हाईकोर्ट ने टोल कंपनी को दिए निर्देश, गाड़ी मालिकों-ट्रांसपोर्टस को लौटाना होंगे 11 करोड़ रुपए

हाईकोर्ट ने टोल कंपनी को दिए निर्देश, गाड़ी मालिकों-ट्रांसपोर्टस को लौटाना होंगे 11 करोड़ रुपए

प्रेषित समय :18:12:59 PM / Sat, Jul 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रुसिया व जस्टिस प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने भोपाल-देवास फोरलेन पर फास्टैग के जरिए तीन एक्सल बसों से अधिक टोल वसूली को अवैध ठहराया है. कोर्ट ने टोल कंपनी को करीब 11 करोड़ रुपये प्रभावित वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों को लौटाने के निर्देश दिए हैं.

कोर्ट ने मेसर्स देवास-भोपाल कारिडोर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका खारिज करते हुए एमपी रोड डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआरडीसी) के 21 मई, 2025 के आदेश को बरकरार रखा. कंपनी पर 25 हजार रुपये की लागत (कास्ट) भी लगाई गई, जिसे मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा करना होगा. कंपनी का तर्क था कि फास्टैग सिस्टम में तीन एक्सल बसों को तकनीकी रूप से मल्टी एक्सल वाहन की श्रेणी में दर्ज किए जाने के कारण अधिक टोल स्वत: कटता रहा, इसलिए उसकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.

हाई कोर्ट ने यह दलील खारिज करते हुए कहा कि फास्टैग केवल भुगतान का माध्यम है, टोल की दर या वाहन की श्रेणी तय करने का अधिकार उसे नहीं है. टोल हमेशा रियायत समझौते और सरकारी अधिसूचना के अनुसार ही वसूला जाएगा. खंडपीठ ने 30 जून, 2007 के रियायत समझौते का हवाला देते हुए कहा कि उसमें बस और मल्टी एक्सल ट्रक की अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित हैं. यदि साफ्टवेयर की गलत मैपिंग के कारण अधिक टोल वसूला गया तो इसकी जिम्मेदारी टोल संचालक की होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अप्रैल, 2022 से जिन भी वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों से अतिरिक्त राशि वसूली गई है, सभी को रिफंड दिया जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-