जबलपुर की बेटी ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला, पति पीयूष समेत तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार

जबलपुर की बेटी ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला, पति पीयूष समेत तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार

प्रेषित समय :19:01:11 PM / Tue, Jul 21st, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. जबलपुर की बेटी ज्योति उर्फ पूजा नाग्देव के बहुचर्चित हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषी पति पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू की अपीलें खारिज कर दी हैं. सर्वोच्च अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए तीनों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी है. वहीं, मनीषा मखीजा को हाई कोर्ट द्वारा संदेह का लाभ देते हुए दी गई दोषमुक्ति को भी सुप्रीम कोर्ट ने कायम रखा है. इस फैसले के साथ करीब एक दशक पुराने चर्चित हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया अपने अंतिम चरण पर पहुंच गई है.

यह मामला 27 जुलाई 2014 की रात का है. जबलपुर के उद्योगपति शंकर नाग्देव की बेटी ज्योति उर्फ पूजा, अपने पति पीयूष श्यामदासानी के साथ कानपुर के स्वरूप नगर स्थित एक होटल से लौट रही थीं. पीयूष ने पुलिस को सूचना दी थी कि कुछ बाइक सवार बदमाशों ने उनकी कार रोककर हमला किया और कार लेकर फरार हो गए, जिसमें उनकी पत्नी भी मौजूद थीं. हालांकि पुलिस जांच में यह कहानी झूठी साबित हुई. बाद में कल्याणपुर-पनकी रोड पर खड़ी कार से ज्योति का शव बरामद हुआ. पोस्टमार्टम और जांच में सामने आया कि उनकी चाकू से गोदकर हत्या की गई थी.

मामले की जांच के बाद पुलिस ने पीयूष श्यामदासानी, मनीषा मखीजा, ड्राइवर अवधेश, रेनू उर्फ अखिलेश, सोनू और आशीष कश्यप को आरोपी बनाया. कानपुर की सत्र अदालत ने 20 अक्टूबर 2022 को पीयूष समेत अन्य आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद सभी दोषियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दायर की. 29 नवंबर 2024 को हाई कोर्ट ने अधिकांश दोषियों की सजा बरकरार रखते हुए मनीषा मखीजा को साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था.

हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ पीयूष श्यामदासानी, रेनू उर्फ अखिलेश और सोनू सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जबकि मनीषा मखीजा की दोषमुक्ति को चुनौती देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने भी विशेष अनुमति याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के निर्णय को पूरी तरह सही ठहराया और दोषियों की अपीलें खारिज कर दीं.

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि ज्योति की हत्या पूर्व नियोजित साजिश के तहत की गई थी और उपलब्ध परिस्थितिजन्य साक्ष्य सभी आरोपितों की भूमिका को सिद्ध करते हैं. वहीं, अपीलकर्ताओं की ओर से कहा गया कि उनके खिलाफ ठोस प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं और केवल कॉल रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें साजिशकर्ता बताया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाई कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों का समुचित मूल्यांकन किया था और उसके निर्णय में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है.

ज्योति नाग्देव का विवाह वर्ष 2012 में कानपुर के बिस्किट कारोबारी ओमप्रकाश श्यामदासानी के पुत्र पीयूष श्यामदासानी से हुआ था. विवाह के कुछ समय बाद दोनों के संबंधों में तनाव की बात सामने आई थी. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पीयूष और मनीषा मखीजा के संबंधों को लेकर विवाद चल रहा था, जिसे अभियोजन ने हत्या के संभावित कारणों में शामिल किया था.

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जबलपुर की बेटी ज्योति को न्याय दिलाने की दिशा में अहम पड़ाव माना जा रहा है. करीब दस वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद सर्वोच्च अदालत ने हाई कोर्ट के निर्णय पर मुहर लगाते हुए तीन दोषियों की उम्रकैद बरकरार रखी है, जबकि मनीषा मखीजा की दोषमुक्ति भी यथावत रखी गई है. यह फैसला लंबे समय से इस मामले के अंतिम न्यायिक निष्कर्ष का इंतजार कर रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-