विधानसभा में गूंजा केसीसी घोटाला 11 साल बाद खुली फाइल, फर्जी किसानों को ऋण देने के मामले में जांच तेज

विधानसभा में गूंजा केसीसी घोटाला 11 साल बाद खुली फाइल, फर्जी किसानों को ऋण देने के मामले में जांच तेज

प्रेषित समय :16:19:17 PM / Thu, Jul 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. किसानों को कम ब्याज पर कृषि कार्यों के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) योजना में जबलपुर जिले की निरंतपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में कथित बड़े फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. वर्ष 2015 में पात्रता के बिना लोगों को किसान बताकर लाखों रुपये का केसीसी ऋण स्वीकृत किए जाने के आरोपों पर करीब 11 वर्षों तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. अब विधानसभा में मामला गूंजने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जबलपुर ने पूरे प्रकरण की पुनः जांच शुरू कर दी है और तीन सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी गई है. प्रारंभिक जांच में कई गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और तत्कालीन समिति प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है.

जानकारी के अनुसार किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य वास्तविक किसानों को खेती के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे साहूकारों पर निर्भर न रहें और कम ब्याज दर पर कृषि कार्य कर सकें. लेकिन निरंतपुर प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में इस योजना के तहत ऐसे लोगों को ऋण स्वीकृत करने का आरोप है, जो किसान की पात्रता ही नहीं रखते थे. आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और गलत अभिलेखों के आधार पर ऋण स्वीकृत किए गए, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ.

दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2015 में आठ लोगों को लगभग 18 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड ऋण स्वीकृत किया गया था. बाद में हुई प्रारंभिक जांच में सामने आया कि इन आठ लाभार्थियों में से सात व्यक्ति किसान नहीं थे, फिर भी उन्हें किसान दर्शाकर ऋण का लाभ दिलाया गया. इस खुलासे के बाद शिकायतें भी दर्ज कराई गईं और जांच शुरू हुई, लेकिन आरोप है कि मामला आगे बढ़ाने के बजाय फाइलों में दबा दिया गया. कई वर्षों तक न तो दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई हुई और न ही ऋण वितरण प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की पूरी तरह जांच की गई.

बताया जाता है कि वर्ष 2023 में यह प्रकरण बैंक की जांच शाखा को सौंपा गया था. हालांकि उस समय तैयार की गई जांच रिपोर्ट को "अपूर्ण और अस्पष्ट" बताते हुए मामले को आगे नहीं बढ़ाया गया. इसके बाद भी प्रकरण लंबे समय तक ठंडे बस्ते में पड़ा रहा. इस दौरान कथित रूप से फर्जी तरीके से वितरित किए गए ऋण की प्रभावी वसूली भी नहीं हो सकी. इससे यह सवाल लगातार उठता रहा कि जब प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिल चुके थे, तब जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की.

मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदु ने इसे विधानसभा में उठाया. विधानसभा में प्रश्न पूछे जाने के बाद जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित, जबलपुर को पूरे प्रकरण पर जवाब देना पड़ा. बैंक ने स्वीकार किया कि पहले की जांच संतोषजनक नहीं थी और अब विस्तृत एवं निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है. इसके बाद बैंक प्रशासन ने आनन-फानन में जांच प्रक्रिया शुरू कर दी.

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति में बैंक के चीफ मैनेजर, शाखा प्रबंधक और मार्केटिंग अधिकारी को शामिल किया गया है. समिति को सभी ऋण प्रकरणों के दस्तावेजों की जांच, पात्रता के सत्यापन, ऋण स्वीकृति प्रक्रिया की समीक्षा तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका का परीक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. जांच समिति से अपेक्षा की गई है कि वह पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी.

नई जांच में तत्कालीन समिति प्रबंधक रमेश सोनी तथा तत्कालीन अध्यक्ष प्रहलाद पटेल की भूमिका भी जांच के घेरे में है. बैंक के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जांच पूरी होने तक सेवानिवृत्त प्रबंधक रमेश सोनी के अंतिम भुगतान पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. वहीं तत्कालीन अध्यक्ष के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई के लिए उपायुक्त सहकारिता, जबलपुर को पत्र भेजा गया है. इससे संकेत मिल रहे हैं कि जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

सूत्रों के अनुसार निरंतपुर सेवा सहकारी समिति में अनियमितताओं का दायरा केवल किसान क्रेडिट कार्ड ऋण तक सीमित नहीं है. धान और गेहूं की खरीदी, किसानों के भुगतान तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े वित्तीय लेन-देन में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आई हैं. जांच एजेंसियां इन सभी पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं. यदि इन मामलों में भी अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं तो कार्रवाई का दायरा और व्यापक हो सकता है.

करीब 11 वर्षों तक यह मामला दबा रहने को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं. शिकायतें समय पर दर्ज होने और प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियां सामने आने के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई, इसकी जवाबदेही भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है. सहकारिता व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर यह मामला अब गंभीर प्रशासनिक विषय बन गया है.

पनागर विधायक सुशील तिवारी इंदु ने आरोप लगाया कि आठ में से सात फर्जी किसानों को लगभग 18 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया और पूरे मामले को लंबे समय तक दबाए रखा गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति पर कथित फर्जीवाड़े का आरोप था, उसे बाद में समिति का प्रशासक बना दिया गया, जो पूरे मामले को और गंभीर बनाता है. विधायक ने कहा कि विधानसभा में मुद्दा उठने के बाद अब जांच शुरू हुई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित के मुख्य कार्यपालन अधिकारी नीतेश जिंदल ने पुष्टि की कि निरंतपुर सेवा सहकारी समिति में किसानों को दिए गए केसीसी ऋण से जुड़े मामलों की शिकायत प्राप्त हुई थी. प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिले थे, लेकिन अब विस्तृत जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित कर दी गई है. उन्होंने बताया कि समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

यह मामला केवल एक सहकारी समिति तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि सहकारिता प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है. किसान क्रेडिट कार्ड जैसी महत्वपूर्ण योजना का लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचे, इसके लिए निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई आवश्यक मानी जा रही है. अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी ऋण वितरण में किन-किन लोगों की भूमिका रही और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाएगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-