हाईवे पर सफर होगा सस्ता, पुल, सुरंग और फ्लाईओवर वाले मार्गों पर टोल शुल्क घटाएगा एनएचएआई

हाईवे पर सफर होगा सस्ता, पुल, सुरंग और फ्लाईओवर वाले मार्गों पर टोल शुल्क घटाएगा एनएचएआई

प्रेषित समय :20:18:43 PM / Fri, Jul 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों को जल्द ही टोल शुल्क में राहत मिलने वाली है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने केंद्र सरकार के संशोधित नियमों के तहत पुल, सुरंग, फ्लाईओवर और एलिवेटेड हाईवे वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल शुल्क की नई गणना प्रक्रिया लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है. नए नियम लागू होने के बाद ऐसे मार्गों पर पहले की तुलना में कम टोल देना पड़ सकता है.

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 1 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क (दर निर्धारण एवं संग्रह) नियम, 2008 में संशोधन किया था. इसी संशोधन के आधार पर एनएचएआई ने शुक्रवार को अपने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश जारी किए हैं कि वे संशोधित फार्मूले के अनुसार टोल अधिसूचनाओं और शुल्क संशोधन की प्रक्रिया शुरू करें.

नए नियम के अनुसार यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्वतंत्र पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड हाईवे मौजूद हैं, तो टोल की गणना दो अलग-अलग तरीकों से की जाएगी. पहले तरीके में इन संरचनाओं की कुल लंबाई का दस गुना और शेष सामान्य सड़क की लंबाई को जोड़कर शुल्क योग्य दूरी तय की जाएगी. दूसरे तरीके में पूरे राजमार्ग खंड की कुल लंबाई का पांच गुना माना जाएगा. इन दोनों में जो दूरी कम होगी, उसी के आधार पर टोल शुल्क निर्धारित किया जाएगा. 60 मीटर या उससे कम लंबाई वाली संरचनाओं को इस गणना में अलग श्रेणी में नहीं रखा जाएगा.

पहले लागू व्यवस्था में पुल, सुरंग या फ्लाईओवर की लंबाई का दस गुना तक शुल्क योग्य दूरी मान ली जाती थी, जिससे ऐसे मार्गों पर टोल अपेक्षाकृत अधिक हो जाता था. यह व्यवस्था इन संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव की अधिक लागत को ध्यान में रखकर बनाई गई थी. हालांकि नए नियम में पहली बार अधिकतम सीमा तय कर दी गई है, जिससे टोल शुल्क अनावश्यक रूप से अधिक नहीं बढ़ेगा.

सरकारी राजपत्र में संशोधित नियम को उदाहरण के साथ भी समझाया गया है. यदि किसी 40 किलोमीटर लंबे हाईवे में 30 किलोमीटर हिस्सा पुल, सुरंग या एलिवेटेड संरचनाओं का है और 10 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो पहले शुल्क योग्य दूरी 310 किलोमीटर तक बन सकती थी. अब नए नियम के तहत यह दूरी घटकर 200 किलोमीटर मानी जाएगी, क्योंकि दोनों गणनाओं में जो कम होगी, वही लागू होगी.

इसी प्रकार यदि 40 किलोमीटर के राजमार्ग में 10 किलोमीटर हिस्सा पुल या सुरंग का है और 30 किलोमीटर सामान्य सड़क है, तो शुल्क योग्य दूरी 200 किलोमीटर के बजाय 130 किलोमीटर मानी जाएगी. इसका सीधा लाभ वाहन चालकों को कम टोल शुल्क के रूप में मिलेगा.

एनएचएआई के पूर्व अधिकारी और आईटीएस इंडिया फोरम के अध्यक्ष अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार अब तक जिन हाईवे पर पुल या सुरंग का हिस्सा अधिक होता था, वहां टोल की गणना संरचना की लंबाई के दस गुना तक की जाती थी और इसकी कोई ऊपरी सीमा नहीं थी. संशोधित नियम में पहली बार स्पष्ट सीमा तय कर दी गई है, जिससे हमेशा कम शुल्क योग्य दूरी के आधार पर टोल निर्धारित किया जाएगा.

नए नियम सार्वजनिक धन से बने मौजूदा टोल प्लाजा पर अगली निर्धारित टोल संशोधन तिथि से लागू होंगे. वहीं रियायत (कन्सेशन) के आधार पर संचालित टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था रियायत अवधि समाप्त होने या परियोजना के एनएचएआई को वापस मिलने के बाद लागू होगी. भविष्य में शुरू होने वाले नए टोल प्लाजा पर यह नया फार्मूला टोल वसूली शुरू होने के पहले दिन से ही प्रभावी रहेगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-