी.

आयोग ने इसके अलावा ग्राहक को मानसिक उत्पीड़न के लिए एक लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया है. आदेश में कहा गया है कि यह राशि 45 दिनों के भीतर अदा की जाए. यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो देय राशि पर सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में ई20 पेट्रोल के व्यापक उपयोग को लेकर चर्चा जारी है. केंद्र सरकार वाहनों में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के उपयोग को बढ़ावा दे रही है. सरकार का कहना है कि इस नीति को लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया था. सरकार का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण में कमी लाना और इथेनॉल उत्पादन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाना है.

हालांकि ई20 ईंधन को लेकर कुछ वाहन मालिकों और उपभोक्ता संगठनों ने वाहन अनुकूलता, इंजन की कार्यक्षमता और पेट्रोल पंपों पर विकल्पों की उपलब्धता को लेकर चिंता भी जताई है. इसी कारण यह मामला केवल एक उपभोक्ता विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि ई20 ईंधन नीति और वाहनों की तकनीकी अनुकूलता पर भी नई बहस छेड़ दी है.

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मारुति सुजुकी उच्च न्यायिक मंच पर क्या तर्क रखती है और आगे इस मामले में अदालत क्या फैसला सुनाती है. यह निर्णय भविष्य में ई20 ईंधन से जुड़े उपभोक्ता विवादों और वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारियों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-