बाप-बेटे की मुलाकात के लिए तय किए सख्त नियम, कानपुर में सार्वजनिक स्थान पर होगी मुलाकात

बाप-बेटे की मुलाकात के लिए तय किए सख्त नियम, कानपुर में सार्वजनिक स्थान पर होगी मुलाकात

प्रेषित समय :16:16:08 PM / Thu, Jul 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. पति-पत्नी के बीच चल रहे वैवाहिक विवादों का सबसे अधिक असर अक्सर बच्चों पर पड़ता है. ऐसे मामलों में बच्चे के भावनात्मक और मानसिक हितों को सर्वोपरि मानते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम व्यवस्था लागू की है. हाई कोर्ट की युगलपीठ ने एक पिता को अपने ढाई वर्षीय बेटे से मिलने का अधिकार देते हुए मुलाकात की पूरी प्रक्रिया के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. अदालत ने न केवल मुलाकात की तारीख, समय और स्थान तय किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि मुलाकात के दौरान बच्चे को क्या खिलाया जाएगा, फोटो किस प्रकार ली जाएगी और पिता किन परिस्थितियों में बच्चे से मिल सकेंगे. अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि मुलाकात का माहौल पूरी तरह सहज, सुरक्षित और बच्चे के हितों के अनुरूप बना रहे.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह अंतरिम आदेश दोनों पक्षों की सहमति के आधार पर पारित किया. अदालत ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक विवादों के बीच किसी भी बच्चे का अपने माता-पिता दोनों से भावनात्मक जुड़ाव बना रहना आवश्यक है. इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए अदालत ने पिता को अपने पुत्र से मिलने की अनुमति दी, लेकिन इसके लिए कई महत्वपूर्ण शर्तें भी निर्धारित कीं ताकि बच्चे पर किसी प्रकार का मानसिक दबाव या असहजता न आए.

अदालत के आदेश के अनुसार रीवा निवासी विशाल, जिसका वास्तविक नाम इरशाद बताया गया है, अपने पुत्र से 26 जुलाई, 2 अगस्त, 9 अगस्त, 16 अगस्त और 23 अगस्त 2026 को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक मिल सकेंगे. मुलाकात का स्थान उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के कल्याणपुर क्षेत्र में कोई सार्वजनिक स्थान होगा. इसके लिए मॉल, पार्क अथवा रेस्तरां जैसे स्थानों का चयन किया जा सकता है. अदालत का मानना है कि सार्वजनिक स्थान पर मुलाकात होने से बच्चे की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी और दोनों पक्षों के बीच अनावश्यक विवाद की संभावना भी कम रहेगी.

हाई कोर्ट ने मुलाकात के दौरान बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह भी निर्देश दिया कि शुरुआती मुलाकातों में पिता केवल ब्रांडेड और पैक्ड खाद्य सामग्री ही बच्चे को खिलाएंगे. अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई ताकि भोजन को लेकर किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो और बच्चे के स्वास्थ्य से कोई समझौता न किया जाए. यह निर्देश इस बात का संकेत भी देता है कि अदालत हर छोटे-बड़े पहलू पर गंभीरता से विचार कर रही है.

अदालत ने पिता को अपने बेटे के साथ मोबाइल फोन से सेल्फी लेने की अनुमति भी प्रदान की है. हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया कि किसी तीसरे व्यक्ति से फोटो नहीं खिंचवाई जाएगी. अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मुलाकात केवल पिता और पुत्र के बीच भावनात्मक संबंधों को मजबूत करने तक सीमित रहे और इसे किसी प्रचार या विवाद का विषय न बनाया जाए. अदालत ने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि बच्चे की मां मुलाकात के दौरान कुछ समय के लिए पिता और पुत्र को निजी रूप से बातचीत करने का अवसर दें, ताकि दोनों के बीच स्वाभाविक संबंध विकसित हो सकें.

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पिता मुलाकात के दौरान अपने साथ पुलिस बल, निजी सुरक्षा गार्ड अथवा बाउंसर नहीं ले जाएंगे. अदालत का मानना है कि यदि मुलाकात के समय सुरक्षा कर्मियों की उपस्थिति रहेगी तो बच्चे के मन में भय अथवा असहजता उत्पन्न हो सकती है. इसलिए अदालत ने पूरी मुलाकात का वातावरण सामान्य, शांत और पारिवारिक बनाए रखने पर विशेष बल दिया है.

अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा कि पारिवारिक विवादों में सबसे अधिक प्रभावित बच्चे होते हैं. इसलिए ऐसे मामलों में न्यायालय का प्राथमिक दायित्व बच्चे के सर्वोत्तम हितों की रक्षा करना है. अदालत ने माना कि किसी भी बच्चे के समुचित मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए माता और पिता दोनों का स्नेह महत्वपूर्ण होता है. यदि परिस्थितियां अनुमति देती हैं तो बच्चे का दोनों अभिभावकों से संपर्क बना रहना चाहिए. अदालत का यह दृष्टिकोण बाल अधिकारों और बाल कल्याण से जुड़े स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के अनुरूप माना जा रहा है.

मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है. तब तक यह अंतरिम व्यवस्था दोनों पक्षों की सहमति से लागू रहेगी. अदालत आगामी सुनवाई के दौरान यह भी देखेगी कि निर्धारित व्यवस्था का पालन किस प्रकार हुआ और इससे बच्चे के हितों पर क्या प्रभाव पड़ा. यदि आवश्यक हुआ तो अदालत भविष्य में इस व्यवस्था में संशोधन या स्थायी आदेश भी पारित कर सकती है.

प्रकरण पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे वैवाहिक विवाद से जुड़ा है. पत्नी अनुक्रति पांडे उत्तर प्रदेश के कानपुर के पनकी स्थित कल्याणपुर क्षेत्र में रहती हैं. ढाई वर्षीय पुत्र वर्तमान में मां की अभिरक्षा में है. पिता का आरोप था कि वह अपने बेटे से नियमित रूप से नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनके और बच्चे के बीच भावनात्मक दूरी बढ़ रही है. इसी कारण उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने पुत्र से मिलने की अनुमति देने की मांग की. अनुक्रति पांडे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले की निवासी हैं.

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह आदेश केवल एक पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अनेक मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत देता है जिनमें पति-पत्नी के बीच मतभेद का सीधा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है. अदालत ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अभिभावकों के बीच विवाद चाहे जितना गंभीर क्यों न हो, बच्चे के भावनात्मक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती. न्यायालय ने संतुलित व्यवस्था बनाकर यह दिखाने का प्रयास किया है कि विवाद के बावजूद बच्चे का अपने दोनों माता-पिता से संबंध बनाए रखना उसके समग्र विकास के लिए आवश्यक है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का यह अंतरिम आदेश पारिवारिक न्यायशास्त्र के क्षेत्र में एक संवेदनशील और व्यावहारिक पहल के रूप में देखा जा रहा है. अदालत ने कानून के साथ मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बच्चे के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. अब सभी की निगाहें 9 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां अदालत इस व्यवस्था की प्रगति और उसके परिणामों की समीक्षा करेगी. तब तक पिता और पुत्र की मुलाकातें न्यायालय द्वारा तय किए गए नियमों और शर्तों के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर होती रहेंगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-