नई दिल्ली। देशभर में सक्रिय अवैध घुसपैठ नेटवर्क के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र समेत 13 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई। ईडी का दावा है कि यह संगठित नेटवर्क बांग्लादेशी और रोहिंग्या नागरिकों की भारत में अवैध घुसपैठ कराने, उन्हें फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने और देश के विभिन्न हिस्सों में बसाने के साथ रोजगार दिलाने तक का पूरा इंतजाम करता था।
ईडी के अनुसार जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का संचालन कई राज्यों में फैले अलग-अलग समूहों के माध्यम से किया जा रहा था। सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय गिरोह अवैध रूप से लोगों को भारत में प्रवेश दिलाते थे, जबकि दूसरा नेटवर्क उनके लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कर उनकी नई पहचान स्थापित करता था। इसके बाद उन्हें विभिन्न राज्यों में भेजकर रोजगार और रहने की व्यवस्था कराई जाती थी।
ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छापेमारी पश्चिम बंगाल के कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और मुर्शिदाबाद, हरियाणा के बल्लभगढ़, उत्तर प्रदेश के देवबंद, दिल्ली के बाटला हाउस, जामिया नगर और ओखला तथा महाराष्ट्र के रायगढ़ सहित कुल 13 स्थानों पर की गई। कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण, संदिग्ध दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं, जिनकी विस्तृत जांच की जा रही है।
जांच एजेंसी ने उत्तर 24 परगना स्थित हरोरा अल जमैतुल इस्लामिया दारूल उलूम और लखनऊ स्थित उसके क्षेत्रीय कार्यालय पर भी छापेमारी की। लखनऊ कार्यालय से 40 लाख रुपये नकद और 180 ग्राम सोने के सिक्के बरामद किए गए। ईडी का कहना है कि मौके पर मौजूद लोग इस नकदी और सोने के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। बरामद संपत्ति के स्रोत और उपयोग की जांच की जा रही है।
ईडी के अनुसार प्रारंभिक जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत पंजीकृत थे और उन्हें ब्रिटेन की कुछ संस्थाओं से धन प्राप्त हुआ था। आरोप है कि इसी धन का उपयोग अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों को बसाने में किया जाता था। जांच एजेंसी के अनुसार घुसपैठियों को छह हजार, आठ हजार और दस हजार रुपये की छोटी-छोटी किश्तों में आर्थिक सहायता दी जाती थी, जिससे वे देश में स्थायी रूप से बस सकें और अपनी गतिविधियां शुरू कर सकें।
ईडी का कहना है कि नेटवर्क पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था। एक समूह सीमा पार से लोगों की घुसपैठ कराता था, दूसरा फर्जी दस्तावेज तैयार करता था और तीसरा उन्हें विभिन्न राज्यों में भेजकर रोजगार एवं रहने की व्यवस्था सुनिश्चित करता था। इस पूरे नेटवर्क के बीच लगातार समन्वय बना रहता था और प्रत्येक समूह की अलग-अलग जिम्मेदारी तय थी।
फिलहाल ईडी ने कई संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है और बरामद डिजिटल साक्ष्यों का फॉरेंसिक विश्लेषण कराया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क से जुड़े कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। अधिकारियों के अनुसार पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आने वाले दिनों में कई और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब केंद्र सरकार अवैध घुसपैठ और उससे जुड़े संगठित नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई कर रही है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमावर्ती जिलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर अवैध घुसपैठ रोकने और ऐसे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे। ईडी की ताजा कार्रवाई को उसी व्यापक अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

