नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में गुरुवार शाम छात्र आंदोलन और नीट-यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर उस समय राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया, जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इंडिया गठबंधन के सांसदों और विपक्षी नेताओं के साथ गांधी स्मृति पहुंचने के लिए निकले. इस दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और रास्ते में बस खड़ी किए जाने को लेकर कांग्रेस और दिल्ली पुलिस आमने-सामने आ गए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को गांधी स्मृति जाने से रोकने की कोशिश की गई, जबकि पुलिस का कहना था कि क्षेत्र में लागू निषेधाज्ञा और सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर आवश्यक कदम उठाए गए थे.
राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों का यह मार्च उन छात्रों के प्रति श्रद्धांजलि और एकजुटता व्यक्त करने के लिए आयोजित किया गया था, जिनके बारे में कांग्रेस का दावा है कि उन्होंने नीट पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या की. इसके अलावा हाल के छात्र प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए छात्रों के समर्थन में भी विपक्ष गांधी स्मृति पहुंचना चाहता था. इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, पी. चिदंबरम, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, प्रमोद तिवारी, रेणुका चौधरी सहित इंडिया गठबंधन के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. एनसीपी (शरद पवार) की सुप्रिया सुले, राजद की मीसा भारती, तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोइत्रा और कल्याण बनर्जी, सीपीआई के पी. संतोष कुमार तथा शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत भी इस मार्च में मौजूद रहे.
विपक्षी सांसद पहले राहुल गांधी के सुनेहरी बाग रोड स्थित आवास पर एकत्र हुए. वहां से सभी नेता बसों में सवार होकर गांधी स्मृति के लिए रवाना हुए. कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि शुरुआत में पुलिस ने सुनेहरी बाग रोड पर बैरिकेड लगाकर उनके काफिले को आगे बढ़ने से रोक दिया. बाद में कुछ देर बाद बैरिकेड हटाए गए, लेकिन रास्ते में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आवास के पास एक बार फिर पुलिस ने काफिले को रोक लिया.
दिल्ली पुलिस ने नेताओं को रोकने के पीछे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला दिया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस क्षेत्र में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लागू है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए काफिले को कुछ समय के लिए रोका गया. बाद में आवश्यक औपचारिकताओं के बाद विपक्षी नेताओं को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी गई.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. बस के भीतर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष ने सबसे पहले छात्रों के समर्थन में इंडिया गेट जाने की अनुमति मांगी थी, लेकिन सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी. इसके बाद गांधी स्मृति जाने का निर्णय लिया गया, लेकिन वहां भी प्रशासन ने बस खड़ी कर दी और बैरिकेड लगाकर रास्ता रोकने की कोशिश की.
राहुल गांधी ने कहा कि यदि छात्र सड़कों पर न्याय की मांग कर रहे हैं तो विपक्ष का भी कर्तव्य है कि वह उनके साथ खड़ा हो. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और यह पूरा घटनाक्रम इसी का हिस्सा है. राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की इस कार्रवाई से यह संदेश जाता है कि वह छात्रों की आवाज उठाने वालों से घबराई हुई है.
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी एक विस्तृत संदेश साझा किया. उन्होंने लिखा कि इंडिया गठबंधन के सांसद और नेता शांतिपूर्वक गांधी स्मृति जा रहे हैं ताकि उन छात्रों को श्रद्धांजलि दे सकें, जिनकी जान नीट पेपर लीक विवाद के बाद चली गई. साथ ही उन छात्रों के साथ एकजुटता जताई जा सके, जो हाल के विरोध प्रदर्शनों के दौरान घायल हुए. उन्होंने कहा कि देश के छात्र अकेले नहीं हैं और पूरा विपक्ष उनकी न्याय तथा जवाबदेही की मांग के साथ खड़ा है.
दूसरी ओर कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि विपक्षी सांसद 25 मिनट से अधिक समय तक बसों में बैठे रहे क्योंकि दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए थे और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था. उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किस बात से डर रही है और इतनी भारी सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता क्यों महसूस हुई.
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के आवास के बाहर बैरिकेड लगाकर उन्हें प्रभावी रूप से "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया. भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने कहा कि केंद्र सरकार विपक्ष के नेता को छात्रों की आवाज उठाने से रोकना चाहती है. वहीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है और वह छात्रों के मुद्दे को लगातार उठाती रहेगी.
दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से नीट-यूजी पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हुई हैं. विपक्ष सरकार पर परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने में विफल रहने का आरोप लगा रहा है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि मामले की जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं.
गांधी स्मृति मार्च को लेकर हुए इस घटनाक्रम ने राजधानी की राजनीति को और गर्म कर दिया है. एक ओर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में बाधा बताकर सरकार पर हमला बोल रहे हैं, वहीं प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है. ऐसे में छात्र आंदोलन, नीट विवाद और विपक्ष के विरोध कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

