एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा आरक्षण तय करने का क्या आधार है, 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई

एमपी हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा आरक्षण तय करने का क्या आधार है, 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई

प्रेषित समय :17:52:56 PM / Thu, Jul 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े बहुचर्चित मामले में गुरुवार को सुनवाई सातवें दिन भी जारी रही. आज दोपहर 12 बजे से 1.30 बजे तक प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ के समक्ष ओबीसी आरक्षण के समर्थन में दायर याचिकाओं पर बहस हुई.

ओबीसी पक्ष ने सरकार की आरक्षण नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य आज तक यह स्पष्ट नहीं कर सका है कि विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत किस संवैधानिक, सामाजिक और प्रशासनिक आधार पर निर्धारित किया गया. बहस पूरी नहीं हो सकी. न्यायमूर्ति विनय सराफ की आगामी तिथियों पर अनुपलब्धता के कारण अब मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे होगी. एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस की ओर से याचिका में अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह ने दलील दी कि प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 15.6 प्रतिशत होने पर 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति की आबादी 21.01 प्रतिशत होने पर 20 प्रतिशत तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण निर्धारित है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग की आबादी लगभग 51 प्रतिशत होने के बावजूद उसे वर्षों तक केवल 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया. ऐसे में केवल ओबीसी आरक्षण का विरोध किया जाना समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है.

आरक्षण का निर्धारण संवैधानिक मानकों पर हो-

ओबीसी पक्ष ने कोर्ट से कहा कि सरकार अब तक यह नहीं बता सकी है कि विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण का प्रतिशत तय करने का आधार क्या था और पर्याप्त प्रतिनिधित्व का आकलन किस प्रकार किया गया. उनका कहना था कि आरक्षण का निर्धारण केवल जनसंख्या के अनुपात से नहीं, बल्कि संवैधानिक मानकों और वस्तुनिष्ठ आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए.

ईडब्ल्यूएस का उठा मुद्दा-

बहस के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) आरक्षण का मुद्दा भी उठा. ओबीसी पक्ष ने तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 15(6) और 16(6) के तहत ईडब्ल्यूएस आरक्षण सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर नागरिकों के लिए है, लेकिन मध्य प्रदेश में इसका लाभ केवल सामान्य वर्ग तक सीमित कर दिया गया है. यह भी दलील दी गई कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण को क्षैतिज के बजाय लंबवत लागू किए जाने से अन्य वर्गों के आरक्षण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है.

28 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

ओबीसी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर सहित अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र शाह, परमानंद साहू और अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा. अब इस बहुप्रतीक्षित मामले में ओबीसी पक्ष की शेष बहस 28 जुलाई को दोपहर 2.30 बजे जारी रहेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-